Bareilly News: तीन माह के बेटे को मरा समझकर ठेले के नीचे छोड़ा, 24 घंटे बाद जिंदा देख जागी मां की ममता
बरेली के सेटेलाइट बस स्टैंड पर लावारिस मिले तीन माह के बच्चे अभिनय के साथ रहने के लिए उसकी मां को बाल कल्याण समिति ने अनुमति दे दी है। सोमवार को बच्चे को दौरा पड़ने के बाद उसे जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया।
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बरेली के सेटेलाइट बस स्टैंड पर तीन माह के बच्चे 'अभिनय' को छोड़कर गए माता-पिता स्वाति और ओमकार की ममता अब जागृत हुई है। बाल कल्याण समिति ने मां स्वाति को बच्चे के साथ रहने की अनुमति दे दी है। सोमवार को बच्चे को दौरा पड़ने के कारण दत्तक ग्रहण एजेंसी ने मासूम को फिर जिला अस्पताल के एनआरसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया।
हरदोई के माधौगंज थाना क्षेत्र निवासी स्वाति ने बताया कि तीन माह पहले उनके दो जुड़वां बच्चे हुए थे। उनमें से एक की मृत्यु गर्भ में ही हो गई थी। दूसरा बेटा बच गया, जिसका नाम धैर्य रखा गया। कुछ दिन मायके जाने के बाद जब वह लौटीं तो बच्चे को दौरे पड़ने लगे। आठ दिन पहले उन्हें इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद वे इलाज के लिए बरेली आए।
इसलिए बच्चे को लावारिस छोड़ा
स्वाति के अनुसार, शनिवार रात को जब बच्चे को दौरा पड़ा और वह ऐंठ गया। उसका शरीर ठंडा पड़ा गया। उसे लगा कि बच्चा मर गया है। इसके बाद रात में वे बच्चे को मजबूरन ठेले के नीचे रखकर चले गए। लोगों की सूचना पर चौकी प्रभारी मयंक भारद्वाज ने बच्चे को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भिजवाया था। उपचार के बाद बच्चे को चाइल्डलाइन के सुपुर्द कर दिया गया।
बाल कल्याण समिति की भूमिका
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्र ने बताया कि दंपती ने बताया है कि बच्चे का जन्म क्वीन मेरी अस्पताल लखनऊ में हुआ था। उन्होंने कुछ कागजात भी दिखाए हैं। हालांकि, उनकी तरफ से गवाह पूरे नहीं होने के कारण बच्चे को अभी माता-पिता को नहीं सौंपा गया है। समिति ने उन्हें बुधवार तक का समय दिया है। यदि वे गवाह ले आते हैं, तो बच्चा उन्हें सौंप दिया जाएगा।
पुलिस ने 24 घंटे में बच्चे के माता-पिता ढूंढे
पुलिस ने 24 घंटे के अंदर मासूम के माता-पिता का पता लगा लिया। सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर पता चला कि हरदोई निवासी दंपती उसे यहां छोड़ गए थे। पूछताछ में दंपती ने बच्चे की पहचान की। यह भी स्वीकार किया कि बच्चा गंभीर बीमारी से पीड़ित है। उसे दौरे पड़ते हैं। आर्थिक तंगी की वजह से वे उसका इलाज नहीं करा पा रहे थे। इसी वजह से उसे छोड़ गए थे।