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Siddharthnagar News: कोच न निगरानी...तैराकों के सपने पर सिस्टम फेर रहा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:04 AM IST
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जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम का तरणताल। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में तैराकी की तैयारी करने वाले खिलाड़ी इस समय बिना कोच के ही प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं। तैराकी कोच के सेवानिवृत्त होने के बाद तैराकों को नियमित और तकनीकी प्रशिक्षण नहीं मिल पा रहा है।
ठंड के मौसम में पूल बंद रहने से पहले खिलाड़ी कोच की निगरानी में फिटनेस बनाए रखते थे, लेकिन अब बिना कोच के वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इससे तैराकों को राज्य और देश के लिए मेडल जीतने का सपना धीरे-धीरे टूटने लगा है।
कोच के अभाव में सत्र की शुरुआत में खिलाड़ियों की लय टूट जाती है और उन्हें फिर से शुरुआती स्तर से तकनीक पर काम करना पड़ता है। तैराकी में हर साल लगभग 50 खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। कोच की देखरेख में उन्हें तैराकी तकनीक, स्टेमिना, फिटनेस और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता था।
अब यह समन्वित प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं होने से खिलाड़ियों का विकास प्रभावित हो रहा है। ऐसे में राज्य और देश के लिए मेडल लाने का सपना धीरे-धीरे टूट रहा है। कोच के अभाव में खिलाड़ी तकनीक और फिटनेस बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत में उन्हें शुरू से ही अभ्यास करना पड़ता है। पूरे ठंड के महीनों में जिम और रनिंग के जरिए खिलाड़ियों को अपनी स्टेमिना और स्ट्रेंथ बनाए रखने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे तरणताल बंद रहने का असर अधिक महसूस नहीं होता है।
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ठंड के मौसम में पूल बंद रहने से पहले खिलाड़ी कोच की निगरानी में फिटनेस बनाए रखते थे, लेकिन अब बिना कोच के वह कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इससे तैराकों को राज्य और देश के लिए मेडल जीतने का सपना धीरे-धीरे टूटने लगा है।
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कोच के अभाव में सत्र की शुरुआत में खिलाड़ियों की लय टूट जाती है और उन्हें फिर से शुरुआती स्तर से तकनीक पर काम करना पड़ता है। तैराकी में हर साल लगभग 50 खिलाड़ी प्रशिक्षण लेते हैं। कोच की देखरेख में उन्हें तैराकी तकनीक, स्टेमिना, फिटनेस और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण प्रशिक्षण दिया जाता था।
अब यह समन्वित प्रशिक्षण उपलब्ध नहीं होने से खिलाड़ियों का विकास प्रभावित हो रहा है। ऐसे में राज्य और देश के लिए मेडल लाने का सपना धीरे-धीरे टूट रहा है। कोच के अभाव में खिलाड़ी तकनीक और फिटनेस बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। नए सत्र की शुरुआत में उन्हें शुरू से ही अभ्यास करना पड़ता है। पूरे ठंड के महीनों में जिम और रनिंग के जरिए खिलाड़ियों को अपनी स्टेमिना और स्ट्रेंथ बनाए रखने की कोशिश करनी पड़ती है, जिससे तरणताल बंद रहने का असर अधिक महसूस नहीं होता है।
