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Siddharthnagar News: बांसी में प्रदेश में सर्वाधिक बारिश, 242.4 मिमी के साथ बना रिकॉर्ड
Mon, 03 Aug 2026 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:20 AM IST
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-तराई में सबसे अधिक बरसे बादल, मौसम विभाग ने अगले सप्ताह मानसून के और मानसून होने का जारी किया अलर्ट
-दक्षिणी राजस्थान के निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी द्रोणी के असर से पूर्वांचल में बढ़ी मानसूनी सक्रियता
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से लगे तराई में मानसून अब पूरी तरह मेहरबान हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान सिद्धार्थनगर जिले के बांसी क्षेत्र में 242.4 मिमी अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई, जो उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक रही। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को जहां नमी का लाभ मिलेगा। वहीं, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अभी और अधिक सक्रिय होगा, जिससे आगामी सप्ताह में पूर्वांचल समेत प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिणी राजस्थान पर सक्रिय मौसम तंत्र कमजोर होकर अब दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान पर निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में केंद्रित हो गया है। इसके साथ ही मानसूनी द्रोणी का पूर्वी छोर धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर खिसक रहा है। दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के इस निम्न दबाव क्षेत्र से पूर्वांचल के दक्षिणी हिस्से होते हुए सिक्किम तक निम्न क्षोभ मंडल में एक विस्तृत द्रोणी बनी हुई है। इन दोनों मौसमीय प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से पूर्वांचल में मानसूनी प्रवाह काफी मजबूत हो गया है, जिसके कारण घने बादलों का जमाव और लगातार वर्षा का दौर बना हुआ है। इसी का परिणाम है कि सिद्धार्थनगर के बांसी में 242.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसे अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में रखा गया है।
उन्होंने बताया कि आगामी सप्ताह के दौरान मानसूनी द्रोणी धीरे-धीरे और उत्तर की ओर बढ़ेगी। इसके चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी जबकि तराई और पूर्वांचल के कुछ जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि, निचले इलाकों में जलभराव, कच्चे मकानों को नुकसान तथा बिजली गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने, मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
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-दक्षिणी राजस्थान के निम्न दबाव क्षेत्र और मानसूनी द्रोणी के असर से पूर्वांचल में बढ़ी मानसूनी सक्रियता
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा से लगे तराई में मानसून अब पूरी तरह मेहरबान हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले 24 घंटों के दौरान सिद्धार्थनगर जिले के बांसी क्षेत्र में 242.4 मिमी अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई, जो उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक रही। खेतों में पानी भरने से खरीफ फसलों को जहां नमी का लाभ मिलेगा। वहीं, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून अभी और अधिक सक्रिय होगा, जिससे आगामी सप्ताह में पूर्वांचल समेत प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि दक्षिणी राजस्थान पर सक्रिय मौसम तंत्र कमजोर होकर अब दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान पर निम्न दबाव क्षेत्र के रूप में केंद्रित हो गया है। इसके साथ ही मानसूनी द्रोणी का पूर्वी छोर धीरे-धीरे उत्तर दिशा की ओर खिसक रहा है। दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के इस निम्न दबाव क्षेत्र से पूर्वांचल के दक्षिणी हिस्से होते हुए सिक्किम तक निम्न क्षोभ मंडल में एक विस्तृत द्रोणी बनी हुई है। इन दोनों मौसमीय प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से पूर्वांचल में मानसूनी प्रवाह काफी मजबूत हो गया है, जिसके कारण घने बादलों का जमाव और लगातार वर्षा का दौर बना हुआ है। इसी का परिणाम है कि सिद्धार्थनगर के बांसी में 242.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसे अत्यधिक भारी वर्षा की श्रेणी में रखा गया है।
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उन्होंने बताया कि आगामी सप्ताह के दौरान मानसूनी द्रोणी धीरे-धीरे और उत्तर की ओर बढ़ेगी। इसके चलते प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा होगी जबकि तराई और पूर्वांचल के कुछ जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश भी हो सकती है। लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर में वृद्धि, निचले इलाकों में जलभराव, कच्चे मकानों को नुकसान तथा बिजली गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में लोगों को अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने, मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
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