सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Adulteration attacks faith... even fruit diets are tampered with, fasting and health are also compromised.

Siddharthnagar News: आस्था पर मिलावट का प्रहार... फलाहार में भी खेल, व्रत के साथ सेहत से भी खिलवाड़

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 23 Mar 2026 01:16 AM IST
विज्ञापन
Adulteration attacks faith... even fruit diets are tampered with, fasting and health are also compromised.
शहर के दुकान रखा हुआ फलाहार के सामान। संवाद
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। अगर आप सोच रहे हैं कि व्रत हैं और सबकुछ सही खा रहे हैं तो यह आपकी भूल है। क्योंकि, मुनाफाखोर न सिर्फ मिलावट कर आस्था पर प्रहार बल्कि सेहत से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। मुंगफली, तिल के तेल के साथ ही आटा, तिन्नी के चावल सहित अन्य सामग्री में मिलावट की जा रही है। खाद्य विभाग ने मिलावट की आशंका में कार्रवाई करते हुए में विभिन्न दुकानों से कुट्टू के आटा सहित व्रत में इस्तेमाल की जाने वाली कई खाद्य सामग्रियों के नमूने लिए हैं, जिनकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। वहींं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय मिलावटी खाद्य पदार्थ के खाने से कैंसर व लिवर जैसे गंभीर रोग भी हो रहे हैं। ऐसे में वह सलाह दे रहे हैं कि बिना जाने किसी खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। लापरवाही सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है।
Trending Videos

त्योहार और लग्न शुरु होने से पहले ही मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। मांग के अनुसार वह मिलावटी सामान को खपा देते हैं और किसी को भनक तक नहीं लगती है। कई पुरानी पैकिंग को नए पैक में बदल दिया जाता है। वहीं, कुछ को खुला बेचते हैं, जिसमें ग्राहक को पता ही नहीं चलता है। नवरात्रि के पर्व के बीच सिंघाड़े और कुट्टू के आटा में बड़ी मिलावट की गई है। रविवार को बाजार में दुकानों पर देखा गया तो कई प्रकार की ऐसी व्रत की खाद्य सामग्री उतारी गई है, जिसके बारे में पता तक नहीं है। देखते ही देखते इसे बेच दिया जा रहा है। बाजार के बारे में जानकारी ली गई तो पता चला कि नवरात्र में सबसे ज्यादा बिक्री सिंघाड़े और कुट्टू के आटे की हो रही है। इसके साथ ही साबूदाना, मूंगफली, देशी घी जैसे सामग्री की भी मांग बढ़ी है, लेकिन सिंघाड़ा और कुट्टू के आटे में खतरनाक खेल हो रहा है। मुनाफे के लिए आटे में अरारोट और चावल को पीस कर मिलाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शुद्ध सिंघाड़ा और कुट्टू का आटा 14- 160 रुपये किलो बिक रहा है। इसकी आड़ में मिलावटखोर अरारोट और पिसा चावल मिलाकर ग्राहकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। देसी घी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर हो रहा है। कई छोटी-छोटी कंपनियों की पन्नी और डिब्बे में 100 से 200 ग्राम की पैकिंग में देसी घी बाजार में उपलब्ध है। इन गुमनाम कंपनियों की पैकिंग में देसी घी वाली खुशबू भी नहीं रहती। जबरदस्त गर्मी के बावजूद यह देसी घी जमे रहते हैं जबकि शुद्ध देसी घी गर्मी में खुद पिघल जाता है। नगर में दुकान करने वाले एक दुकानदार ने बताया कि ग्राहक को कम दाम का पसंद है, इसलिए लोग उसी को बेचते हैं। घी कई प्रकार का आया है, जिसमें 200 रुपये तक अंतर है। ऐसे में शुद्धता की क्या गारंटी होगी।
वहीं, तिल और मुंगफली की तेल में कई ब्रांड हैं। जो जितना कम दाम का है, उतना गुणवत्ता में कमी है। अब त्योहार है, इसमें कौन देखता है। लोग बेधड़क खरीदते हैं। इसी में सबकुछ बिक जाता है। वहीं, एक अन्य दुकानदार ने बताया कि सिंघाड़े का आटा और कुट्टू का आटा गोरखपुर से आता है। वहीं, से कई दर पर मिलता है। सबसे कम दाम वाला उठाते हैं। उसमें क्या गड़बड़ी है हमें क्या पता। हम तो उसी सामान की बिक्री करते हैं, जिसमें अच्छा मुनाफा मिले। नवरात्रि की कारोबार की बात करें तो जिला मुख्यालय के अलावा शोहरतगढ़, बांसी, डुमरियागंज और इटवा और ग्रामीण इलाकों में इस व्रत वाले पर्व में 20 करोड़ रुपये से अधिक की खाद्य सामग्री और तेल घी की बिक्री हो जाती है। क्योंकि, शायद ही कोई घर होगा, जहां कोई परिवार व्रत न हो।
---
गूंथकर करें पहचान

