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Shahjahanpur News: सामाजिक दायित्व के निर्वहन की धुन में लगे गणतंत्र के प्रहरी
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स्वाति सिंह
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शाहजहांपुर। जिले के कई लोग ऐसे हैं जो समाज में चेतना जगाने और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाकर सामाजिक उत्थान में योगदान दे रहे हैं। ऐसे भी कई लोग हैं जो सेवानिवृत्त होने के बाद भी समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। ये लोग गणतंत्र के सच्चे प्रहरी साबित हो रहे हैं।
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सेवानिवृत्त होने के बाद भी लग रही गुरुजी की कक्षा
प्राथमिक विद्यालय बिजलीपुरा के प्रधानाध्यापक सैयद मोहम्मद अजीज सेवानिवृत्त होने के बाद भी कक्षाएं लगाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। वह प्राथमिक स्कूल में निशुल्क पढ़ाते हैं, साथ ही मोहल्ले के बच्चों को शिक्षित करने में लगे हैं। मोहल्ला महमंद हद्दफ निवासी सैयद मोहम्मद अजीज वर्ष 2014 में प्राथमिक स्कूल से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद तीन महीने तक विशेष प्रशिक्षक के तौर पर उन्हें प्राथमिक विद्यालय, अजीजगंज में नियुक्त किया गया। उन्होंने बच्चों को उर्दू के साथ अन्य विषयों की शिक्षा दी। फिर शासन ने विशेष प्रशिक्षकाें को मानदेय देना बंद कर दिया। बावजूद इसके उन्होंने स्कूल जाना और बच्चाें को पढ़ाना नहीं छाेड़ा। सेवानिवृत्त होने के 12 साल के बाद भी उनका स्कूल से लगाव है। वह प्रतिदिन स्कूल जाते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। अजीज बताते हैं कि दोपहर बाद मोहल्ले के करीब 15 बच्चे उनसे पढ़ने रोजाना आते हैं।
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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित करने की धुन
झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए स्वाति सिंह लगातार प्रयास कर रहीं हैं। भोर फाउंडेशन की अध्यक्ष स्वाति ने बच्चों को किताबें, स्टेशनरी और उन्हें स्कूल तक लेकर जाने का जिम्मा उठाया है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के व्यक्तिगत विकास के लिए कार्यशाला कराने की योजना है। उन्होंने टॉउन हॉल स्थित झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले करीब सौ बच्चों को किताबों, स्टेशनरी और बालिकाओं की जरूरत की वस्तुओं का वितरण किया। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय, जेबां, पुवायां में दो सौ से ज्यादा छात्र-छात्राओं को किताबें, स्टेशनरी आदि का वितरण किया। स्वाति सिंह बताती हैं कि उनकी संस्था बालिका शिक्षा को लेकर लखनऊ और शाहजहांपुर में काम कर रही है। इस वर्ष परिषदीय स्कूलों में बीएसए के सहयोग से व्यक्तित्व विकास के लिए कक्षाएं लगाई जाएंगी, जिससे वंचित वर्ग के बच्चे भी तरक्की के रास्ते पर चल सकें।
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धूपबत्ती से महकी जिंदगानी
आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं का जीवन धूपबत्ती की खुशबू ने महका दिया है। धूपबत्ती के कारोबार ने रफ्तार पकड़ी तो मातृ शक्ति सशक्त हो गई। समूह में महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजा के परमाली गांव की पांच महिलाओं ने बालाजी समूह के नाम से धूपबत्ती का कारोबार शुरू किया था। उन्हें विनोबा सेवा आश्रम का सहयोग मिला। उसके बाद उन्हें धूपबत्ती वाले सांचे, गुलाब की पत्ती आदि के जरिये धूपबत्ती बनाना शुरू किया। समूह का नेतृत्व मुन्नी देवी करतीं हैं। उनके साथ अब 20 महिलाएं जुड़ गईं हैं। ये महिलाएं अपने घरों या समूह में बैठकर धूपबत्ती बनाती हैं। उसे पैक कर आपूर्ति करती हैं। आश्रम के संस्थापक रमेश भइया बताते हैं कि धूपबत्ती का निर्माण होने के बाद खरीदार गांव से पैकेट खरीदकर ले जाते हैं। इसके अतिरिक्त रिलायंस टॉउनशिप के स्वावलंबन केंद्र पर भी बिक्री की जाती है। धूपबत्ती के कारोबार से महिलाएं आत्मनिर्भर हो गईं हैं।
