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Shahjahanpur News: 23 दिनों में सुनाया फैसला, पांच आरोपी दोषमुक्त करार
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:48 AM IST
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शाहजहांपुर। गोवध निवारण और पशु क्रूरता अधिनियम के मामले में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। जिला सत्र न्यायाधीश ने महज 23 दिन के अंदर मुकदमे का फैसला कर आरोपियों को राहत दी है। 13 मार्च से शुरू हुई सुनवाई में छह अप्रैल को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया।
जलालाबाद थाने के उपनिरीक्षक जुगेश कुमार ने 23 दिसंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि गश्त के दौरान उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोग गोवंशीय पशुओं को रस्सी से बांधकर बेचने के लिए ले जा रहे हैं। ढका उजेरा गांव के जंगल में 80 गाय, 14 सांड़-बैल समेत कुल 94 गोवंशीय पशु मिले थे। आरोपियों ने बताया कि वे लोग राजस्थान से लगभग दो महीने पहले पशु चराने आए थे। रास्ते में अन्य पशु भी साथ लेते गए। वापस जाते समय पशुओं को कसाइयों को बेच देते हैं। उनका एक साथी मान सिंह मौके से भाग गया। पुलिस ने पकड़े गए आरोपी बूंदी के थाना तालेड़ा के लक्ष्मीपुरा निवासी मांगीलाल, टोंक के देवली निवासी राजू उर्फ बंटी, बूंदी के थाना दौलतपुरा रामनगर के बंजारों का झोपड़ा निवासी सीमा, बूंदी के थाना दबलाना के गांव माता जी का झोपड़ा की रहने वाली सीता और झालवाड़ा के थाना पाटन क्षेत्र के गांव जलवाड निवासी कमला को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम व पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आरोपपत्र अदालत भेजा गया।
13 मार्च को आरोपियों के विरुद्ध अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में आरोपियों ने अभियोजन के कथन को गलत बताते हुए कहा कि वे अपने पालतू पशुओं को चराने के लिए प्रतिवर्ष राजस्थान से गंगा की तलहटी में आते हैं, क्योंकि राजस्थान में चारा व पानी का अभाव रहता है। पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार कर गोवध का झूठा आरोप लगाकर चालान किया। अदालत ने पाया कि पशु चिकित्सक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी पशु पर चोट या घाव नहीं था और वे स्वस्थ थे। इससे पशु क्रूरता का आरोप कमजोर पड़ जाता है। विवेचक ने भी स्वीकार किया है कि उसने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को केस डायरी में अंकित नहीं किया तथा स्वयं गोवंश की गिनती तक नहीं की। इससे विवेचना की गुणवत्ता पर प्रश्न उठता है।
छह अप्रैल को दिए अपने फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने मांगीलाल, राजू उर्फ बंटी, सीमा, सीता और कमला को दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने अभियुक्तों को आदेश दिया कि वे 20-20 हजार रुपये का स्वबंधपत्र एवं समान धनराशि के दो जमानतनामे सात दिन में दाखिल करें।
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जलालाबाद थाने के उपनिरीक्षक जुगेश कुमार ने 23 दिसंबर 2025 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि गश्त के दौरान उन्हें सूचना मिली कि कुछ लोग गोवंशीय पशुओं को रस्सी से बांधकर बेचने के लिए ले जा रहे हैं। ढका उजेरा गांव के जंगल में 80 गाय, 14 सांड़-बैल समेत कुल 94 गोवंशीय पशु मिले थे। आरोपियों ने बताया कि वे लोग राजस्थान से लगभग दो महीने पहले पशु चराने आए थे। रास्ते में अन्य पशु भी साथ लेते गए। वापस जाते समय पशुओं को कसाइयों को बेच देते हैं। उनका एक साथी मान सिंह मौके से भाग गया। पुलिस ने पकड़े गए आरोपी बूंदी के थाना तालेड़ा के लक्ष्मीपुरा निवासी मांगीलाल, टोंक के देवली निवासी राजू उर्फ बंटी, बूंदी के थाना दौलतपुरा रामनगर के बंजारों का झोपड़ा निवासी सीमा, बूंदी के थाना दबलाना के गांव माता जी का झोपड़ा की रहने वाली सीता और झालवाड़ा के थाना पाटन क्षेत्र के गांव जलवाड निवासी कमला को गिरफ्तार कर लिया। विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ गोवध निवारण अधिनियम व पशु क्रूरता अधिनियम के तहत आरोपपत्र अदालत भेजा गया।
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13 मार्च को आरोपियों के विरुद्ध अदालत में सुनवाई हुई। अदालत में आरोपियों ने अभियोजन के कथन को गलत बताते हुए कहा कि वे अपने पालतू पशुओं को चराने के लिए प्रतिवर्ष राजस्थान से गंगा की तलहटी में आते हैं, क्योंकि राजस्थान में चारा व पानी का अभाव रहता है। पुलिस ने उन्हें गलत तरीके से गिरफ्तार कर गोवध का झूठा आरोप लगाकर चालान किया। अदालत ने पाया कि पशु चिकित्सक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी पशु पर चोट या घाव नहीं था और वे स्वस्थ थे। इससे पशु क्रूरता का आरोप कमजोर पड़ जाता है। विवेचक ने भी स्वीकार किया है कि उसने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को केस डायरी में अंकित नहीं किया तथा स्वयं गोवंश की गिनती तक नहीं की। इससे विवेचना की गुणवत्ता पर प्रश्न उठता है।
छह अप्रैल को दिए अपने फैसले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश विष्णु कुमार शर्मा ने मांगीलाल, राजू उर्फ बंटी, सीमा, सीता और कमला को दोषमुक्त करार दिया। अदालत ने अभियुक्तों को आदेश दिया कि वे 20-20 हजार रुपये का स्वबंधपत्र एवं समान धनराशि के दो जमानतनामे सात दिन में दाखिल करें।