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Shravasti News: तपिश की भेंट चढ़ रही किसानी, न बरस रहे बादल न नहरों में पानी

संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती Updated Thu, 18 Jun 2026 12:29 AM IST
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Farming is falling victim to the scorching heat; neither are the clouds raining, nor is there water in the canals.
वीरपुर क्षेत्र में लगी धान की नर्सरी के खेत में पड़ी दरारें।
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श्रावस्ती/वीरपुर। सूरज की गर्म किरणों से तराई तप रही है। बादल यदि छाते भी हैं तो बिना बरसे ही चले जाते हैं। वहीं, अब तक नहरों का संचालन न होने से वह भी सूखी पड़ी हैं। ऐसे में किसानों को नर्सरी तैयार करने के लिए पंपिंग सेट का सहारा लेना पड़ रहा है। किसानों के सामने डीजल की समस्या भी खड़ी हो रही है। कहीं पर समय से डीजल नहीं मिल रहा है तो कहीं पर प्लास्टिक डिब्बों के बजाय लोहे के जेरीकेन में तेल देने का नियम लागू है। इससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

यह बोले किसान
ग्राम श्याम देवरिया निवासी किसान ननके प्रजापति ने बताया कि धान की नर्सरी तो किसी तरह से लगा दी है, लेकिन सिंचाई करने में पसीने छूट रहे हैं। खेत में एक दिन भी पानी नहीं टिकता है, खेत में दरारें पड़ गई हैं। कटरा निवासी किसान राधेश्याम ने बताया कि नहर यदि शुरू हो जाए तो सिंचाई की समस्या दूर हो जाए। गन्ने की सिंचाई करने में उन्हें काफी परेशानी हो रही है। बेलहा राघव निवासी किसान उदय चंद मिश्रा ने कहा कि इस बार गर्मी अधिक होने के कारण मक्का व अरहर की बुआई भी खेत पलेवा करने के बाद ही हो सकेगी। दसियापुर निवासी किसान राकेश शुक्ला ने कहा कि डीजल वितरण के लिए बनाए गए नियम किसानों के लिए समस्या का सबब बन गए हैं। कभी खतौनी दिखाने की बात की जाती है तो कभी लोहे के जेरीकेन लाने की।
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शाम के समय करें नर्सरी की सिंचाई
कृषि उप निदेशक राम आसरे ने कहा कि जब तक मानसून नहीं आ जाता तब तक किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई वैज्ञानिक पद्धति से करनी चाहिए। शाम के समय नर्सरी की सिंचाई करने से खेत पूरी रात ठंडा रहेगा, जिससे नर्सरी खराब नहीं होगी। इसके लिए फौव्वारा पद्धति भी काफी कारगर होती है। खेत में अधिक पानी भरने के बजाय कम पानी भरें, जिससे तेल की खपत भी कम होगी।
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