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Siddharthnagar News: फिर सिर उठाने लगे नकली पनीर के धंधेबाज, तीन जिलों से हो रही सप्लाई
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:05 AM IST
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शहर के दुकान में बना कर रखा हुआ पनीर। संवाद
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सिद्धार्थनगर। अगर आपके घर में मांगलिक कार्यक्रम है और पनीर खिलाना है तो काफी सावधानी के साथ इसे खरीदें। सस्ते की लालच में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ न करें। सहालग शुरू होते ही नकली पनीर के धंधेबाज एक फिर से सिर उठाने लगे हैं।
पिछले साल नवंबर में मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी में अवैध पनीर फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ था। इसमें भेजे गए दोनों नमूने फेल पाए गए थे। फैट की मात्रा अधिक पाए जाने के साथ मिलावट के अन्य हानिकारक तत्व पाए गए थे, जो सेहत के लिए घातक है।
लगन शुरू होते ही जिले में पनीर और खोआ की मांग अचानक आसमान छूने लगती है। उसी का फायदा उठाकर धंधेबाज मिलावटी पनीर को बाजार में सस्ते दामों में बेचते हैं। लोग भी सस्ते के चक्कर में इस पनीर को खरीदते हैं। इसकी वजह से शादी-विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों में नकली पनीर को परोसा जा रहा है। जिसके खाने से सेहत खराब हो सकती है।
जिले में पनीर का वास्तविक उत्पादन न के बराबर है, लेकिन सहालग के दिनों में प्रतिदिन 100 क्विंटल से अधिक की खपत हो जाती है। यही अंतर मिलावटखोरों के लिए मौका बन जाता है। बलरामपुर, फैजाबाद और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों से मिलावटी पनीर की खेप ट्रकों और छोटे वाहनों के जरिए रातों-रात पहुंचा दी जाती है। उत्पादन कम होने के बावजूद ऑर्डर मिलते ही सप्लाई कर दी जाती है। पिछले साल दीपावली और अन्य पर्वों पर भी खाद्य विभाग की छापेमारी में मिलावटी पनीर और खोआ बरामद हो चुका है, जिससे साफ है कि यह धंधा संगठित तरीके से चलता है।
नवंबर में मिश्रौलिया में पकड़ी गई फैक्टरी में दूध की जगह सोयाबीन घोल, पाम ऑयल और डिटर्जेंट के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी। इसके साथ ही जांच में दोनों नमूने फेल हो गए थे। इसके बाद फैक्टरी संचालक पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके अलावा भी बीते वर्ष दिसंबर माह में मिस ब्रांड का होना पाया गया है। इसमें खाद्य सुरक्षा विभाग जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर रहा है।
आधे दाम पर दुकानों तक पहुंच रही थी पनीर: मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी गांव से संचालित एक गिरोह नकली पनीर का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। बाजार में 360 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला पनीर दुकानदारों को सिर्फ 200 रुपये प्रति किलोग्राम में उपलब्ध कराई जाती थी। कम दाम का लालच देकर गिरोह ने कई छोटे-बड़े दुकानदारों तक अपनी पकड़ बना ली थी।
जांच में सामने आया था कि फैक्टरी से निकलने वाला पनीर सीधे मैरिज लॉन और खाना बनाने वालों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा था। मिठाई और पनीर का काम करने वाले जोगिया क्षेत्र के एक दुकानदार ने बताया कि अब यह धंधा कई स्तर पर किया जा रहा है। अब सीधे मैरिज हॉल और बावर्ची से संपर्क करके पनीर की सप्लाई की जा रही है।
इतने पर हुई कार्रवाई: खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल माह तक आए 128 में से 88 नमूने फेल हुए थे।
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पिछले साल नवंबर में मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी में अवैध पनीर फैक्टरी का भंडाफोड़ हुआ था। इसमें भेजे गए दोनों नमूने फेल पाए गए थे। फैट की मात्रा अधिक पाए जाने के साथ मिलावट के अन्य हानिकारक तत्व पाए गए थे, जो सेहत के लिए घातक है।
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लगन शुरू होते ही जिले में पनीर और खोआ की मांग अचानक आसमान छूने लगती है। उसी का फायदा उठाकर धंधेबाज मिलावटी पनीर को बाजार में सस्ते दामों में बेचते हैं। लोग भी सस्ते के चक्कर में इस पनीर को खरीदते हैं। इसकी वजह से शादी-विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों में नकली पनीर को परोसा जा रहा है। जिसके खाने से सेहत खराब हो सकती है।
जिले में पनीर का वास्तविक उत्पादन न के बराबर है, लेकिन सहालग के दिनों में प्रतिदिन 100 क्विंटल से अधिक की खपत हो जाती है। यही अंतर मिलावटखोरों के लिए मौका बन जाता है। बलरामपुर, फैजाबाद और गोरखपुर जैसे क्षेत्रों से मिलावटी पनीर की खेप ट्रकों और छोटे वाहनों के जरिए रातों-रात पहुंचा दी जाती है। उत्पादन कम होने के बावजूद ऑर्डर मिलते ही सप्लाई कर दी जाती है। पिछले साल दीपावली और अन्य पर्वों पर भी खाद्य विभाग की छापेमारी में मिलावटी पनीर और खोआ बरामद हो चुका है, जिससे साफ है कि यह धंधा संगठित तरीके से चलता है।
नवंबर में मिश्रौलिया में पकड़ी गई फैक्टरी में दूध की जगह सोयाबीन घोल, पाम ऑयल और डिटर्जेंट के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी। इसके साथ ही जांच में दोनों नमूने फेल हो गए थे। इसके बाद फैक्टरी संचालक पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इसके अलावा भी बीते वर्ष दिसंबर माह में मिस ब्रांड का होना पाया गया है। इसमें खाद्य सुरक्षा विभाग जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर रहा है।
आधे दाम पर दुकानों तक पहुंच रही थी पनीर: मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के नागचौरी गांव से संचालित एक गिरोह नकली पनीर का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। बाजार में 360 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला पनीर दुकानदारों को सिर्फ 200 रुपये प्रति किलोग्राम में उपलब्ध कराई जाती थी। कम दाम का लालच देकर गिरोह ने कई छोटे-बड़े दुकानदारों तक अपनी पकड़ बना ली थी।
जांच में सामने आया था कि फैक्टरी से निकलने वाला पनीर सीधे मैरिज लॉन और खाना बनाने वालों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा था। मिठाई और पनीर का काम करने वाले जोगिया क्षेत्र के एक दुकानदार ने बताया कि अब यह धंधा कई स्तर पर किया जा रहा है। अब सीधे मैरिज हॉल और बावर्ची से संपर्क करके पनीर की सप्लाई की जा रही है।
इतने पर हुई कार्रवाई: खाद्य सुरक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल माह तक आए 128 में से 88 नमूने फेल हुए थे।