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प्राथमिक विद्यालय बिजलीपुरा के प्रधानाध्यापक सैयद मोहम्मद अजीज सेवानिवृत्त होने के बाद भी कक्षाएं लगाकर बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं। वह प्राथमिक स्कूल में निशुल्क पढ़ाते हैं, साथ ही मोहल्ले के बच्चों को शिक्षित करने में लगे हैं। मोहल्ला महमंद हद्दफ निवासी सैयद मोहम्मद अजीज वर्ष 2014 में प्राथमिक स्कूल से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद तीन महीने तक विशेष प्रशिक्षक के तौर पर उन्हें प्राथमिक विद्यालय, अजीजगंज में नियुक्त किया गया। उन्होंने बच्चों को उर्दू के साथ अन्य विषयों की शिक्षा दी। फिर शासन ने विशेष प्रशिक्षकाें को मानदेय देना बंद कर दिया। बावजूद इसके उन्होंने स्कूल जाना और बच्चाें को पढ़ाना नहीं छाेड़ा। सेवानिवृत्त होने के 12 साल के बाद भी उनका स्कूल से लगाव है। वह प्रतिदिन स्कूल जाते हैं और बच्चों को पढ़ाते हैं। अजीज बताते हैं कि दोपहर बाद मोहल्ले के करीब 15 बच्चे उनसे पढ़ने रोजाना आते हैं।
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आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षित करने की धुन
झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए स्वाति सिंह लगातार प्रयास कर रहीं हैं। भोर फाउंडेशन की अध्यक्ष स्वाति ने बच्चों को किताबें, स्टेशनरी और उन्हें स्कूल तक लेकर जाने का जिम्मा उठाया है। परिषदीय स्कूलों में बच्चों के व्यक्तिगत विकास के लिए कार्यशाला कराने की योजना है। उन्होंने टॉउन हॉल स्थित झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले करीब सौ बच्चों को किताबों, स्टेशनरी और बालिकाओं की जरूरत की वस्तुओं का वितरण किया। इसी तरह पूर्व माध्यमिक विद्यालय, जेबां, पुवायां में दो सौ से ज्यादा छात्र-छात्राओं को किताबें, स्टेशनरी आदि का वितरण किया। स्वाति सिंह बताती हैं कि उनकी संस्था बालिका शिक्षा को लेकर लखनऊ और शाहजहांपुर में काम कर रही है। इस वर्ष परिषदीय स्कूलों में बीएसए के सहयोग से व्यक्तित्व विकास के लिए कक्षाएं लगाई जाएंगी, जिससे वंचित वर्ग के बच्चे भी तरक्की के रास्ते पर चल सकें।
धूपबत्ती से महकी जिंदगानी
आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं का जीवन धूपबत्ती की खुशबू ने महका दिया है। धूपबत्ती के कारोबार ने रफ्तार पकड़ी तो मातृ शक्ति सशक्त हो गई। समूह में महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजा के परमाली गांव की पांच महिलाओं ने बालाजी समूह के नाम से धूपबत्ती का कारोबार शुरू किया था। उन्हें विनोबा सेवा आश्रम का सहयोग मिला। उसके बाद उन्हें धूपबत्ती वाले सांचे, गुलाब की पत्ती आदि के जरिये धूपबत्ती बनाना शुरू किया। समूह का नेतृत्व मुन्नी देवी करतीं हैं। उनके साथ अब 20 महिलाएं जुड़ गईं हैं। ये महिलाएं अपने घरों या समूह में बैठकर धूपबत्ती बनाती हैं। उसे पैक कर आपूर्ति करती हैं। आश्रम के संस्थापक रमेश भइया बताते हैं कि धूपबत्ती का निर्माण होने के बाद खरीदार गांव से पैकेट खरीदकर ले जाते हैं। इसके अतिरिक्त रिलायंस टॉउनशिप के स्वावलंबन केंद्र पर भी बिक्री की जाती है। धूपबत्ती के कारोबार से महिलाएं आत्मनिर्भर हो गईं हैं।

स्वाति सिंह

स्वाति सिंह