जानकारों के अनुसार जिस कुट्टू के आटे को हम खा रहे हैं वो मिलावटी है या शुद्ध, इसकी जांच करने के लिए इसे थोड़ा सा गूंथकर भी पता लगाया जा सकता है। दरअसल कुट्टू का आटा आसानी से गूंथा जा सकता है। अगर इसे गूंथने पर ये बिखर जाता है तो समझ जाएं कि इसमें किसी न किसी चीज की मिलावट की गई है। इसी तरह से कुट्टू के आटे की शुद्धता की जांच करने का एक तरीका यह भी है कि आप इसे पानी में डालकर जांच करें। इसके लिए एक कांच के गिलास में पानी लेकर उसमें कुट्टू का आटा डाल दें। अगर आटा पानी में तैरता रहे तो समझ जाएं कि इसमें मिलावट हुई है, जबकि अगर आटा पूरी तरह शुद्ध है तो वो अपने आप ही सतह पर बैठ जाएगा।
---

कैसे करें पहचान

-पैकेट बंद सिंघाड़ा या कुटटू का आटा खरीदते समय पैकेट के सील की ठीक ढंग से परखें

-सिंघाड़ा और कुट्टू का शुद्ध आटा पीलापन लिए होता है

-मिलावट वाला सिंघाड़ा और कुट्टू का आटा सफेद होता है

-खराब और मिलावटी आटा गूंथते समय लसलसा हो जाता है, उसमें से अजीब गंध आती है
---

बोले विशेषज्ञ

कई प्रकार से बनाया गया मिलावटी देसी घी लोगों के स्वास्थ्य पर खराब असर डालता है। मिलावटी देसी घी की खास पहचान यह है कि लगभग दो सप्ताह बाद इसकी खुशबू कम होने के साथ-साथ स्वाद भी बदल जाता है। नकली देसी घी लोगों के पेट और फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर भी नकारात्मक असर डालता है। इसका सेवन करने से दमा, खांसी जैसी कई बीमारियां हो सकती है।

-डॉ. सीबी चौधरी, चेस्ट रोग विशेषज्ञ

---

मिलावट की हुई कोई भी खाद्य पदार्थ सेहत के लिए फायदेमंद नहीं है। इससे लोगों को अल्सर, पाइल्स, कैंसर और लिवर संबंधित बीमारी हो सकती है जबकि मौसम में बदलाव होने से फूड प्वाइजनिंग की भी समस्या रहती है। इससे बचने के लिए नवरात्र व्रत के समय हल्का पेय पदार्थ ले, जिससे व्रत खंडित होने से बच जाएगा, जबकि सेहत के लिए भी लाभदायक होगा।

-डॉ. गौरव दुबे, विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग
---
बोले जिम्मेदार
खाद्य पदार्थों का निरीक्षण किया जा रहा है। सामानों का सैंपल भी लिया जा रहा है। अधोमानक मिलने पर संबंधित दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई भी कि जा रही है। अन्य मामलों में जो रिपोर्ट आ रही है, उसमें जुर्माना की कार्रवाई की जा रही है। यदि कोई भी व्यक्ति मिलावट करते हुए पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

- आरएल यादय, उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed