सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Blood donation is facing a crisis of lobbying, blood banks are drying up.

Siddharthnagar News: दान के खून पर ‘पैरवी’ का संकट, सूख रहा ब्लड बैंक

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Tue, 07 Apr 2026 11:56 PM IST
विज्ञापन
Blood donation is facing a crisis of lobbying, blood banks are drying up.
मेडिकल कॉलेज के परिसर में ​स्थित ब्लड़ बैंक। संवाद
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। रक्तदान के प्रति बढ़ती बेरुखी और मुफ्त के लिए बढ़ते दबाव से ब्लड बैंक सूखने की कगार पर है। अगर ब्लड बैंक को शिविर की संजीवनी नहीं मिली तो आपात स्थिति आने पर बड़ा संकट खड़ हो जाएगा। क्योंकि, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित 300 यूनिट की क्षमता वाला ब्लड बैंक में रक्त का भंडार खतरनाक स्तर तक गिरकर महज आठ यूनिट पर सिमट गया है।
Trending Videos

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा दुर्घटना, प्रसव या गंभीर बीमारी के मरीजों की जान पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। मामला यह है कि, स्वास्थ्य विभाग के प्रयास से समाज के लोग जीवन बचाने के लिए रक्तदान कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर उसी दान के खून पर ‘पैरवी’ हाबी नजर आ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसा जानकारी जब ली गई तो दबी जुबान से लोगों ने बताया। आकड़ों की बात करें तो 112 यूनिट फ्री सेवा में चला गया, जबकि शिविर सिर्फ एक लगा और 16 यूनिट ही ब्लड मिला। इसके अलावा थैलीसीमिया, जेसएवाई के जरूरतमंदों को दिया गया, जो नियम में हैं कि उन्हें फ्री में देना है। वहीं, मरीजों की बात करें तो ब्लड न होने के कारण लौट रहे हैं। मंगलवार को केवल आठ यूनिट था, उनमें भी केवल ‘ओ’ पॉजिटिव था।
जिले में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की अधीन एक सरकारी ब्लड बैंक है। सुविधाओं से लैस इस ब्लड बैंक में कंपोनेंट यूनिट भी चल रही है, जहां प्लाजमा आदि निकाला जाता है। ब्लड बैंक की क्षमता की बात करें तो इनमें 300 यूनिट तक रखा जा सकता है। ब्लड बैंक के स्रोत की बात करें तो कुछ लोगों की ओर से किसी आयोजन पर या विश्वविद्यालय और एसएसबी की ओर से शिविर का आयोजन होने पर मिलता है, जबकि, 30 लाख की आबादी के इलाज और रक्त की कमी को पूरा करने की जिम्मेदारी बैंक की है।
इसमें थैलीसीमिया और जेएसवाई, गर्भवती महिलाओं जिन्हें रक्त की कमी है और आगे पीछे कोई नहीं है उन्हें बिना डोनर के दिया जाना है। इसके अलावा आपात स्थिति आने पर जैसा कोई बड़ा हादसा आदि होता है तो उसमें जरूरतंमदों को तत्काल उपलब्ध कराया जाए। मौजूदा समय में ब्लड बैंक की बात करें तो बेहद चिंताजनक है। अक्तूबर माह में जहां 94 यूनिट ब्लड था। वहीं, अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में सूखने के कगार पर पहुंच गया है।
सात अप्रैल के आकड़ों के मुताबिक, केवल आठ यूनिट रक्त बचा हुआ है। इनमें भी केवल ‘ओ’ पॉजिटिव ब्लड बचा हुआ है। अब स्वास्थ्य विभाग के समक्ष संकट है कि वह पूर्ति कहां से करें। क्योंकि, प्रेरित करने के बाद कुछ स्थानों पर ही कैंप लग पाता है। थैलीसीमिया और जेएसवाई, गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान दिए जाने तक तो सही है कि उनकी जान बचाई जाए, लेकिन जो आकड़े दान के हैं वह बेहद चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों की बात करें, तीन माह में के बीच में केवल एक कैंप सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में लगा है। इनमें 16 यूनिट ब्लड मिला, जबकि, दान की बात करें तो तीन माह के भीतर 112 यूनिट ब्लड मुफ्त सेवा में चला गया। लगा तो वह किसी मरीजों को ही, लेकिन उसमें डोनर जरूर मिल सकते थे। लेकिन, पैरवी ऐसी-ऐसी आती है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के समक्ष भी सकंट खड़ा हो जाता है। विवश होकर वह दे तो देते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर मायूसी होती है कि असली जरुरतमंद का क्या होगा।
पैरवी करने वाले इतने समक्ष रहते हैं कि चार से छह डोनर दे सकते हैं, लेकिन यहां मुफ्त की आदत से बन गई है। जो जिम्मेदारों और दान की व्यवस्था दोनों को मायूस करने का काम कर रहे हैं। अगर जल्द ही कोई कैंप नहीं लगा तो विभाग के समक्ष बड़ी समस्या उत्पन्न होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed