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Siddharthnagar News: लाइफ स्टाइल बना रहा बीमार...कम उम्र में युवा पाइल्स की समस्या का शिकार
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 01 Apr 2026 01:06 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अगर लंबे समय तक कुर्सी पर बैठ रहे हैं, कब्ज के शिकार हैं या फिर अधिक तला-भुना आहार भोजन में शामिल कर रहे हैं तो सतर्क हो जाएं। चंद पल का स्वाद और कई घंटे कुर्सी पर जमे रहने से लोग कम उम्र में ही पाइल्स जैसी बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं। डॉक्टर की ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की हिस्ट्री में यह बातें सामने आई है। कितने लोग ऐसे हैं, जो बीमारी की गिरफ्त में आ जाते हैं और उन्हें पता तक नहीं चलता है। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नौगढ़ में ओपीडी में ऐसे मामले में बढ़े हैं। हर माह 55 से 60 लोग ऐसे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें 50 प्रतिशत केस ऐसे निकल रहे हैं, जिनका सर्जरी ही विकल्प है। वहीं, प्रथम और दूसरे स्टेज के मरीजों को दवा और परहेज की सलाह दी जा रही है।
भागदौड़ वाली जिंदगी और अनियमित खानपान और काम करने का कोई समय निश्चित न होना, लोगों को समय से पहले कई गंभीर बीमारी का शिकार बना रहा है। ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। 20-40 साल की उम्र वाले भी हाई बीपी और शुगर से पीड़ित पाए जा रहे हैं। यह तो आम बीमारी हो चुकी है। इसी के बीच पाइल्स भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका शिकार वृद्ध या फिर मीडियम उम्र वाले ही नहीं बल्कि कम उम्र के कामकाजी युवा हैं। इस बात को अस्पताल की ओपीडी के आंकड़े पुख्ता कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित मरीज पहुंचते ही हैं। इससे कहीं ज्यादा आयुर्वेदिक अस्पताल पर पहुंचे रहे हैं। आयुर्वेद की दवा इसमें कारगर मानी जाती है। ऐसा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है।
राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पुराने नौगढ़ की ओपीडी के डॉक्टरों के मुताबिक प्रतिमाह 55 से 60 मरीज पाइल्स की शिकायत वाले आते हैं। जबकि, बीते कुछ साल पहले यह आंकड़ा माह में 15 से 25 ही था। अब सीधे दोगुना हो गया है। इसमें 50 प्रतिशत ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जो सर्जरी के स्टेज पर पहुंच गए। इसमें से कुछ तो बीमारी से अनजान थे, वहीं कइयों ने संकोचवश किसी को बताया ही नहीं है। सबसे चौंकाने वाले बात यह है कि जो कम उम्र जैसा, दुकान, ऑफिस या लांग टाइम गाड़ी चलाते हैं, वे लोग हैं। दूसरे स्थान पर लंबे समय से कब्ज, बदहजमी और खाने की हिस्ट्री में पता चला कि मसाला और मिर्च का अधिक सेवन करने वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं।
इसमें प्रथम और दूसरे स्टेज वालों को दवाएं और मसाला आदि से परहेज की सलाह दी जाती है। साथ ही जो तीसरे और चौथे स्टेज वाले हैं, उन्हें सर्जरी की सलाह दी है। आयुर्वेद में दवा और छार सूत्र विधि की सर्जरी दोनों बहुत ही कारगर है। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिलती है। सर्जरी के बाद बीमारी से मुक्ति मिल जाती है। वहीं, दवा की बात करें तो वह भी कारगर है, बशर्ते समय से दवा और परहेज जरूरी है।
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चिकित्सा (ट्रीटमेंट)
औषधि (प्राइमरी और सेकंडरी अर्थ में)
चूर्ण त्रिफला चूर्ण, वाष्टक चूर्ण, लवण भाष्कर पूर्ण, अविपत्तिकर पूर्ण पुष्यानुग पूर्ण, वही अर्थ कुंअर रस, स्वास्थ्य बनिवधि, कनकपानी सत्ताईस गुग्गुन। संत स्तम्भ वटी, आसन, अरिष्ट अभिपरिष्टा। रोहितकारिष्ट आदि दवाएं मरीजों को दी जाती हैं, जो नियमित उपयोग करने में लाभ देती हैं।
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विशेषज्ञ के अनुसार
