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Shravasti News: कटान रोधी कार्य के शुरू होने का कर रहे इंतजार
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:45 AM IST
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नौपतियापुरवा गांव के निकट बीते वर्ष कटान कर पहुंची राप्ती नदी। (फाइल फोटो)
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श्रावस्ती/इकौना। हर वर्ष राप्ती नदी की बाढ़ से भारी तबाही होती है। इसके साथ ही कटान से किसी को मकान खोने का दर्द तो किसी को खेत गंवाने की पीड़ा भी झेलनी पड़ती है। प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों से किए गए वादे सिर्फ फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं।
नेपाल में पहाड़ों पर होने वाली बारिश राप्ती नदी में तबाही के रूप में महज छह घंटों में ही पहुंच जाती है। इसके बाद जमुनहा क्षेत्र के गांवों में तबाही मचाते हुए पानी इकौना क्षेत्र में महज आठ घंटों के भीतर ही तटवर्ती गांवों में कहर बरपाने लगता है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण बारिश का मौसम शुरू होते ही डर के साये में जीने लगते हैं।
इकौना क्षेत्र के ग्राम मनिकौरा कोड़री के मजरा मनिकौरा के लगभग 20 तथा नौपतिया पुरवा के दो घर बीते वर्ष आई बाढ़ व कटान से नदी की धारा में समा गए थे। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव को कटान से बचाने के लिए पार्क्यूपाइन लगाने का वादा किया था, लेकिन करीब 10 माह बीतने के बाद भी गांव को बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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अब तक नहीं शुरू हुआ कटान रोधी काम
मनिकौरा कोड़री के पूर्व प्रधान जवाहर यादव ने बताया कि गांव के करीब 20 घर राप्ती नदी के कटान की जद में हैं। फिर भी प्रशासन की ओर से अब तक गांव को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। मनिकौरा गांव के कटान पीड़ितों में कोई सड़क की पटरी पर तो कोई दूसरे गांव में रहने के लिए विवश है।
......
नहीं मिली कोई सहायता
मनिकौरा निवासी रामसागर यादव ने बताया कि उनका घर बीते वर्ष राप्ती नदी के कटान की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में उन्होंने दूसरे स्थान पर घर बना लिया है, लेकिन कोई भी सहायता अब तक नहीं मिली। इस बार बाढ़ आई तो कटान से नौपतिया पुरवा पूरी तरह से नदी में समा जाएगा। गांव के कई लोगों के खेत भी कट चुके हैं।
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बाढ़ व कटान से ग्रामीणों को बचाने के लिए अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर बाढ़ से पहले ही व्यवस्था कर ली जाएगी। लेखपालों को भेज कर ग्रामीणों को हुई क्षति का आकलन कराया जा रहा है। शीघ्र ही लोगों को उचित सहायता प्रदान की जाएगी।
-पियूष जायसवाल, एसडीएम, इकौना
नेपाल में पहाड़ों पर होने वाली बारिश राप्ती नदी में तबाही के रूप में महज छह घंटों में ही पहुंच जाती है। इसके बाद जमुनहा क्षेत्र के गांवों में तबाही मचाते हुए पानी इकौना क्षेत्र में महज आठ घंटों के भीतर ही तटवर्ती गांवों में कहर बरपाने लगता है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण बारिश का मौसम शुरू होते ही डर के साये में जीने लगते हैं।
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इकौना क्षेत्र के ग्राम मनिकौरा कोड़री के मजरा मनिकौरा के लगभग 20 तथा नौपतिया पुरवा के दो घर बीते वर्ष आई बाढ़ व कटान से नदी की धारा में समा गए थे। मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव को कटान से बचाने के लिए पार्क्यूपाइन लगाने का वादा किया था, लेकिन करीब 10 माह बीतने के बाद भी गांव को बचाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
अब तक नहीं शुरू हुआ कटान रोधी काम
मनिकौरा कोड़री के पूर्व प्रधान जवाहर यादव ने बताया कि गांव के करीब 20 घर राप्ती नदी के कटान की जद में हैं। फिर भी प्रशासन की ओर से अब तक गांव को बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया जा रहा है। मनिकौरा गांव के कटान पीड़ितों में कोई सड़क की पटरी पर तो कोई दूसरे गांव में रहने के लिए विवश है।
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नहीं मिली कोई सहायता
मनिकौरा निवासी रामसागर यादव ने बताया कि उनका घर बीते वर्ष राप्ती नदी के कटान की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में उन्होंने दूसरे स्थान पर घर बना लिया है, लेकिन कोई भी सहायता अब तक नहीं मिली। इस बार बाढ़ आई तो कटान से नौपतिया पुरवा पूरी तरह से नदी में समा जाएगा। गांव के कई लोगों के खेत भी कट चुके हैं।
बाढ़ व कटान से ग्रामीणों को बचाने के लिए अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर बाढ़ से पहले ही व्यवस्था कर ली जाएगी। लेखपालों को भेज कर ग्रामीणों को हुई क्षति का आकलन कराया जा रहा है। शीघ्र ही लोगों को उचित सहायता प्रदान की जाएगी।
-पियूष जायसवाल, एसडीएम, इकौना