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Siddharthnagar News: स्कूलों के 91 वाहन कार्रवाई की जद में, कागजात में मिली गड़बड़ी
Sun, 16 Aug 2026 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 16 Aug 2026 11:40 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चलाए जाने के बावजूद जिले में स्कूल वाहनों की फिटनेस को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। मिशन सेफ फ्यूचर के तहत कागजों की जांच में गड़बड़ी सामने आई है।
इसमें 74 विद्यालयों से संबंधित 91 बसों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है लेकिन अब तक इनका मामला संभागीय परिवहन विभाग के पोर्टल पर लंबित है। इनमें सबसे पुरानी बस की फिटनेस वर्ष 2020 में ही समाप्त हुई है। वहीं पांच बसें ऐसी हैं जिनकी फिटनेस वर्ष 2025 से लंबित है। फिटनेस खत्म होने के बावजूद इन वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
स्कूल वाहनों से होने वाले हादसों को देखते हुए समय-समय पर विद्यालय वाहनों की जांच और फिटनेस की जांच की जाती है। विद्यालय शुरू होने से पहले वाहनों की जांच की गई। इसके बाद सभी वाहनों का डाटा ऑनलाइन किया गया। जनपद में 700 से अधिक विद्यालय वाहन पंजीकृत हैं।
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विद्यालय वाहनों की हकीकत जानने के लिए एक फिर संभागीय परिवहन विभाग की ओर से 11 से 25 अगस्त तक मिशन सेफ फ्यूचर तहत जांच शुरू की है। इसमें 74 विद्यालयों से संबंधित 91 बसों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है लेकिन अब तक इनका मामला संभागीय परिवहन विभाग के पोर्टल पर लंबित है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें सबसे पुरानी बस की फिटनेस वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुकी है। वहीं पांच बसें ऐसी हैं, जिनकी फिटनेस वर्ष 2025 से लंबित है। फिटनेस खत्म होने के बावजूद इन वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अब इन पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन विभाग की ओर से लंबित फिटनेस वाले वाहनों की जानकारी जुटाने के साथ ही उनके संचालन की स्थिति भी देखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान अधिकांश बसें फिलहाल सड़कों पर संचालित होती दिखाई नहीं दे रही हैं। ऐसे में मौके पर वाहन पकड़कर कार्रवाई करने में दिक्कत आ रही है।
विभाग अब विद्यालय प्रबंधन और वाहन संचालकों से संपर्क कर इन बसों की वास्तविक स्थिति पता करने में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि वाहन संचालन में नहीं हैं तो उन्हें नियमानुसार अभिलेखों में भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है जबकि दोबारा संचालन से पहले फिटनेस कराना अनिवार्य होगा।
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इसमें 74 विद्यालयों से संबंधित 91 बसों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है लेकिन अब तक इनका मामला संभागीय परिवहन विभाग के पोर्टल पर लंबित है। इनमें सबसे पुरानी बस की फिटनेस वर्ष 2020 में ही समाप्त हुई है। वहीं पांच बसें ऐसी हैं जिनकी फिटनेस वर्ष 2025 से लंबित है। फिटनेस खत्म होने के बावजूद इन वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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स्कूल वाहनों से होने वाले हादसों को देखते हुए समय-समय पर विद्यालय वाहनों की जांच और फिटनेस की जांच की जाती है। विद्यालय शुरू होने से पहले वाहनों की जांच की गई। इसके बाद सभी वाहनों का डाटा ऑनलाइन किया गया। जनपद में 700 से अधिक विद्यालय वाहन पंजीकृत हैं।
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विद्यालय वाहनों की हकीकत जानने के लिए एक फिर संभागीय परिवहन विभाग की ओर से 11 से 25 अगस्त तक मिशन सेफ फ्यूचर तहत जांच शुरू की है। इसमें 74 विद्यालयों से संबंधित 91 बसों की फिटनेस अवधि समाप्त हो चुकी है लेकिन अब तक इनका मामला संभागीय परिवहन विभाग के पोर्टल पर लंबित है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें सबसे पुरानी बस की फिटनेस वर्ष 2020 में ही समाप्त हो चुकी है। वहीं पांच बसें ऐसी हैं, जिनकी फिटनेस वर्ष 2025 से लंबित है। फिटनेस खत्म होने के बावजूद इन वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
अब इन पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। परिवहन विभाग की ओर से लंबित फिटनेस वाले वाहनों की जानकारी जुटाने के साथ ही उनके संचालन की स्थिति भी देखी जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान अधिकांश बसें फिलहाल सड़कों पर संचालित होती दिखाई नहीं दे रही हैं। ऐसे में मौके पर वाहन पकड़कर कार्रवाई करने में दिक्कत आ रही है।
विभाग अब विद्यालय प्रबंधन और वाहन संचालकों से संपर्क कर इन बसों की वास्तविक स्थिति पता करने में जुटा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि वाहन संचालन में नहीं हैं तो उन्हें नियमानुसार अभिलेखों में भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है जबकि दोबारा संचालन से पहले फिटनेस कराना अनिवार्य होगा।