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Shamli News: मोबाइल फोन की ऐसी लगी लत, छूटा खाना-पीना और बिगड़ी हालत
Wed, 19 Aug 2026 12:19 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 19 Aug 2026 12:19 AM IST
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शामली। मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेम की बढ़ती लत अब बच्चों के व्यवहार और दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। हालात इतने गंभीर हो रहे हैं कि कई बच्चे मोबाइल फोन नहीं मिलने पर खाना-पीना तक छोड़ दे रहे हैं। दूध और दवाई लेने के लिए भी उन्हें मोबाइल या गेम का लालच देना पड़ रहा है। मोबाइल छीनने पर बच्चे गुस्सा और चिड़चिड़े हो रहे हैं तथा परिजनों से झगड़ा करने लगते हैं। कुछ मामलों में आत्महत्या की धमकी देने और प्रयास करने की बात भी सामने आई है। जिला अस्पताल के मन कक्ष में मोबाइल की लत से परेशान बच्चों के मामले लगातार पहुंच रहे हैं।
केस-1 काजीवाड़ा निवासी कक्षा सात के छात्र को 10 अगस्त को परिजन जिला अस्पताल के मन कक्ष लेकर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि बच्चा हर समय मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। मोबाइल छीनने पर आत्महत्या की धमकी देता है। मोबाइल नहीं मिलने पर खाना, दूध और दवाई तक लेने से इनकार कर देता है। मन कक्ष में बच्चे की काउंसिलिंग की जा रही है।
केस-2 : कैराना निवासी कक्षा आठ के छात्र को 12 अगस्त को परिजन मन कक्ष लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक मोबाइल नहीं देने पर खाना और दूध तक नहीं खाता था तथा परिवार के लोगों से झगड़ा करता था। परिजनों ने यह भी बताया कि बच्चा एक बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका है। विशेषज्ञ उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
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केस-3 : शहर के रेलपार निवासी 13 वर्षीय बच्चे को लेकर परिजन मन कक्ष पहुंचे। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन नहीं देने पर बच्चा खाना तक छोड़ देता है। मोबाइल की आदत के कारण बच्चे के व्यवहार में आए बदलाव से परिवार परेशान है।
डांटने के बजाय प्यार से समझाएं
एसीएमओ एवं मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल का कहना है कि बच्चे के मोबाइल इस्तेमाल पर अभिभावकों को नजर रखनी चाहिए। स्क्रीन टाइम को अचानक बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम किया जाए। बच्चों को डांटने या मोबाइल छीनकर जबरदस्ती करने के बजाय प्यार से समझाना अधिक प्रभावी है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे में लगातार गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव, खानपान में कमी या मोबाइल नहीं मिलने पर असामान्य व्यवहार दिखाई दे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेकर बच्चे की काउंसिलिंग करानी चाहिए।
बच्चों को मोबाइल के विकल्प देना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए केवल फोन छीन लेना पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को उनके साथ समय बिताना चाहिए और खेलकूद, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों तथा परिवार के साथ बातचीत के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। मोबाइल का इस्तेमाल कम करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे अपनाने से बच्चे पर इसका नकारात्मक असर भी कम किया जा सकता है।
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केस-1 काजीवाड़ा निवासी कक्षा सात के छात्र को 10 अगस्त को परिजन जिला अस्पताल के मन कक्ष लेकर पहुंचे। परिजनों ने बताया कि बच्चा हर समय मोबाइल पर गेम खेलता रहता है। मोबाइल छीनने पर आत्महत्या की धमकी देता है। मोबाइल नहीं मिलने पर खाना, दूध और दवाई तक लेने से इनकार कर देता है। मन कक्ष में बच्चे की काउंसिलिंग की जा रही है।
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केस-2 : कैराना निवासी कक्षा आठ के छात्र को 12 अगस्त को परिजन मन कक्ष लेकर पहुंचे। परिजनों के मुताबिक मोबाइल नहीं देने पर खाना और दूध तक नहीं खाता था तथा परिवार के लोगों से झगड़ा करता था। परिजनों ने यह भी बताया कि बच्चा एक बार आत्महत्या का प्रयास कर चुका है। विशेषज्ञ उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
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केस-3 : शहर के रेलपार निवासी 13 वर्षीय बच्चे को लेकर परिजन मन कक्ष पहुंचे। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन नहीं देने पर बच्चा खाना तक छोड़ देता है। मोबाइल की आदत के कारण बच्चे के व्यवहार में आए बदलाव से परिवार परेशान है।
डांटने के बजाय प्यार से समझाएं
एसीएमओ एवं मन कक्ष प्रभारी डॉ. अतुल बंसल का कहना है कि बच्चे के मोबाइल इस्तेमाल पर अभिभावकों को नजर रखनी चाहिए। स्क्रीन टाइम को अचानक बंद करने के बजाय धीरे-धीरे कम किया जाए। बच्चों को डांटने या मोबाइल छीनकर जबरदस्ती करने के बजाय प्यार से समझाना अधिक प्रभावी है। उन्होंने बताया कि यदि बच्चे में लगातार गुस्सा, चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव, खानपान में कमी या मोबाइल नहीं मिलने पर असामान्य व्यवहार दिखाई दे तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेकर बच्चे की काउंसिलिंग करानी चाहिए।
बच्चों को मोबाइल के विकल्प देना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए केवल फोन छीन लेना पर्याप्त नहीं है। अभिभावकों को उनके साथ समय बिताना चाहिए और खेलकूद, पढ़ाई, रचनात्मक गतिविधियों तथा परिवार के साथ बातचीत के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। मोबाइल का इस्तेमाल कम करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे अपनाने से बच्चे पर इसका नकारात्मक असर भी कम किया जा सकता है।