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Shahjahanpur News: कौशल और काबिलियत से बनाई पहचान...रोशन कर रहे जिले का नाम
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संचिता निगम। संवाद
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शाहजहांपुर। शाहजहांपुर के युवा हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रहे हैं। चाहे खेल का मैदान हो या व्यापार अथवा समाजसेवा, युवाओं ने अपनी मेधा और काबिलियत के दम पर पहचान स्थापित की है। युवा खुद सफलता पाने के साथ ही दूसरों को भी सतत मेहनत की प्रेरणा दे रहे हैं। नारी शक्ति भी पीछे नहीं है। युवतियों ने भी सफलता के आसमान पर परवाज भरी है। ज्ञान, आध्यात्म और ऊर्जा से पूरी दुनिया को आलोकित करने वाले स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर पेश है शाहजहांपुर के युवाओं की प्रेरणादायक गाथा।
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अंजलि ने चलाया हॉकी का जादू, एचपीएल में दिखाया दम
रोजा के हथौड़ा गांव की क्रिश्चियन कॉलोनी निवासी सियाराम एडवोकेट की बेटी अंजलि गौतम ने हॉकी इंडिया लीग () में अपनी प्रतिभा का जादू दिखाया है। हथौड़ा स्थित नायक जदुनाथ सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम से हॉकी क्षेत्र में कॅरिअर की शुरुआत करने वालीं अंजलि ने वर्ष 2009-10 में लखनऊ हॉस्टल में रहकर चार साल तक अभ्यास किया। इसके बाद वर्ष 2016 में ग्वालियर हॉकी अकादमी में अपने खेल को निखारा। वर्तमान में वह ग्वालियर में सीनियर टीटीई हैं। अंजलि बताती हैं कि हॉकी इंडिया लीग में उन्हें कोलकाता बंगाल टाइगर की टीम ने दो लाख रुपये में खरीदा था। 27 वर्षीय स्ट्राइकर ने टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर पूरा किया। अंजलि बताती हैं कि उनका सपना देश के लिए खेलने का है। इसके लिए वह जी-तोड़ मेहनत कर रहीं हैं। अंजलि ने इंटर रेलवे एनसीआर 2025 में कांस्य पदक पाया। गत वर्ष 38वीं राष्ट्रीय राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड में रजत पदक प्राप्त किया था। वर्ष 2023 में 37वीं राष्ट्रीय गेम, गोवा में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके अलावा भी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुकी हैं। वह युवतियों को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित भी करतीं हैं। संवाद
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डिजिटल शिक्षा देकर नीपा में विवेक में बनाई जगह
जलालाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय, दहेना के इंचार्ज प्रधानाध्यापक विवेक कुशवाहा ने छात्र-छात्राओं को डिजिटल शिक्षा देकर राष्ट्रीय शैक्षिक योजना व प्रशासन संस्थान लीडरशिप (नीपा) में जगह बनाई है। पूरे भारत से 55 प्रधानाध्यापकों में उत्तर प्रदेश से मात्र चार ही शामिल हुए हैं। वह बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के जरिये डिजिटल शिक्षा देते हैं। डिजिटल वीडियो, मॉडल प्रोजेक्ट, स्क्रीन टूल का प्रयोग कर छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं। वह बताते हैं कि स्मार्ट बोर्ड पैनल, लैपटॉप, मोबाइल, रेडियो, स्मार्ट टीवी और डिजिटल बोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों को बदलते परिवेश और सांसारिकता की शिक्षा दी जाती है। कंप्यूटर में टाइपिंग, एमएस वर्ड, नोट पैड आदि की जानकारी देते हैं। इंडिया इंटरनेशनल ऑफ सेंटर, दिल्ली में 17 से 19 जनवरी के बीच कांफ्रेंस में प्रतिभाग कर पूरे भारत के शिक्षकों के सामने प्रस्तुति देंगे।
