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Shamli News: चार साल तक आबादी के बीच चलता रहा तेल तस्करी का खेल
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 02 Jun 2026 01:00 AM IST
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शामली। कैराना क्षेत्र में आबादी के बीच संचालित पेट्रोल पंप पर चार साल तक तेल तस्करी का खेल चलता रहा और अब इसका खुलासा होने के बाद पूरे आपूर्ति विभाग की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने लंबे समय तक चल रही इस गतिविधि पर जिला आपूर्ति अधिकारी से लेकर पूर्ति निरीक्षकों तक की नजर क्यों नहीं पड़ी।
लोगों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता। नियमों के अनुसार पेट्रोल पंपों की नियमित जांच और निगरानी की जिम्मेदारी विभाग की होती है, लेकिन चार साल तक अवैध गतिविधि का जारी रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।
पुलिस की जांच में गिरोह के कई सदस्यों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बागपत के बिनौली निवासी राहुल, मुजफ्फरनगर के शाहपुर निवासी राजन, हरियाणा के सोनीपत जिले के जगदीशपुर निवासी अशोक तथा पेट्रोल पंप मैनेजर कैराना निवासी मुजम्मिल के बयान के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
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एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच और कांधला पुलिस को सौंपी गई है। विभागीय भूमिका की भी जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
अब सवालों के घेरे में जांच व्यवस्था
यह मामला केवल एक अवैध कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या निगरानी तंत्र समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था या नहीं। यदि विभागीय जांच नियमित रूप से होती तो यह नेटवर्क पहले ही उजागर हो सकता था।
आपूर्ति विभाग का दावा
जिला आपूर्ति अधिकारी अंकुर यादव ने बताया कि क्षेत्र के अन्य पेट्रोल पंपों पर भी छापा मारा गया है। अवैध रूप से पेट्रोल-डीजल बिक्री करने वालों पर कार्रवाई जारी है और अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
प्रशासन की सख्ती का दावा
जिलाधिकारी आलोक कुमार यादव ने कहा कि अवैध या मिलावटी ईंधन की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
आरोपियों की तलाश में बागपत और सोनीपत में दबिश
शामली। तेल तस्करी गिरोह के वांछित आरोपियों की तलाश में पुलिस ने बागपत और सोनीपत में दबिश दी, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल सकी। एसपी ने बताया कि गिरोह के वांछित सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। बागपत और सोनीपत में की गई कार्रवाई के बावजूद आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लग सके।
सवालों के घेरे में आपूर्ति विभाग
आखिर चार साल तक पेट्रोल पंप की गतिविधियों पर विभाग की नजर क्यों नहीं गई?
क्या नियमित निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित था?
क्या विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की मिलीभगत या अनदेखी हुई?
अगर समय रहते जांच होती तो इतना बड़ा नेटवर्क सामने आने से पहले ही रोका जा सकता था
लोगों और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता। नियमों के अनुसार पेट्रोल पंपों की नियमित जांच और निगरानी की जिम्मेदारी विभाग की होती है, लेकिन चार साल तक अवैध गतिविधि का जारी रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।
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पुलिस की जांच में गिरोह के कई सदस्यों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बागपत के बिनौली निवासी राहुल, मुजफ्फरनगर के शाहपुर निवासी राजन, हरियाणा के सोनीपत जिले के जगदीशपुर निवासी अशोक तथा पेट्रोल पंप मैनेजर कैराना निवासी मुजम्मिल के बयान के आधार पर पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं।
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एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मामले की जांच क्राइम ब्रांच और कांधला पुलिस को सौंपी गई है। विभागीय भूमिका की भी जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
अब सवालों के घेरे में जांच व्यवस्था
यह मामला केवल एक अवैध कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या निगरानी तंत्र समय रहते अपनी जिम्मेदारी निभा रहा था या नहीं। यदि विभागीय जांच नियमित रूप से होती तो यह नेटवर्क पहले ही उजागर हो सकता था।
आपूर्ति विभाग का दावा
जिला आपूर्ति अधिकारी अंकुर यादव ने बताया कि क्षेत्र के अन्य पेट्रोल पंपों पर भी छापा मारा गया है। अवैध रूप से पेट्रोल-डीजल बिक्री करने वालों पर कार्रवाई जारी है और अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
प्रशासन की सख्ती का दावा
जिलाधिकारी आलोक कुमार यादव ने कहा कि अवैध या मिलावटी ईंधन की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
आरोपियों की तलाश में बागपत और सोनीपत में दबिश
शामली। तेल तस्करी गिरोह के वांछित आरोपियों की तलाश में पुलिस ने बागपत और सोनीपत में दबिश दी, लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल सकी। एसपी ने बताया कि गिरोह के वांछित सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। बागपत और सोनीपत में की गई कार्रवाई के बावजूद आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लग सके।
सवालों के घेरे में आपूर्ति विभाग
आखिर चार साल तक पेट्रोल पंप की गतिविधियों पर विभाग की नजर क्यों नहीं गई?
क्या नियमित निरीक्षण सिर्फ कागजों तक सीमित था?
क्या विभागीय स्तर पर किसी प्रकार की मिलीभगत या अनदेखी हुई?
अगर समय रहते जांच होती तो इतना बड़ा नेटवर्क सामने आने से पहले ही रोका जा सकता था