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Siddharthnagar News: नेपाल में सरकार बदली तो बॉर्डर पर बढ़ी सख्तीं

संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 10 Apr 2026 12:45 AM IST
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The weather is compounding the misery... The body has been wracked by fever for 10 days.
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वीरेंद्र पांडेय
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सिद्धार्थनगर/खुनवां। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद सीमा सुरक्षा और कस्टम (भंसार) के नियमों के सख्त अनुपालन का असर भारत-नेपाल सीमा पर साफ नजर आने लगा है। बढ़ी निगरानी और नई प्रक्रियाओं के चलते जहां आवागमन जटिल हुआ है, वहीं सीमावर्ती बाजारों की रौनक फीकी पड़ गई है।
नेपाल में पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और कस्टम विभाग की टीमें संयुक्त रूप से निगरानी कर रहीं हैं। विदेशी नंबर प्लेट वाहनों के लिए कस्टम परमिट और दैनिक शुल्क अनिवार्य किए जाने से सीमा पार आवाजाही पर सीधा असर पड़ा है। भारतीय वाहनों के लिए निर्धारित शुल्क और सीमित अवधि तक संचालन की अनुमति के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना और वाहन जब्ती का प्रावधान लागू है, जिससे लोगों को अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया और खर्च का सामना करना पड़ रहा है।
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इस सख्ती का असर सीमावर्ती क्षेत्रों के उन नेपाली नागरिकों पर भी पड़ा है, जो रोजमर्रा की खरीदारी के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहते हैं। अब दैनिक उपयोग के सामानों पर भी भंसार प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे सीमा पार आवागमन में कमी आई है। सीमा पर सघन चेकिंग के कारण वाहनों की आवाजाही भी धीमी हो गई है। खुनुवां और बढ़नी बॉर्डर पर ट्रकों और छोटे वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे देर और लागत दोनों बढ़ रहे हैं।
इसका सीधा असर खुनुवां, बढ़नी, अलीगढ़वा और ककरहवा जैसे सीमावर्ती बाजारों पर पड़ा है। नेपाली ग्राहकों की संख्या घटने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। शादी-विवाह के सीजन में भी फ्रिज, कूलर, पंखा, बेड जैसे घरेलू सामानों की बिक्री पर असर देखा जा रहा है।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार अब रोजमर्रा की खरीदारी पर भी कस्टम प्रक्रिया लागू होने से ग्राहक बाजार आने से बच रहे हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन, खुनुवां बाजार के महामंत्री सचमुच त्रिपाठी ने बताया कि सख्ती के कारण बाजार की रफ्तार धीमी हो गई है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले सीमावर्ती क्षेत्रों में कुछ दूरी तक आवाजाही सहज थी, लेकिन अब हर स्तर पर निगरानी बढ़ने से सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
संगठन के अध्यक्ष रविंद्र कुमार गुप्ता के अनुसार, सख्ती के कारण बाजार की रफ्तार थम गई है और व्यापार प्रभावित हो रहा है। वहीं पूर्व प्रधान विशुन देव चौरसिया, प्रधान प्रतिनिधि ग्राम पंचायत बगहवा गंगाधर मिश्रा, नदीम शेख आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले 2-3 किलोमीटर तक आवाजाही में छूट रहती थी, लेकिन अब हर स्तर पर निगरानी बढ़ गई है।
इससे सामाजिक और पारिवारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल सरकार के ये कदम सुरक्षा और राजस्व नियंत्रण के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
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