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Shahjahanpur News: स्कूलों में बालिकाओं के शौचालय बदहाल, आसपास रहती है गंदगी, दरवाजे तक हैं टूटे
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हद्दफ स्थित कंपोजिट स्कूल के शौचलय पर बालक-बालिका नहीं लिखा। संवाद
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शाहजहांपुर। शिक्षण संस्थाओं में स्वच्छता का माहौल बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग से शौचालय के आदेश दिए हैं। वहीं, परिषदीय स्कूलों में बालिका शौचालयों की स्थिति बेहतर नहीं हैं। बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय सिर्फ नाम के हैं, जबकि उपयोग दोनों ही करते हैं। नियमित सफाई के लिए कर्मचारी तक नियुक्त नहीं है। गंदे शौचालयों के उपयोग से बीमारी का खतरा बना रहता है।
जिले में बेसिक के 2716 स्कूलों व माध्यमिक के अधीन 389 विद्यालयों का संचालन होता है। कई परिषदीय स्कूलों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उपयोग सभी करते हैं। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय अलीजई में बच्चे पढ़ते हुए मिले। किराये का भवन होने के चलते बच्चों के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। स्कूल में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय बने थे, लेकिन उनके गेट की स्थिति काफी खराब थी। बालिका के शौचालय का गेट नीचे से टूटा हुआ था।
इसी तरह मोहल्ला हद्दफ स्थित कंपोजिट स्कूल में पांच शौचालय बने हुए मिले। इसमें किसी पर बालक अथवा बालिका नहीं लिखा था। इसके चलते छात्र-छात्राएं सभी शौचालयों का उपयोग करते मिले। शिक्षक के अनुसार, एक शौचालय कक्षा आठ की बालिकाओं के लिए बना है। सभी में पानी का इंतजाम है। यहां पर दिव्यांग शौचालय नहीं मिला।
नगर व ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में शौचालयों की स्थिति बेहतर नहीं है। शौचालयों की सफाई नहीं होती है। कोई सरकारी कर्मचारी नियुक्त नहीं होने के चलते निजी कर्मी से सफाई कराई जाती है। वह भी रोजाना नहीं आता है। ऐसे में शौचालयों में गंदगी रहती है।
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नगर निगम को दिया था सफाई का जिम्मा
शिक्षकों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों ने नगर निगम के कर्मचारियों को सफाई का जिम्मा दिया था। उनके निर्देश के बाद कुछ दिन स्कूलों में सफाई की गई। बाद में सफाईकर्मियों ने आना बंद कर दिया। इसके बाद शिक्षक कंपोजिट ग्रांट से सफाई का कार्य करा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई कार्य के निर्देश हैं, लेकिन सफाई कर्मचारी सप्ताह में एक या दो बार आते हैं। इसके चलते शौचालय गंदे पड़े रहते हैं।
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ग्रामीण इलाकों के शौचालयों की भी हालत खराब
शहर से लेकर देहात तक के स्कूलों के शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं हैं। गंदगी के साथ ही सीटें तक टूटी हैं। इसके चलते शौचालय में जाने से बच्चे घबराते हैं। कई जगह पर तभी शौचालयों के गेट खुलते हैं, जब अधिकारी निरीक्षण करने के लिए आते हैं।
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हर वर्ष बीआरसी पर दिए जाते हैं सेनेटरी पैड
स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए स्वास्थ्य विभाग सेनेटरी पैड उपलब्ध कराता है। 2025 में सेनेटरी पैड का वितरण किया गया था। वर्ष 2026 में अब तक पैड खरीदने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस वजह से सेनेटरी पैड का वितरण नहीं हो सका है। सेनेटरी पैड को खरीदने के लिए स्वास्थ्य विभाग में प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि स्कूलों की मांग के हिसाब से बीआरसी पर सेनेटरी पैड को उपलब्ध कराते हैं। वहां से विद्यालयों में वितरण किया जाता है।
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कंपोजिट ग्रांट की धनराशि का दस प्रतिशत सफाई पर खर्च होना है। उससे शौचालयों की सफाई की व्यवस्था रहती है। शौचालयाें के निर्माण के लिए कार्य हो रहा है। जहां गड़बड़ी है, वहां पर कार्य कराया जाएगा।
- सुरेंद्र मौर्या, प्रभारी बीएसए
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जिले में बेसिक के 2716 स्कूलों व माध्यमिक के अधीन 389 विद्यालयों का संचालन होता है। कई परिषदीय स्कूलों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उपयोग सभी करते हैं। सोमवार को प्राथमिक विद्यालय अलीजई में बच्चे पढ़ते हुए मिले। किराये का भवन होने के चलते बच्चों के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। स्कूल में बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय बने थे, लेकिन उनके गेट की स्थिति काफी खराब थी। बालिका के शौचालय का गेट नीचे से टूटा हुआ था।
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इसी तरह मोहल्ला हद्दफ स्थित कंपोजिट स्कूल में पांच शौचालय बने हुए मिले। इसमें किसी पर बालक अथवा बालिका नहीं लिखा था। इसके चलते छात्र-छात्राएं सभी शौचालयों का उपयोग करते मिले। शिक्षक के अनुसार, एक शौचालय कक्षा आठ की बालिकाओं के लिए बना है। सभी में पानी का इंतजाम है। यहां पर दिव्यांग शौचालय नहीं मिला।
नगर व ग्रामीण क्षेत्र के अधिकतर स्कूलों में शौचालयों की स्थिति बेहतर नहीं है। शौचालयों की सफाई नहीं होती है। कोई सरकारी कर्मचारी नियुक्त नहीं होने के चलते निजी कर्मी से सफाई कराई जाती है। वह भी रोजाना नहीं आता है। ऐसे में शौचालयों में गंदगी रहती है।
नगर निगम को दिया था सफाई का जिम्मा
शिक्षकों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में प्रशासनिक अधिकारियों ने नगर निगम के कर्मचारियों को सफाई का जिम्मा दिया था। उनके निर्देश के बाद कुछ दिन स्कूलों में सफाई की गई। बाद में सफाईकर्मियों ने आना बंद कर दिया। इसके बाद शिक्षक कंपोजिट ग्रांट से सफाई का कार्य करा रहे हैं। वहीं, ग्रामीण स्तर पर ग्राम पंचायत स्तर पर सफाई कार्य के निर्देश हैं, लेकिन सफाई कर्मचारी सप्ताह में एक या दो बार आते हैं। इसके चलते शौचालय गंदे पड़े रहते हैं।
ग्रामीण इलाकों के शौचालयों की भी हालत खराब
शहर से लेकर देहात तक के स्कूलों के शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं हैं। गंदगी के साथ ही सीटें तक टूटी हैं। इसके चलते शौचालय में जाने से बच्चे घबराते हैं। कई जगह पर तभी शौचालयों के गेट खुलते हैं, जब अधिकारी निरीक्षण करने के लिए आते हैं।
हर वर्ष बीआरसी पर दिए जाते हैं सेनेटरी पैड
स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए स्वास्थ्य विभाग सेनेटरी पैड उपलब्ध कराता है। 2025 में सेनेटरी पैड का वितरण किया गया था। वर्ष 2026 में अब तक पैड खरीदने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इस वजह से सेनेटरी पैड का वितरण नहीं हो सका है। सेनेटरी पैड को खरीदने के लिए स्वास्थ्य विभाग में प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि स्कूलों की मांग के हिसाब से बीआरसी पर सेनेटरी पैड को उपलब्ध कराते हैं। वहां से विद्यालयों में वितरण किया जाता है।
कंपोजिट ग्रांट की धनराशि का दस प्रतिशत सफाई पर खर्च होना है। उससे शौचालयों की सफाई की व्यवस्था रहती है। शौचालयाें के निर्माण के लिए कार्य हो रहा है। जहां गड़बड़ी है, वहां पर कार्य कराया जाएगा।
- सुरेंद्र मौर्या, प्रभारी बीएसए

हद्दफ स्थित कंपोजिट स्कूल के शौचलय पर बालक-बालिका नहीं लिखा। संवाद
