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Shamli News: बीमा क्लेम नहीं मिलने पर बढ़ा उपभोक्ताओं का दर्द, आयोग पहुंच रहे पीड़ित

संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 01 Feb 2026 12:32 AM IST
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Consumers are suffering due to non-receipt of insurance claims, victims are approaching the commission.
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शामली। जिले में इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा बीमा क्लेम न दिए जाने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। बीते छह से सात महीनों में हालात यह हो गए हैं कि हर माह जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में बीमा कंपनियों के खिलाफ 5 से 6 परिवाद दर्ज किए जा रहे हैं। इसके साथ ही गलत बिजली बिल और दुकानदारों द्वारा खराब सामान देने से जुड़े मामलों की संख्या भी सामने आ रही है।
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आंकड़ों के अनुसार, हर माह औसतन 11 मामले जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में पहुंच रहे हैं, जिनमें से करीब तीन मामलों का निस्तारण कर उपभोक्ताओं को राहत दी जा रही है। आयोग की सक्रियता के चलते पीड़ित उपभोक्ताओं को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
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केस-1
जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग शामली ने 12 दिसंबर को कार का बीमा क्लेम खारिज किए जाने पर नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, करनाल को दोषी ठहराते हुए 2.75 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। गांव बलवा निवासी मुरसलीन ने एक अक्तूबर 2025 को आयोग में परिवाद दायर किया था। शिकायत में बताया गया कि सड़क हादसे में कार क्षतिग्रस्त होने के बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इनकार कर दिया।
केस-2
गांव ब्रह्मखेड़ा निवासी बरखा देवी ने पति बीरसेन की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम न मिलने पर भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा शामली, अभिकर्ता सत्तार और सर्किल हेड ऑफिस मेरठ के खिलाफ आयोग में परिवाद दायर किया था। आयोग ने बीमा कंपनी को दोषी मानते हुए 1.85 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

केस-3
शामली के काजीवाड़ा निवासी सादिक ने 12 जनवरी को प्राइवेट बीमा कंपनी द्वारा भैंस की मौत के बाद क्लेम न दिए जाने पर जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया है। आयोग ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी है।

ये कर सकते हैं उपभोक्ता फोरम में शिकायत
ऐसा कोई भी लेनदेन या सेवा, जिसमें धन का आदान-प्रदान हुआ हो और उपभोक्ता को नुकसान पहुंचा हो, उपभोक्ता फोरम के दायरे में आता है। इसमें बिजली, टेलीफोन, डाक, बीमा, मेडिकल सेवाएं और बाजार से जुड़ी सभी सेवाएं शामिल हैं।

सुनवाई का अधिकार
जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग में एक रुपये से लेकर 50 लाख रुपये तक के मामलों की सुनवाई की जाती है।

फोरम के दंडाधिकार
दोषी पाए जाने पर आयोग आरोपी को अधिकतम तीन साल की जेल, आर्थिक दंड तथा आवश्यकता पड़ने पर वारंट जारी कर सकता है। एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। भ्रामक विज्ञापन के मामलों में एक से लेकर पांच साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना भी संभव है।


जिले में बीमा क्लेम न मिलने के मामलों में पिछले छह से सात महीनों में बढ़ोतरी हुई है। पहले गलत बिजली बिल और दुकानदारों द्वारा खराब सामान देने के मामले अधिक आते थे। हमारा प्रयास रहता है कि मामलों का शीघ्र निस्तारण कर वादकारियों को समय पर न्याय दिलाया जाए।
— हेमंत कुमार गुप्ता, अध्यक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, शामली
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