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Siddharthnagar News: नशा मुक्त युवा से ही बनेगा विकसित भारत
Mon, 03 Aug 2026 12:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:25 AM IST
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मेडिकल कॉलेज के नशा मुक्ति केंद्र पर शपथ लेते डॉक्टर और एमबीबीएस के छात्र।
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- किशोरावस्था में नशा दिमाग को पहुंचाता है स्थायी नुकसान, नशामुक्त समाज बनाने के लिए लिया गया संकल्प
- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज की ओर से आयोजित हुआ जागरुकता कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय के नशा मुक्ति केंद्र (एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी-एटीएफ) की ओर से रविवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि नशा कोई आदत या चरित्र की कमजोरी नहीं बल्कि मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है। समय रहते उपचार और जागरूकता से युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। इस दौरान चिकित्सकों, कर्मचारियों और एमबीबीएस विद्यार्थियों ने नशा मुक्त युवा, विकसित भारत का सामूहिक संकल्प भी लिया।
मानसिक रोग विभाग के सहायक आचार्य और मनोचिकित्सक डॉ. मोहम्मद अफजल ने कहा कि नशीले पदार्थ मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इनके सेवन से दिमाग में सामान्य से 10 से 20 गुना अधिक डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे व्यक्ति बार-बार नशा करने के लिए मजबूर होने लगता है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो सोचने-समझने, निर्णय लेने और सही-गलत का आंकलन करने का केंद्र होता है, लगभग 25 वर्ष की उम्र तक विकसित होता है। यदि किशोरावस्था में नशे की शुरुआत हो जाए तो इस हिस्से का विकास स्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, जिसका असर पूरी जिंदगी व्यक्ति के व्यवहार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन पर पड़ता है।
डॉ. अफजल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे दोस्तों या साथियों के दबाव में आकर किसी भी प्रकार के नशे की शुरुआत न करें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास के साथ नहीं कहना सीखना ही नशे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और कर्मचारियों को बताया गया कि जिला अस्पताल परिसर स्थित एटीएफ सेंटर पर नशे की लत से पीड़ित लोगों के लिए पूरी तरह निशुल्क और गोपनीय परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14446 पर भी संपर्क कर सहायता ली जा सकती है।
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कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। आयोजन के सफल संचालन में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. विशाल गौतम, मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक, काउंसलर अमित कुमार, एटीएफ के कर्मचारियों और एमबीबीएस विद्यार्थी मौजूद रहे।
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- किशोरावस्था में नशा दिमाग को पहुंचाता है स्थायी नुकसान, नशामुक्त समाज बनाने के लिए लिया गया संकल्प
- माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज की ओर से आयोजित हुआ जागरुकता कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी चिकित्सा महाविद्यालय के नशा मुक्ति केंद्र (एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी-एटीएफ) की ओर से रविवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि नशा कोई आदत या चरित्र की कमजोरी नहीं बल्कि मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर लेकिन इलाज योग्य बीमारी है। समय रहते उपचार और जागरूकता से युवाओं को नशे की लत से बाहर निकालकर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। इस दौरान चिकित्सकों, कर्मचारियों और एमबीबीएस विद्यार्थियों ने नशा मुक्त युवा, विकसित भारत का सामूहिक संकल्प भी लिया।
मानसिक रोग विभाग के सहायक आचार्य और मनोचिकित्सक डॉ. मोहम्मद अफजल ने कहा कि नशीले पदार्थ मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम को प्रभावित करते हैं। इनके सेवन से दिमाग में सामान्य से 10 से 20 गुना अधिक डोपामाइन रिलीज होता है, जिससे व्यक्ति बार-बार नशा करने के लिए मजबूर होने लगता है। उन्होंने बताया कि मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो सोचने-समझने, निर्णय लेने और सही-गलत का आंकलन करने का केंद्र होता है, लगभग 25 वर्ष की उम्र तक विकसित होता है। यदि किशोरावस्था में नशे की शुरुआत हो जाए तो इस हिस्से का विकास स्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, जिसका असर पूरी जिंदगी व्यक्ति के व्यवहार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन पर पड़ता है।
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डॉ. अफजल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे दोस्तों या साथियों के दबाव में आकर किसी भी प्रकार के नशे की शुरुआत न करें। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास के साथ नहीं कहना सीखना ही नशे से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने और समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की। कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और कर्मचारियों को बताया गया कि जिला अस्पताल परिसर स्थित एटीएफ सेंटर पर नशे की लत से पीड़ित लोगों के लिए पूरी तरह निशुल्क और गोपनीय परामर्श और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन 14446 पर भी संपर्क कर सहायता ली जा सकती है।
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कार्यक्रम के दौरान नशा मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया। आयोजन के सफल संचालन में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. विशाल गौतम, मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक, काउंसलर अमित कुमार, एटीएफ के कर्मचारियों और एमबीबीएस विद्यार्थी मौजूद रहे।