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Siddharthnagar News: नेपाल के लुंबिनी में धम्म यात्रा, जुटेंगे 500 नवदीक्षित साधु
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 25 Mar 2026 11:51 PM IST
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खुनुवां। लुंबिनी केंद्रित 500 कुलपुत्र प्रव्रज्या कार्यक्रम के तहत बुटवल, देवदह, लुंबिनी और भैरहवा में 27 व 28 मार्च को भव्य धम्म यात्रा का आयोजन किया जाएगा। इस यात्रा में 500 नवदीक्षित साधु (सामनेर) हिस्सा लेंगे। आयोजन को लेकर मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन ऑल नेपाल मॉन्क्स फेडरेशन और धम्मकाया फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें थाई धर्मदूत इंडिया-नेपाल, बुद्धिस्ट सोसाइटी नेपाल सहित करीब 20 संगठनों की सहभागिता रहेगी। बुद्धिस्ट सोसाइटी नेपाल के अध्यक्ष शंकर गाहा ने बताया कि धम्म यात्रा का उद्देश्य बौद्ध धर्म के संदेशों का प्रसार और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 27 मार्च को सुबह सात बजे देवदह बुद्ध विहार और बुटवल उप महानगरपालिका कार्यालय परिसर से यात्रा शुरू होगी। देवदह से निकलने वाली यात्रा ईस्ट-वेस्ट हाईवे से होते हुए सेमहाना पहुंचेगी, जबकि बुटवल की यात्रा अमरपथ, बीपी चौक होते हुए थकाली सेवा समाज भवन तक जाएगी।
इसी दिन दोपहर तीन बजे लुम्बिनी में भी धम्म यात्रा निकाली जाएगी, जो गेट नंबर-4 से शुरू होकर भगवान बुद्ध के जन्मस्थल, शांतिदीप और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट असेंबली एंड मेडिटेशन सेंटर तक जाएगी। 28 मार्च को दोपहर दो बजे भैंरहवा के सिद्धार्थ स्टेडियम से धम्म यात्रा प्रारंभ होगी, जो देवकोटा चौक और बुद्ध चौक होते हुए लुंबिनी गेट पर समाप्त होगी। मुख्य कार्यक्रम शाम चार बजे लुंबिनी गेट पर आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह धम्म यात्रा भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के बाद 20 हजार भिक्षुओं के साथ राजगृह से कपिलवस्तु तक की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में आयोजित की जाती है। इसे विश्व की पहली ‘मानसिक शांति यात्रा’ भी माना जाता है।
गौरतलब है कि लुंबिनी में आयोजित अल्पकालीन कुलपुत्र प्रव्रज्या कार्यक्रम में 500 युवाओं को दीक्षा दी गई थी, जो अब सामनेर (अल्पकालीन भिक्षु) के रूप में इस यात्रा में शामिल होंगे। उन्हें पीले वस्त्र धारण कर बौद्ध धर्म के 10 नियमों का पालन करना होगा। भंते थावर के अनुसार इस तरह की यात्रा से साधकों में करुणा, मैत्री और अनुशासन की भावना विकसित होती है। करीब 20 दिनों तक पूरी तरह से अनुशासित जीवनशैली अपनानी होती है।
पूरा साधु बनने के लिए 227 नियमों का पालन करना होता है। धम्म यात्रा का अर्थ धम्म यानी कुशल कर्म और यात्रा यानी मार्ग पर चलना है। आयोजकों का मानना है कि इस आयोजन से न केवल बौद्ध धर्म के संरक्षण और प्रचार को बल मिलेगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और समाज में सहिष्णुता, समानता व शांति का संदेश प्रसारित होगा।
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कार्यक्रम का आयोजन ऑल नेपाल मॉन्क्स फेडरेशन और धम्मकाया फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है, जिसमें थाई धर्मदूत इंडिया-नेपाल, बुद्धिस्ट सोसाइटी नेपाल सहित करीब 20 संगठनों की सहभागिता रहेगी। बुद्धिस्ट सोसाइटी नेपाल के अध्यक्ष शंकर गाहा ने बताया कि धम्म यात्रा का उद्देश्य बौद्ध धर्म के संदेशों का प्रसार और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 27 मार्च को सुबह सात बजे देवदह बुद्ध विहार और बुटवल उप महानगरपालिका कार्यालय परिसर से यात्रा शुरू होगी। देवदह से निकलने वाली यात्रा ईस्ट-वेस्ट हाईवे से होते हुए सेमहाना पहुंचेगी, जबकि बुटवल की यात्रा अमरपथ, बीपी चौक होते हुए थकाली सेवा समाज भवन तक जाएगी।
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इसी दिन दोपहर तीन बजे लुम्बिनी में भी धम्म यात्रा निकाली जाएगी, जो गेट नंबर-4 से शुरू होकर भगवान बुद्ध के जन्मस्थल, शांतिदीप और इंटरनेशनल बुद्धिस्ट असेंबली एंड मेडिटेशन सेंटर तक जाएगी। 28 मार्च को दोपहर दो बजे भैंरहवा के सिद्धार्थ स्टेडियम से धम्म यात्रा प्रारंभ होगी, जो देवकोटा चौक और बुद्ध चौक होते हुए लुंबिनी गेट पर समाप्त होगी। मुख्य कार्यक्रम शाम चार बजे लुंबिनी गेट पर आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह धम्म यात्रा भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति के बाद 20 हजार भिक्षुओं के साथ राजगृह से कपिलवस्तु तक की ऐतिहासिक यात्रा की स्मृति में आयोजित की जाती है। इसे विश्व की पहली ‘मानसिक शांति यात्रा’ भी माना जाता है।
गौरतलब है कि लुंबिनी में आयोजित अल्पकालीन कुलपुत्र प्रव्रज्या कार्यक्रम में 500 युवाओं को दीक्षा दी गई थी, जो अब सामनेर (अल्पकालीन भिक्षु) के रूप में इस यात्रा में शामिल होंगे। उन्हें पीले वस्त्र धारण कर बौद्ध धर्म के 10 नियमों का पालन करना होगा। भंते थावर के अनुसार इस तरह की यात्रा से साधकों में करुणा, मैत्री और अनुशासन की भावना विकसित होती है। करीब 20 दिनों तक पूरी तरह से अनुशासित जीवनशैली अपनानी होती है।
पूरा साधु बनने के लिए 227 नियमों का पालन करना होता है। धम्म यात्रा का अर्थ धम्म यानी कुशल कर्म और यात्रा यानी मार्ग पर चलना है। आयोजकों का मानना है कि इस आयोजन से न केवल बौद्ध धर्म के संरक्षण और प्रचार को बल मिलेगा बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और समाज में सहिष्णुता, समानता व शांति का संदेश प्रसारित होगा।