Shamli: जेल में बंद बाउ गिल चला रहा था ‘गंजा गैंग’, इंस्टाग्राम से होती थी हथियारों की सप्लाई, दो गिरफ्तार
शामली की झिंझाना पुलिस ने अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार जेल में बंद बाउ गिल सामाजिक माध्यमों के जरिए गिरोह चला रहा था। बड़ी संख्या में हथियार बरामद हुए हैं।
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शामली के झिंझाना में पुलिस ने अंतरराज्यीय अवैध हथियार तस्करी गिरोह ‘राजेश गंजा गैंग’ का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार गिरोह का संचालन पंजाब की होशियारपुर जेल में बंद बाउ गिल कर रहा था। वह जेल के भीतर से ही सामाजिक माध्यमों और इंटरनेट के जरिए गिरोह के सदस्यों से संपर्क कर हथियारों की सप्लाई करा रहा था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन पिस्टल, एक रिवॉल्वर, छह तमंचे, 12 कारतूस, 15 हजार रुपये और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं। तस्करी में इस्तेमाल स्विफ्ट डिजायर कार भी कब्जे में ली गई है।
करनाल जाने वाले मार्ग पर पकड़े गए दो आरोपी
पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि करनाल जाने वाले राजमार्ग पर चेकिंग के दौरान लुधियाना निवासी विनय कुमार और राजेश को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में दोनों के राजेश गंजा गिरोह से जुड़े होने की जानकारी सामने आई। पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य काम अवैध हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी करना है।
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मेरठ से हथियार लेकर पंजाब जा रहे थे
पुलिस के मुताबिक, बाउ गिल एनडीपीएस मामले में होशियारपुर जेल में बंद है। इसके बावजूद वह मोबाइल, इंस्टाग्राम और इंटरनेट कॉल के माध्यम से गिरोह के सदस्यों के संपर्क में था। उसके निर्देश पर विनय और राजेश मेरठ पहुंचे थे। वहां से अवैध हथियार लेकर दोनों स्विफ्ट डिजायर कार से पंजाब जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया।
पिस्टल 80 हजार, तमंचा 10 हजार में बेचने का दावा
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक पिस्टल करीब 80 हजार रुपये और तमंचा करीब 10 हजार रुपये में बेचते थे। दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। एसपी ने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
जेल से कैसे चला रहा था बाउ गिल गिरोह
पुलिस के अनुसार बाउ गिल हथियार और मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले गिरोह का सरगना है और फिलहाल होशियारपुर जेल में बंद है। इसके बावजूद वह मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और अन्य सामाजिक माध्यम खातों के जरिए गिरोह के सदस्यों के संपर्क में बना हुआ था। पुलिस का कहना है कि उसके संपर्क में 20 से अधिक सदस्य हैं और वह जेल से ही हथियारों की सप्लाई के निर्देश दे रहा था।
एक साल से कर रहे थे हथियारों की सप्लाई
पुलिस पूछताछ में विनय और राजेश ने बताया कि वे करीब एक साल से हथियारों की सप्लाई कर रहे थे। दोनों ने बताया कि वे कम समय में अधिक पैसा कमाकर संपन्न होना चाहते थे। दोनों बारहवीं तक पढ़े हैं और इसके बाद हथियारों की तस्करी में शामिल हो गए। पुलिस इस पूरे गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच में मेरठ के एक व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई है, जो पुलिस के निशाने पर है।