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Shravasti News: ईओ पर आरोपों की होगी जांच
Mon, 03 Aug 2026 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 03 Aug 2026 11:56 PM IST
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श्रावस्ती। नगर पालिका परिषद भिनगा की ईओ अनीता शुक्ला की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नाला निर्माण जांच के बाद अब उन पर निविदा में मनमानी और चहेतों को कार्य देने का आरोप है। प्रभारी मंत्री दारा सिंह चौहान ने जिलाधिकारी अन्नपूर्णा गर्ग को तकनीकी अधिकारी से जांच कराने का निर्देश दिया है। यह शिकायत जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्रा ने की थी। उन्होंने बहराइच के ठेकेदार राना प्रताप सिंह के आरोपों को संज्ञान में लिया था। राना प्रताप सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर बताया कि ईओ ने उनकी निविदा मनमाने ढंग से निरस्त कर दी। यह बिड 16 जुलाई को रात 11:30 बजे खोली गई थी। निविदा निरस्त करने का कारण छह माह का ईपीएफ व ईएसआईसी चालान न होना बताया गया। साथ ही एफडीआर में 100 रुपये की कमी और बैलेंस शीट पर नंबर न लिखा होना भी बताया गया।
ठेकेदार के दावे
ठेकेदार राना प्रताप सिंह ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने बताया कि उनकी बैलेंस शीट में यूडीआईएन नंबर स्पष्ट लिखा था। एफडीआर में 100 रुपये की कमी पर उन्होंने आरटीजीएस से भुगतान किया था। ईपीएफ रजिस्ट्रेशन निविदा की अंतिम तारीख 15 जून से चार दिन पहले खत्म हुआ था। ऐसे में छह महीने के भुगतान का साक्ष्य जमा करने का सवाल नहीं था। ईएसआईसी में भी यही स्थिति थी। राना प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी निविदा 17.87 रुपये कम थी। इसके बावजूद मंडल के बाहर की फर्मों को कार्य दे दिया गया। इससे लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। उन्होंने संतोष पाल कांट्रेक्टर पर फर्जी ईएसआईसी चालान लगाने का आरोप लगाया। राज कंस्ट्रक्शन ने पांच महीने का ईएसआईसी चालान जमा किया, जबकि छह माह का मांगा गया था। जीएस कोटिंग्स के ईएसआईसी व ईपीएफ चालान प्रपत्र अपठनीय थे, फिर भी उन्हें सही मान लिया गया।
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ठेकेदार के दावे
ठेकेदार राना प्रताप सिंह ने आरोपों का खंडन किया। उन्होंने बताया कि उनकी बैलेंस शीट में यूडीआईएन नंबर स्पष्ट लिखा था। एफडीआर में 100 रुपये की कमी पर उन्होंने आरटीजीएस से भुगतान किया था। ईपीएफ रजिस्ट्रेशन निविदा की अंतिम तारीख 15 जून से चार दिन पहले खत्म हुआ था। ऐसे में छह महीने के भुगतान का साक्ष्य जमा करने का सवाल नहीं था। ईएसआईसी में भी यही स्थिति थी। राना प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी निविदा 17.87 रुपये कम थी। इसके बावजूद मंडल के बाहर की फर्मों को कार्य दे दिया गया। इससे लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान होगा। उन्होंने संतोष पाल कांट्रेक्टर पर फर्जी ईएसआईसी चालान लगाने का आरोप लगाया। राज कंस्ट्रक्शन ने पांच महीने का ईएसआईसी चालान जमा किया, जबकि छह माह का मांगा गया था। जीएस कोटिंग्स के ईएसआईसी व ईपीएफ चालान प्रपत्र अपठनीय थे, फिर भी उन्हें सही मान लिया गया।
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