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Shahjahanpur News: फैंसी लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी फर्म ने नहीं उठाई... अब जारी होगा अंतिम नोटिस
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लोधीपुर पुल पर लगी फैंसी लाइट। संवाद
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शाहजहांपुर। शहर की प्रमुख सड़कों के सुंदरीकरण के लिए लगाई गईं अधिकतर तितलीनुमा फैंसी लाइटें महज एक साल में खराब हो गईं। रखरखाव की जिम्मेदारी होने के बावजूद संबंधित फर्म ने खराब लाइटों की मरम्मत नहीं कराई। अब नगर निगम फर्म को अंतिम नोटिस जारी करेगा। एक सप्ताह में संतोषजनक जवाब न मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट कर उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, करीब 100 खराब लाइटों को अब तक उतारकर रखवाया जा चुका है।
नगर निगम ने एक वर्ष पहले हरदोई की श्री लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल फर्म को शहर की मुख्य सड़कों पर फैंसी लाइटें लगाने का ठेका दिया था। टेंडर के अनुसार, एक लाइट की कीमत 24 हजार रुपये थी। शहर में कुल 500 लाइटें लगाई गई थीं। ये लाइटें सुभाषनगर स्मार्ट रोड, लोधीपुर पुल से सुभाष चौराहा तक, अजीजगंज से बरेली मोड़ और पुत्तूलाल चौराहा समेत कई प्रमुख मार्गों पर स्थापित की गई थीं।
इन मार्गों पर कुछ खंभों पर ही फैंसी लाइट नजर आ रहीं हैं। लोधीपुर रोड पर करीब 50 लाइटों को लगाया गया था लेकिन अब केवल 20-25 लाइट ही दिखाई पड़ रही हैं। फाइबर सीट पर डिजाइन की गई इन लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी फर्म को पांच वर्ष तक निभानी थी। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, एक साल के भीतर ही शहर की अधिकांश लाइटें खराब होने लगीं।
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पार्षदों और स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद नगर निगम ने करीब छह माह पहले फर्म को पहला नोटिस भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दूसरा नोटिस भी जारी किया गया, जिस पर भी फर्म ने प्रतिक्रिया नहीं दी। संवाद
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100 से अधिक खराब लाइटें उतारी गईं
अधिकारियों के मुताबिक, 100 से अधिक लाइटें खराब होने से शहर की सड़कों की सुंदरता प्रभावित हो रही थी। इसलिए उन्हें मरम्मत के लिए उतार लिया गया है। जहां भी लाइटें खराब हैं, उनकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित फर्म की ही है।
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पूरी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
फाइबर की बनीं तितलीनुमा साधारण फैंसी लाइटों को 24 हजार रुपये में खरीदने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। माना जा रहा है कि लाइटों की कीमत बढ़ाकर खरीदा गया है। लाइटों की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि महज एक वर्ष में ही 20 प्रतिशत लाइट खराब हो चुकी हैं। कई लाइटें अब भी खंभे में लगी हैं लेकिन जल नहीं रहीं। एक साल के अंदर ही अधिकतर लाइटों के खराब हो जाने से पूरी खरीद प्रक्रिया संदेह के दायरे में आ रही है।
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संबंधित फर्म को दो नोटिस भेजे जा चुके हैं। अब तीसरा और अंतिम नोटिस जारी किया जा रहा है। एक सप्ताह में जवाब नहीं मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी और उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी।
— सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
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नगर निगम ने एक वर्ष पहले हरदोई की श्री लक्ष्मी इलेक्ट्रिकल फर्म को शहर की मुख्य सड़कों पर फैंसी लाइटें लगाने का ठेका दिया था। टेंडर के अनुसार, एक लाइट की कीमत 24 हजार रुपये थी। शहर में कुल 500 लाइटें लगाई गई थीं। ये लाइटें सुभाषनगर स्मार्ट रोड, लोधीपुर पुल से सुभाष चौराहा तक, अजीजगंज से बरेली मोड़ और पुत्तूलाल चौराहा समेत कई प्रमुख मार्गों पर स्थापित की गई थीं।
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इन मार्गों पर कुछ खंभों पर ही फैंसी लाइट नजर आ रहीं हैं। लोधीपुर रोड पर करीब 50 लाइटों को लगाया गया था लेकिन अब केवल 20-25 लाइट ही दिखाई पड़ रही हैं। फाइबर सीट पर डिजाइन की गई इन लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी फर्म को पांच वर्ष तक निभानी थी। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, एक साल के भीतर ही शहर की अधिकांश लाइटें खराब होने लगीं।
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पार्षदों और स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद नगर निगम ने करीब छह माह पहले फर्म को पहला नोटिस भेजा था, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दूसरा नोटिस भी जारी किया गया, जिस पर भी फर्म ने प्रतिक्रिया नहीं दी। संवाद
100 से अधिक खराब लाइटें उतारी गईं
अधिकारियों के मुताबिक, 100 से अधिक लाइटें खराब होने से शहर की सड़कों की सुंदरता प्रभावित हो रही थी। इसलिए उन्हें मरम्मत के लिए उतार लिया गया है। जहां भी लाइटें खराब हैं, उनकी मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित फर्म की ही है।
पूरी प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
फाइबर की बनीं तितलीनुमा साधारण फैंसी लाइटों को 24 हजार रुपये में खरीदने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। माना जा रहा है कि लाइटों की कीमत बढ़ाकर खरीदा गया है। लाइटों की गुणवत्ता पर सवाल उठना लाजिमी है क्योंकि महज एक वर्ष में ही 20 प्रतिशत लाइट खराब हो चुकी हैं। कई लाइटें अब भी खंभे में लगी हैं लेकिन जल नहीं रहीं। एक साल के अंदर ही अधिकतर लाइटों के खराब हो जाने से पूरी खरीद प्रक्रिया संदेह के दायरे में आ रही है।
संबंधित फर्म को दो नोटिस भेजे जा चुके हैं। अब तीसरा और अंतिम नोटिस जारी किया जा रहा है। एक सप्ताह में जवाब नहीं मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी और उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी।
— सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त