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मानवता की पाठशाला, बच्चों को शिक्षित कर रहे अमित
शहर के युवाओं की टोली बच्चों को शिक्षित करने में जुटी है। समाज के विभिन्न कामों के साथ ही मानवता की पाठशाला खोलकर आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। मानवता वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने कोरोनाकाल में अपनी टीम के सदस्यों के साथ लोगों के लिए दवा के साथ खाने का इंतजाम किया। उसी समय संगठन की नींव रखी और धीरे-धीरे 70 युवा जुड़ गए। इसके बाद ग्रामीण और दूरदराज की छह बस्तियों में मानवता की पाठशाला खोली गई। यहां बच्चों को शिक्षा के साथ जीवन कौशल, आत्मविश्वास और मुख्यधारा से जुड़ने का अनुभव दे रहे हैं। अमित बताते हैं कि मलिन बस्तियों में ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जो स्कूल नहीं जा पाते हैं। उनके परिजनों की काउंसलिंग कर लगभग 145 बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश कराया। अमित बताते हैं कि युवाओं को समाजसेवा से जोड़ने के लिए भी वह प्रयास करते हैं।
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नौकरी कर इकट्ठा किए रुपये, रेस्टोरेंट खोलकर दिया लोगों को रोजगार
शहर की रिलायंस टाउनशिप निवासी संचिता निगम ने सपनों की उड़ान भरने के लिए काफी संघर्ष किया। उन्होंने निजी स्कूलों में नौकरी कर रुपये इक्ट्ठा किए और अपना रेस्टोरेंट खोलकर सपना पूरा किया। कानपुर निवासी संचिता बचपन से रेस्टोरेंट खोलना चाहतीं थीं। उन्हें खाना बनाने का बहुत शौक था। परिवार के इन्कार करने पर उन्हें मनाकर केरल में साउथ इंडियन खाना बनाना सीखा। रेस्टोरेंट खोलने की राह तब भी नहीं दिखी। तभी परिजनों ने उनकी शादी कर दी। यहां आकर तीन स्कूलों में नौकरी की। परिवार और नौकरी में सामंजस्य स्थापित कर रुपये इकट्ठा किए और फिर रेस्टोरेंट को शुरू किया। संचिता बताती हैं कि वह नौकरी करने वाली के बजाय नौकरी देने का सपना देखतीं थीं। उन्होंने अपने रेस्टोरेंट में आठ लोगों को नौकरी भी दी है। संचिता बताती हैं कि वह युवतियों को अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित करतीं हैं।
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रोजा के हथौड़ा गांव की क्रिश्चियन कॉलोनी निवासी सियाराम एडवोकेट की बेटी अंजलि गौतम ने हॉकी इंडिया लीग () में अपनी प्रतिभा का जादू दिखाया है। हथौड़ा स्थित नायक जदुनाथ सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम से हॉकी क्षेत्र में कॅरिअर की शुरुआत करने वालीं अंजलि ने वर्ष 2009-10 में लखनऊ हॉस्टल में रहकर चार साल तक अभ्यास किया। इसके बाद वर्ष 2016 में ग्वालियर हॉकी अकादमी में अपने खेल को निखारा। वर्तमान में वह ग्वालियर में सीनियर टीटीई हैं। अंजलि बताती हैं कि हॉकी इंडिया लीग में उन्हें कोलकाता बंगाल टाइगर की टीम ने दो लाख रुपये में खरीदा था। 27 वर्षीय स्ट्राइकर ने टीम के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर पूरा किया। अंजलि बताती हैं कि उनका सपना देश के लिए खेलने का है। इसके लिए वह जी-तोड़ मेहनत कर रहीं हैं। अंजलि ने इंटर रेलवे एनसीआर 2025 में कांस्य पदक पाया। गत वर्ष 38वीं राष्ट्रीय राष्ट्रीय खेल उत्तराखंड में रजत पदक प्राप्त किया था। वर्ष 2023 में 37वीं राष्ट्रीय गेम, गोवा में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। इसके अलावा भी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीत चुकी हैं। वह युवतियों को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित भी करतीं हैं। संवाद
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डिजिटल शिक्षा देकर नीपा में विवेक में बनाई जगह
जलालाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय, दहेना के इंचार्ज प्रधानाध्यापक विवेक कुशवाहा ने छात्र-छात्राओं को डिजिटल शिक्षा देकर राष्ट्रीय शैक्षिक योजना व प्रशासन संस्थान लीडरशिप (नीपा) में जगह बनाई है। पूरे भारत से 55 प्रधानाध्यापकों में उत्तर प्रदेश से मात्र चार ही शामिल हुए हैं। वह बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के जरिये डिजिटल शिक्षा देते हैं। डिजिटल वीडियो, मॉडल प्रोजेक्ट, स्क्रीन टूल का प्रयोग कर छात्र-छात्राओं को पढ़ाते हैं। वह बताते हैं कि स्मार्ट बोर्ड पैनल, लैपटॉप, मोबाइल, रेडियो, स्मार्ट टीवी और डिजिटल बोर्ड के माध्यम से विद्यार्थियों को बदलते परिवेश और सांसारिकता की शिक्षा दी जाती है। कंप्यूटर में टाइपिंग, एमएस वर्ड, नोट पैड आदि की जानकारी देते हैं। इंडिया इंटरनेशनल ऑफ सेंटर, दिल्ली में 17 से 19 जनवरी के बीच कांफ्रेंस में प्रतिभाग कर पूरे भारत के शिक्षकों के सामने प्रस्तुति देंगे।
मानवता की पाठशाला, बच्चों को शिक्षित कर रहे अमित
शहर के युवाओं की टोली बच्चों को शिक्षित करने में जुटी है। समाज के विभिन्न कामों के साथ ही मानवता की पाठशाला खोलकर आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। मानवता वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव ने कोरोनाकाल में अपनी टीम के सदस्यों के साथ लोगों के लिए दवा के साथ खाने का इंतजाम किया। उसी समय संगठन की नींव रखी और धीरे-धीरे 70 युवा जुड़ गए। इसके बाद ग्रामीण और दूरदराज की छह बस्तियों में मानवता की पाठशाला खोली गई। यहां बच्चों को शिक्षा के साथ जीवन कौशल, आत्मविश्वास और मुख्यधारा से जुड़ने का अनुभव दे रहे हैं। अमित बताते हैं कि मलिन बस्तियों में ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जो स्कूल नहीं जा पाते हैं। उनके परिजनों की काउंसलिंग कर लगभग 145 बच्चों को सरकारी स्कूलों में प्रवेश कराया। अमित बताते हैं कि युवाओं को समाजसेवा से जोड़ने के लिए भी वह प्रयास करते हैं।
नौकरी कर इकट्ठा किए रुपये, रेस्टोरेंट खोलकर दिया लोगों को रोजगार
शहर की रिलायंस टाउनशिप निवासी संचिता निगम ने सपनों की उड़ान भरने के लिए काफी संघर्ष किया। उन्होंने निजी स्कूलों में नौकरी कर रुपये इक्ट्ठा किए और अपना रेस्टोरेंट खोलकर सपना पूरा किया। कानपुर निवासी संचिता बचपन से रेस्टोरेंट खोलना चाहतीं थीं। उन्हें खाना बनाने का बहुत शौक था। परिवार के इन्कार करने पर उन्हें मनाकर केरल में साउथ इंडियन खाना बनाना सीखा। रेस्टोरेंट खोलने की राह तब भी नहीं दिखी। तभी परिजनों ने उनकी शादी कर दी। यहां आकर तीन स्कूलों में नौकरी की। परिवार और नौकरी में सामंजस्य स्थापित कर रुपये इकट्ठा किए और फिर रेस्टोरेंट को शुरू किया। संचिता बताती हैं कि वह नौकरी करने वाली के बजाय नौकरी देने का सपना देखतीं थीं। उन्होंने अपने रेस्टोरेंट में आठ लोगों को नौकरी भी दी है। संचिता बताती हैं कि वह युवतियों को अपने सपने पूरे करने के लिए प्रेरित करतीं हैं।

संचिता निगम। संवाद

संचिता निगम। संवाद

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