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Shravasti News: सुरक्षा के बिना सफर, बढ़ता दुर्घटना का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 16 Feb 2026 01:46 AM IST
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श्रावस्ती। रोडवेज बसों की कमी से जूझ रहे जिलेवासियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। वहीं, विभाग सवारियों के कम मिलने का रोना रो रहा है। ऐसे में मांगलिक आयोजन हो या फिर जिले में ही कहीं जाना हो तो लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
जिले में अब तक रोडवेज बस डिपो की नहीं बना है। ऐसे में जिले की यातायात व्यवस्था मात्र तीन रोडवेज के बस अड्डों पर ही निर्भर है। हालांकि इनमें से मात्र भिनगा स्थित बस अड्डे से 11 बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं, गिलौला व इकौना बस अड्डे निष्प्रयोज्य बने हुए हैं। इन बस अड्डों पर न तो बसें जाती हैं और न ही सवारियां ही पहुंचती है।
ऐसे में बलरामपुर से बहराइच तक आने जाने वाली कुछ बसें ही सड़क किनारे खड़ी होकर सवारियों को बैठाती हैं। लोगों को 30 से 40 किलोमीटर तक का सफर ई रिक्शा, टेंपो व निजी बसों के सहारे करना पड़ता है। वहीं, बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर जाना हो या फिर जिले के ही विभूतिनाथ, बौद्ध तपोस्थली भ्रमण, जमुनहा के जगपति नाथ मंदिर का दर्शन करना हो तो लोगों को ट्रैक्टर-ट्रॉली व पिकअप जैसे भार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
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चालकों की तैनाती के लिए रोजगार मेले का आयोजन किया गया था। चालकों के चयनित होने पर कुछ बसों को बढ़ाया जाएगा। अक्सर सवारियां ई रिक्शा व टेंपो से चली जाती है तो बसों के संचालन में समस्या होती है। हालांकि शीघ्र ही समस्या दूर होने की उम्मीद है।
- ज्ञान चंद, एआरएम
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जिले में अब तक रोडवेज बस डिपो की नहीं बना है। ऐसे में जिले की यातायात व्यवस्था मात्र तीन रोडवेज के बस अड्डों पर ही निर्भर है। हालांकि इनमें से मात्र भिनगा स्थित बस अड्डे से 11 बसों का संचालन किया जा रहा है। वहीं, गिलौला व इकौना बस अड्डे निष्प्रयोज्य बने हुए हैं। इन बस अड्डों पर न तो बसें जाती हैं और न ही सवारियां ही पहुंचती है।
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ऐसे में बलरामपुर से बहराइच तक आने जाने वाली कुछ बसें ही सड़क किनारे खड़ी होकर सवारियों को बैठाती हैं। लोगों को 30 से 40 किलोमीटर तक का सफर ई रिक्शा, टेंपो व निजी बसों के सहारे करना पड़ता है। वहीं, बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर जाना हो या फिर जिले के ही विभूतिनाथ, बौद्ध तपोस्थली भ्रमण, जमुनहा के जगपति नाथ मंदिर का दर्शन करना हो तो लोगों को ट्रैक्टर-ट्रॉली व पिकअप जैसे भार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
चालकों की तैनाती के लिए रोजगार मेले का आयोजन किया गया था। चालकों के चयनित होने पर कुछ बसों को बढ़ाया जाएगा। अक्सर सवारियां ई रिक्शा व टेंपो से चली जाती है तो बसों के संचालन में समस्या होती है। हालांकि शीघ्र ही समस्या दूर होने की उम्मीद है।
- ज्ञान चंद, एआरएम