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Shahjahanpur News: माता महागौरी की पूजा-अर्चना की, हवन में डाली आहुति
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मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के आठवें दिन माता का शृंगार व पूजन करते पुरोहित और श्
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शाहजहांपुर। नवरात्र के आठवें दिन बृहस्पतिवार को महागौरी की पूजा और उपासना की गई। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने हवन और कन्या पूजन किया। शुक्रवार को रामनवमी मनाई जाएगी।
मातारानी का आशीर्वाद पाने के लिए सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर तक तमाम श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए। इसके बाद शाम पांच बजे से फिर श्रद्धालु मंदिर आने लगे। महिलाओं ने ढोलक की थाप पर भजन-कीर्तन किया। श्रद्धालुओं ने घर में दुर्गा स्तुति का पाठ किया। चौक स्थित दुर्गा माता मंदिर, टाउनहॉल स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर, ओसीएफ मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर समेत तमाम मंदिरों में भक्तों ने मातारानी का पूजन किया। कई श्रद्धालुओं ने हवन भी किया।
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माता शीतला देवी का चराई मेला 28 मार्च को, तैयारियां पूर्ण
कांट। नगर मे स्थित प्राचीन माता शीतला देवी मंदिर पर गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी नवरात्र के समापन पर प्रसिद्ध चराई मेले का आयोजन 28 मार्च को होगा। इसकी तैयारियां कमेटी ने पूरी कर लीं हैं।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महंत पं. योगेश शर्मा ने बताया कि मेले में दूरदराज से आए दुकानदार विभिन्न दुकानें लगाएंगे। मेले में दूर-दूर से माता के भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं। मेले में लोग पतंगबाजी करने भी आते हैं। सुबह से शाम तक आसमान में पतंगे दिखाई देती हैं। संवाद
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आज खुलेंगे देवी मंदिर के कपाट
कुर्रियाकलां। गांव के ऐतिहासिक देवी मंदिर के कपाट छह माह बाद शुक्रवार को भोर चार बजे खोल दिए जाएंगे। देवी मंदिर के पुजारी पं. गुुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि श्रद्धालु शुक्रवार को सुबह चार बजे से अगले तीन दिन तक दर्शन-पूजन कर सकेंगे। बाद में अगले छह माह के लिए देवी मंदिर के कपाट बंंद कर दिए जाएंगे। फिर शारदीय नवरात्र में मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। संवाद
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रामजन्म का प्रसंग सुनाया
खुटार। खुटार के देवस्थान मंदिर पर संत योगेश्वर महाराज के निर्देशन में चल रही रामकथा में रामजन्म का प्रसंग सुनाया गया। कथाव्यास अश्वनी त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम के अवतार के विभिन्न कारणों का विस्तार से वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथाव्यास ने प्रतापभानु की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे कालकेतु के छल के कारण प्रतापभानु ने रावण के रूप में जन्म लिया। इसी प्रकार, अरिमर्दन कुंभकरण और धर्मरुचि विभीषण के रूप में अवतरित हुए। जब रावण के अत्याचार बढ़ गए और पृथ्वी संकट में आ गई, तब पृथ्वी ने गोरूप धारण कर देवताओं से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान विष्णु ने अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेने का संकल्प लिया।
इसके अलावा भी रामजन्म के अनेक कारण रहे। नारद मुनि का भगवान विष्णु को श्राप, अहिल्या का उद्धार करना सहित कई कारणों से भगवान विष्णु ने श्रीराम के अवतार में लीला करते हुए श्राप और वरदान को पूरा किया। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। संवाद
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पंचगीत हैं भागवत के पंच प्राण : बबलू चैतन्य
