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Siddharthnagar News: पल्टननाथ शिव मंदिर में उमड़ती है आस्था
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धेंसा। नौगढ़ ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत महादेवा नानकार स्थित प्रसिद्ध स्वयंभू बाबा पल्टननाथ शिव मंदिर में सावन माह में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। पूरे सावन भर यहां प्रतिदिन रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। विशेष रूप से सावन के प्रत्येक सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
मान्यता है कि बाबा पल्टननाथ के दरबार में सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में सुबह से शिवभक्तों का तांता लग जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
महादेवा नानकार निवासी एवं क्षेत्रीय विद्वान चंद्रप्रकाश शास्त्री ने बताया कि बाबा पल्टननाथ शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार वनवास के दौरान पांडव यहां पहुंचे थे और भगवान शिव की आराधना की थी। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर धेंसा-नानकार चौराहे से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर सावन के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाता है। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।
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मान्यता है कि बाबा पल्टननाथ के दरबार में सच्चे मन से की गई पूजा-अर्चना से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर परिसर में सुबह से शिवभक्तों का तांता लग जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
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महादेवा नानकार निवासी एवं क्षेत्रीय विद्वान चंद्रप्रकाश शास्त्री ने बताया कि बाबा पल्टननाथ शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। जनश्रुति के अनुसार वनवास के दौरान पांडव यहां पहुंचे थे और भगवान शिव की आराधना की थी। तभी से यह स्थल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उन्होंने बताया कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन है और यहां श्रद्धापूर्वक पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर धेंसा-नानकार चौराहे से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर सावन के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाता है। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं।