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आज से जेब का बदलेगा गणित : कुछ महंगा, कुछ सस्ता...हर खर्च की निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:35 PM IST
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सिद्धार्थनगर। नए वित्तीय वर्ष के पहले दिन से ही आम आदमी की जेब का पूरा हिसाब बदल गया है। अब सिर्फ कमाई नहीं, खर्च भी जांच के दायरे में रहेगा। सैलरी से लेकर बाजार में खरीदारी और मोबाइल पेमेंट तक हर स्तर पर नया सिस्टम लागू हो गया है।
इसका असर सिद्धार्थनगर जैसे कस्बाई जिले में सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखेगा। हालांकि लोगों में अभी इसे लेकर समझ की कमी देखी जा रही है। शहर के कई लोगों ने जो होगा देखा जाएगा, की तर्ज पर जवाब दिए।
चार्टर अकाउंटेंट अजीत चौधरी बताते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव नौकरीपेशा वर्ग के लिए लागू हुआ है। नया टैक्स रिजिम डिफॉल्ट होते ही सैलरी का गणित बदल गया है। अगर किसी ने अलग से पुराना सिस्टम नहीं चुना तो टैक्स कटौती नए नियमों के तहत होगी।
उदाहरण के लिए 7-8 लाख सालाना आय वाले कई कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, लेकिन जिन्होंने एलआईसी, पीपीएफ जैसे निवेश किए हैं। उन्हें नुकसान भी हो सकता है। अगर वे विकल्प नहीं चुनते। बाजार में आज से कैश में सस्ता का चलन कमजोर पड़ने लगेगा। अब बड़े लेन-देन बिना बिल के करना मुश्किल होगा। जानकार बताते हैं कि अगर कोई ग्राहक एक लाख का सामान खरीदता है तो उसका पूरा रिकॉर्ड बनेगा। दुकानदार भी अब बिना बिल के बिक्री से बचेंगे।
उद्योगपति अनूप छापड़िया बताते हैं कि व्यापारी वर्ग के लिए यह बदलाव सबसे बड़ा झटका और मौका दोनों है। अब बिना बिल के कारोबार करना मुश्किल होगा। हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा, जिससे टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी।
बांसी, शोहरतगढ़ और इटवा जैसे बाजारों में इसका असर जल्द दिख सकता है। निवेश के मोर्चे पर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। ट्रेडिंग महंगी होने से सट्टा गतिविधियों पर ब्रेक लगेगा। वहीं पेंशन और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
साइबर एक्सपर्ट दिलीप द्विवेदी बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट का तरीका भी बदल गया है। अब हर बड़े ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच होगी।
यूपीआई या कार्ड से पेमेंट करते समय दो बार वेरिफिकेशन करना पड़ सकता है। इससे पेमेंट थोड़ा धीमा होगा, लेकिन धोखाधड़ी कम होगी। वित्तीय मामलों के जानकार बताते हैं कि निवेश करने वालों के लिए भी आज से नया माहौल है। ट्रेडिंग महंगी होने से छोटे निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। जानकारों के अनुसार, पहले रोजाना ट्रेड करके कमाई करना आसान था, अब बढ़े चार्ज से मुनाफा घटेगा।
बिना बिल काम करना मुश्किल : सीए अजीत चौधरी के मुताबिक व्यापारी के लिए अब बिना बिल के काम करना मुश्किल होगा। हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना पड़ेगा, वरना परेशानी हो सकती है। ग्राहकों को अब बड़े सामान खरीदते समय सोच-समझकर खर्च करना पड़ेगा। सब कुछ रिकॉर्ड में रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए नया टैक्स सिस्टम समझना जरूरी है, नहीं तो सैलरी पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय कर सलाहकार का कहना है, सरकार अब आय के साथ खर्च पर भी नजर रख रही है। जो लोग प्लानिंग के साथ चलेंगे, उन्हें फायदा होगा, लेकिन बिना हिसाब खर्च करने वालों को ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।
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इसका असर सिद्धार्थनगर जैसे कस्बाई जिले में सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखेगा। हालांकि लोगों में अभी इसे लेकर समझ की कमी देखी जा रही है। शहर के कई लोगों ने जो होगा देखा जाएगा, की तर्ज पर जवाब दिए।
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चार्टर अकाउंटेंट अजीत चौधरी बताते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव नौकरीपेशा वर्ग के लिए लागू हुआ है। नया टैक्स रिजिम डिफॉल्ट होते ही सैलरी का गणित बदल गया है। अगर किसी ने अलग से पुराना सिस्टम नहीं चुना तो टैक्स कटौती नए नियमों के तहत होगी।
उदाहरण के लिए 7-8 लाख सालाना आय वाले कई कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, लेकिन जिन्होंने एलआईसी, पीपीएफ जैसे निवेश किए हैं। उन्हें नुकसान भी हो सकता है। अगर वे विकल्प नहीं चुनते। बाजार में आज से कैश में सस्ता का चलन कमजोर पड़ने लगेगा। अब बड़े लेन-देन बिना बिल के करना मुश्किल होगा। जानकार बताते हैं कि अगर कोई ग्राहक एक लाख का सामान खरीदता है तो उसका पूरा रिकॉर्ड बनेगा। दुकानदार भी अब बिना बिल के बिक्री से बचेंगे।
उद्योगपति अनूप छापड़िया बताते हैं कि व्यापारी वर्ग के लिए यह बदलाव सबसे बड़ा झटका और मौका दोनों है। अब बिना बिल के कारोबार करना मुश्किल होगा। हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना जरूरी होगा, जिससे टैक्स चोरी पर लगाम लगेगी।
बांसी, शोहरतगढ़ और इटवा जैसे बाजारों में इसका असर जल्द दिख सकता है। निवेश के मोर्चे पर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। ट्रेडिंग महंगी होने से सट्टा गतिविधियों पर ब्रेक लगेगा। वहीं पेंशन और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
साइबर एक्सपर्ट दिलीप द्विवेदी बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट का तरीका भी बदल गया है। अब हर बड़े ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच होगी।
यूपीआई या कार्ड से पेमेंट करते समय दो बार वेरिफिकेशन करना पड़ सकता है। इससे पेमेंट थोड़ा धीमा होगा, लेकिन धोखाधड़ी कम होगी। वित्तीय मामलों के जानकार बताते हैं कि निवेश करने वालों के लिए भी आज से नया माहौल है। ट्रेडिंग महंगी होने से छोटे निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। जानकारों के अनुसार, पहले रोजाना ट्रेड करके कमाई करना आसान था, अब बढ़े चार्ज से मुनाफा घटेगा।
बिना बिल काम करना मुश्किल : सीए अजीत चौधरी के मुताबिक व्यापारी के लिए अब बिना बिल के काम करना मुश्किल होगा। हर लेन-देन का रिकॉर्ड रखना पड़ेगा, वरना परेशानी हो सकती है। ग्राहकों को अब बड़े सामान खरीदते समय सोच-समझकर खर्च करना पड़ेगा। सब कुछ रिकॉर्ड में रहेगा। नौकरीपेशा लोगों के लिए नया टैक्स सिस्टम समझना जरूरी है, नहीं तो सैलरी पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय कर सलाहकार का कहना है, सरकार अब आय के साथ खर्च पर भी नजर रख रही है। जो लोग प्लानिंग के साथ चलेंगे, उन्हें फायदा होगा, लेकिन बिना हिसाब खर्च करने वालों को ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।