कुर्रियाकलां। बिरुआमई गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथाव्यास बबलू चैतन्य ने प्रवचन से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा श्रवण में विनोद राठौर, गुड्डू कश्यप, चंद्रपाल गौतम, सुनील राठौर, छोटेलाल आदि मौजूद रहे। संवाद
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नवधा भक्ति का प्रसंग सुनाया
खुटार। नगर के माता पंथवारी मंदिर परिसर में चल रही रामकथा में कथाव्यास उपासना शास्त्री ने भगवान राम और शबरी के बीच हुए नवधा भक्ति के प्रसंग को सुनाया। श्रीराम ने बताया कि सत्संग, रामकथा-भजन से प्रेम, गुरुजनों की सेवा, कपट छोड़कर प्रभु का गुणगान, राममंत्र का जाप और ईश्वर में दृढ़ विश्वास, जगत भर को समभाव से राममय देखना और संतों को भगवान से भी अधिक करके मानना, जो कुछ मिल जाय उसमें संतोष करना और सरलता और सबके साथ कपटरहित बर्ताव करना, यह नवधा भक्ति है। इनमें से जिनके पास एक भी है, वह स्त्री-पुरुष, जड़-चेतन कोई भी हो, वह मुझे वह अत्यंत प्रिय है। भगवान श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर बहुत प्रेम से खाए और शबरी को अपने चरणों में स्थान दिया। संवाद
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सामूहिक सुंदरकांड का हुआ पाठ
कुर्रियाकलां। क्षेत्र के ग्राम कौढ़ा स्थित शनि मंदिर परिसर में बालाजी का दरबार सजाकर सामूहिक सुंदरकांड का पाठ किया गया। पाठ से पूर्व पंडित रतन मिश्रा ने यज्ञ वेदी बनाकर विश्व कल्याण की कामना के लिए हवन-पूजन किया। इसके बाद सभी ने मिलकर सुंदरकांड की संगीतमय चौपाइयां पढ़ी। अंत में आयोजक राकेश पाठक ने बालाजी की आरती उतारकर प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर अतिथि मनुज दीक्षित व अमित दीक्षित का पटका पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान अनमोल पाठक, निरंजन मिश्र, भगवान शरण दीक्षित, विमलेश त्रिवेदी, इंद्रजीत सिंह मौजूद रहे। संवाद
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रामनवमी पर निकली भव्य शोभायात्रा
तिलहर। नगर में रामनवमी के उपलक्ष्य में श्रद्धा और उल्लास के साथ चराई वाले मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। इसका विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। महिलाओं ने देवस्वरूपों की आरती उतारी। शोभायात्रा में श्री गणेश, माता लक्ष्मी, शेरों वाली माता, श्री शिव-पार्वती, माता सरस्वती, श्रीराम दरबार की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। यात्रा में शामिल शिव तांडव और श्रीराधा-कृष्ण के नृत्य ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। शोभायात्रा पक्का कटरा, दातागंज, निजामगंज, बिरियागंज, नई बस्ती, स्टेशन रोड, सिंह कॉलोनी, सराफा बाजार होते हुए मंदिर परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। इसके बाद शाम को आयोजित भंडारे में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष साहू रोहित गुप्ता, संजय गुप्ता, सुनील गुप्ता, अरुण गुप्ता, सिद्धार्थ गुप्ता आदि मौजूद रहे। संवाद
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मातारानी का आशीर्वाद पाने के लिए सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए। दोपहर तक तमाम श्रद्धालुओं ने देवी मां के दर्शन किए। इसके बाद शाम पांच बजे से फिर श्रद्धालु मंदिर आने लगे। महिलाओं ने ढोलक की थाप पर भजन-कीर्तन किया। श्रद्धालुओं ने घर में दुर्गा स्तुति का पाठ किया। चौक स्थित दुर्गा माता मंदिर, टाउनहॉल स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर, ओसीएफ मंदिर, कालीबाड़ी मंदिर समेत तमाम मंदिरों में भक्तों ने मातारानी का पूजन किया। कई श्रद्धालुओं ने हवन भी किया।
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माता शीतला देवी का चराई मेला 28 मार्च को, तैयारियां पूर्ण
कांट। नगर मे स्थित प्राचीन माता शीतला देवी मंदिर पर गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी नवरात्र के समापन पर प्रसिद्ध चराई मेले का आयोजन 28 मार्च को होगा। इसकी तैयारियां कमेटी ने पूरी कर लीं हैं।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष महंत पं. योगेश शर्मा ने बताया कि मेले में दूरदराज से आए दुकानदार विभिन्न दुकानें लगाएंगे। मेले में दूर-दूर से माता के भक्त अपनी मुरादें लेकर आते हैं। मेले में लोग पतंगबाजी करने भी आते हैं। सुबह से शाम तक आसमान में पतंगे दिखाई देती हैं। संवाद
आज खुलेंगे देवी मंदिर के कपाट
कुर्रियाकलां। गांव के ऐतिहासिक देवी मंदिर के कपाट छह माह बाद शुक्रवार को भोर चार बजे खोल दिए जाएंगे। देवी मंदिर के पुजारी पं. गुुरुदेव प्रसाद दीक्षित ने बताया कि श्रद्धालु शुक्रवार को सुबह चार बजे से अगले तीन दिन तक दर्शन-पूजन कर सकेंगे। बाद में अगले छह माह के लिए देवी मंदिर के कपाट बंंद कर दिए जाएंगे। फिर शारदीय नवरात्र में मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। संवाद
रामजन्म का प्रसंग सुनाया
खुटार। खुटार के देवस्थान मंदिर पर संत योगेश्वर महाराज के निर्देशन में चल रही रामकथा में रामजन्म का प्रसंग सुनाया गया। कथाव्यास अश्वनी त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम के अवतार के विभिन्न कारणों का विस्तार से वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथाव्यास ने प्रतापभानु की कथा का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे कालकेतु के छल के कारण प्रतापभानु ने रावण के रूप में जन्म लिया। इसी प्रकार, अरिमर्दन कुंभकरण और धर्मरुचि विभीषण के रूप में अवतरित हुए। जब रावण के अत्याचार बढ़ गए और पृथ्वी संकट में आ गई, तब पृथ्वी ने गोरूप धारण कर देवताओं से सहायता मांगी। इसके बाद भगवान विष्णु ने अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेने का संकल्प लिया।
इसके अलावा भी रामजन्म के अनेक कारण रहे। नारद मुनि का भगवान विष्णु को श्राप, अहिल्या का उद्धार करना सहित कई कारणों से भगवान विष्णु ने श्रीराम के अवतार में लीला करते हुए श्राप और वरदान को पूरा किया। कथा के बाद आरती कर प्रसाद का वितरण किया गया। संवाद
पंचगीत हैं भागवत के पंच प्राण : बबलू चैतन्य
कुर्रियाकलां। बिरुआमई गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथाव्यास बबलू चैतन्य ने प्रवचन से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय हैं। उनमें गाए जाने वाले पंचगीत भागवत के पंच प्राण हैं। जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है, वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा श्रवण में विनोद राठौर, गुड्डू कश्यप, चंद्रपाल गौतम, सुनील राठौर, छोटेलाल आदि मौजूद रहे। संवाद
नवधा भक्ति का प्रसंग सुनाया
खुटार। नगर के माता पंथवारी मंदिर परिसर में चल रही रामकथा में कथाव्यास उपासना शास्त्री ने भगवान राम और शबरी के बीच हुए नवधा भक्ति के प्रसंग को सुनाया। श्रीराम ने बताया कि सत्संग, रामकथा-भजन से प्रेम, गुरुजनों की सेवा, कपट छोड़कर प्रभु का गुणगान, राममंत्र का जाप और ईश्वर में दृढ़ विश्वास, जगत भर को समभाव से राममय देखना और संतों को भगवान से भी अधिक करके मानना, जो कुछ मिल जाय उसमें संतोष करना और सरलता और सबके साथ कपटरहित बर्ताव करना, यह नवधा भक्ति है। इनमें से जिनके पास एक भी है, वह स्त्री-पुरुष, जड़-चेतन कोई भी हो, वह मुझे वह अत्यंत प्रिय है। भगवान श्रीराम ने शबरी के जूठे बेर बहुत प्रेम से खाए और शबरी को अपने चरणों में स्थान दिया। संवाद
सामूहिक सुंदरकांड का हुआ पाठ
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रामनवमी पर निकली भव्य शोभायात्रा
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मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के आठवें दिन माता का शृंगार व पूजन करते पुरोहित और श्

मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के आठवें दिन माता का शृंगार व पूजन करते पुरोहित और श्

मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के आठवें दिन माता का शृंगार व पूजन करते पुरोहित और श्

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मंडी स्थित दुर्गा माता मंदिर में नवरात्र के आठवें दिन माता का शृंगार व पूजन करते पुरोहित और श्