पुराना कब्ज, असंतुलित आहार और कम फाइबर वाले भोजन के साथ अधिक तला भुना, मिर्च-मसाला, मैदे के सामान आदि से परेशानी बढ़ सकती है। लोगों को इसकी रोकथाम के लिए फाइबर युक्त भोजन (सलाह, फल, हरी सब्जी) का सेवन, अधिक पानी का सेवन करना चाहिए। वहीं, शारीरिक गतिविधि को बढ़ाने के साथ अधिक समय टॉयलेट में न बैठना आदि शामिल है। यह जीवन शैली अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
- डॉ. राजेश कुमार अग्रहरि, शल्य चिकित्सक, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पुराना नौगढ़
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भागदौड़ वाली जिंदगी और अनियमित खानपान और काम करने का कोई समय निश्चित न होना, लोगों को समय से पहले कई गंभीर बीमारी का शिकार बना रहा है। ब्लड प्रेशर, शुगर और हार्ट अटैक के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। 20-40 साल की उम्र वाले भी हाई बीपी और शुगर से पीड़ित पाए जा रहे हैं। यह तो आम बीमारी हो चुकी है। इसी के बीच पाइल्स भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका शिकार वृद्ध या फिर मीडियम उम्र वाले ही नहीं बल्कि कम उम्र के कामकाजी युवा हैं। इस बात को अस्पताल की ओपीडी के आंकड़े पुख्ता कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में इस बीमारी से पीड़ित मरीज पहुंचते ही हैं। इससे कहीं ज्यादा आयुर्वेदिक अस्पताल पर पहुंचे रहे हैं। आयुर्वेद की दवा इसमें कारगर मानी जाती है। ऐसा स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है।
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राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पुराने नौगढ़ की ओपीडी के डॉक्टरों के मुताबिक प्रतिमाह 55 से 60 मरीज पाइल्स की शिकायत वाले आते हैं। जबकि, बीते कुछ साल पहले यह आंकड़ा माह में 15 से 25 ही था। अब सीधे दोगुना हो गया है। इसमें 50 प्रतिशत ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जो सर्जरी के स्टेज पर पहुंच गए। इसमें से कुछ तो बीमारी से अनजान थे, वहीं कइयों ने संकोचवश किसी को बताया ही नहीं है। सबसे चौंकाने वाले बात यह है कि जो कम उम्र जैसा, दुकान, ऑफिस या लांग टाइम गाड़ी चलाते हैं, वे लोग हैं। दूसरे स्थान पर लंबे समय से कब्ज, बदहजमी और खाने की हिस्ट्री में पता चला कि मसाला और मिर्च का अधिक सेवन करने वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं।
इसमें प्रथम और दूसरे स्टेज वालों को दवाएं और मसाला आदि से परहेज की सलाह दी जाती है। साथ ही जो तीसरे और चौथे स्टेज वाले हैं, उन्हें सर्जरी की सलाह दी है। आयुर्वेद में दवा और छार सूत्र विधि की सर्जरी दोनों बहुत ही कारगर है। इससे मरीजों को बड़ी राहत मिलती है। सर्जरी के बाद बीमारी से मुक्ति मिल जाती है। वहीं, दवा की बात करें तो वह भी कारगर है, बशर्ते समय से दवा और परहेज जरूरी है।
चिकित्सा (ट्रीटमेंट)
औषधि (प्राइमरी और सेकंडरी अर्थ में)
चूर्ण त्रिफला चूर्ण, वाष्टक चूर्ण, लवण भाष्कर पूर्ण, अविपत्तिकर पूर्ण पुष्यानुग पूर्ण, वही अर्थ कुंअर रस, स्वास्थ्य बनिवधि, कनकपानी सत्ताईस गुग्गुन। संत स्तम्भ वटी, आसन, अरिष्ट अभिपरिष्टा। रोहितकारिष्ट आदि दवाएं मरीजों को दी जाती हैं, जो नियमित उपयोग करने में लाभ देती हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार
पुराना कब्ज, असंतुलित आहार और कम फाइबर वाले भोजन के साथ अधिक तला भुना, मिर्च-मसाला, मैदे के सामान आदि से परेशानी बढ़ सकती है। लोगों को इसकी रोकथाम के लिए फाइबर युक्त भोजन (सलाह, फल, हरी सब्जी) का सेवन, अधिक पानी का सेवन करना चाहिए। वहीं, शारीरिक गतिविधि को बढ़ाने के साथ अधिक समय टॉयलेट में न बैठना आदि शामिल है। यह जीवन शैली अपनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
- डॉ. राजेश कुमार अग्रहरि, शल्य चिकित्सक, राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल पुराना नौगढ़