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Shamli News: प्रकृति और गांव का इतिहास होगा सुरक्षित, जिले में शुरू हुआ जैव विविधता सर्वे

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:37 PM IST
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Biodiversity survey started in the district
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शामली। वन्य प्राणियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ गांवों के इतिहास को संजोने की दिशा में जिला प्रशासन ने अनूठी पहल की है। डीएम के निर्देश पर जनपद के सभी गांवों में जैव विविधता प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इसके तहत जिले के प्रत्येक गांव में वन्य प्राणियों से लेकर पेड़-पौधों, तालाबों और मानव आबादी तक का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है।
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वन विभाग, ग्राम पंचायतों और नमामि गंगे परियोजना की टीमों ने जिले में सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना के अंतर्गत जनपद के 230 गांवों में गांव-वार जैव विविधता रजिस्टर तैयार किया जाएगा, जिसमें प्राकृतिक और सामाजिक संसाधनों का पूरा विवरण दर्ज होगा।
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एप के जरिए मिलेगी गांव के इतिहास की जानकारी
सर्वे के बाद एकत्रित की गई जानकारी को एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन में दर्ज किया जाएगा। इससे किसी भी गांव के वन्य प्राणियों, पेड़-पौधों, तालाबों और गांव के इतिहास की जानकारी एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेगी। यह जानकारी ग्राम सचिवालय में रखे जाने वाले जैव विविधता रजिस्टर में भी सुरक्षित रहेगी।

230 गांवों में बनेगी जैव विविधता पंजिका
डीएम अरविंद कुमार चौहान ने बताया कि जैव विविधता प्रोजेक्ट के तहत जिले के सभी 230 गांवों में जैव विविधता पंजिका तैयार की जा रही है। इसके लिए ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, परियोजना निदेशक और वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से सर्वे कराया जा रहा है। अभी कैराना क्षेत्र में सर्वे चल रहा है। इसके बाद अन्य ब्लॉक में सर्वे होगा।

सर्वे के दौरान यह होगा
नमामी गंगे के जिला परियोजना अधिकारी डाॅ. सोनू के अनुसार सर्वे के दौरान प्रत्येक गांव में वन्य जीव-जंतु, पेड़-पौधे, तालाब और अन्य वेटलैंड क्षेत्र, गांव की मानव आबादी, गांव के सबसे अधिक उम्र के बुजुर्ग, ग्राम प्रधानों का विवरण जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। सर्वे पूरा होने के बाद ग्राम पंचायतों को एप्लीकेशन से जोड़ा जाएगा, जिससे लोग गांव के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल कर सकेंगे। बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद प्रत्येक गांव में तीन-तीन समितियों का गठन किया जाएगा। इन समितियों में गांव के गण्यमान्य लोगों को शामिल किया जाएगा। इन समितियों की जिम्मेदारी होगी कि वन्य प्राणियों, पेड़-पौधों और तालाबों की निगरानी करें, शिकारियों और वन माफियाओं पर नजर रखें, किसी भी तरह के नुकसान की सूचना तुरंत अधिकारियों को दें।

सितंबर तक पूरा होगा सर्वे, जैव विविधता बोर्ड को भेजी जाएगी रिपोर्ट
जिला परियोजना अधिकारी के अनुसार जिले में यह सर्वे सितंबर माह तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद सभी गांवों से प्राप्त रिपोर्ट को जैव विविधता बोर्ड को भेजा जाएगा। बोर्ड की संस्तुति के बाद ही यह जानकारी आम जनता के लिए सार्वजनिक की जाएगी।
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