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उपेक्षा का दंश : हर साल बाढ़ की मार... रहस्यमय बीमारी से टूट रहे परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 22 Jan 2026 12:08 AM IST
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खुनियांव ब्लॉक के ग्राम पंचायत लक्ष्मणपुर उर्फ बाल्लीजोत के बड़हरा खास गांव में नल के पास फैली
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सिद्धार्थनगर/ शाहरपुर। खुनियांव ब्लॉक क्षेत्र लक्ष्मणपुर उर्फ बाल्लीजोत गांव के बड़हरा खास के लोग आज भी देसी हैंडपंप से प्यास बुझा रहे हैं। नल के पास फैली गंदगी और हर साल आने वाली बाढ़ से बेपटरी होने वाली जिंदगी के बीच वह हर दिन जद्दोजहद करने को मजबूर हैं। उथल-पुथल वाली जिंदगी के बीच इन्हें ऐसी रहस्यमय बीमारी भी मिल गई है, जिससे वह न चाहकर भी घुट-घुटकर जीने के लिए बेबस हैं।
हैंडपंप के हालात और पानी में अधिक मिले फ्लोराइड की मात्रा कहीं न कहीं रहस्यमय बीमारी की वजह हो सकती है। बाढ़ के वक्त विकास के लिए होने वाले दावे, दवा और शुद्ध पेयजल पर अगर सही मायने में ध्यान दिया गया होता तो शायद यह रहस्यमय बीमारी लाइलाज नहीं बनती। अब पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमे ने गांव में पहुंचकर जांच करने के लिए कहा है। अगर यह कदम पहले से उठाया गया है तो शायद यह बीमारी पांव न पसार पाती और परिवार के परिवार जद में न आते। खुनियांव ब्लाॅक क्षेत्र के बड़हरा खास गांव आबादी लगभग 100 से अधिक है। यह राप्ती नदी बांध के सटे बसा हुआ है। यहां राप्ती हर वर्ष तांडव मचाती है। बारिश के समय राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से ग्रामीण हर वर्ष जूझते हैं।
बाढ़ के समय गांव के पास से ही गुजर रही शाहपुर से बांसी बांध ग्रामीणों का सहारा बन जाता है। बाढ़ खत्म होने के बाद पानी में डूबे नलों के पानी ही ग्रामीण पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जबकि, जांच में कुछ नलों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। गांव में जिन परिवारों के घर सैंपलिंग हुई, उन सभी के घरों में देसी हैंडपंप लगे हैं। इसके साथ ही पानी गिराने के लिए कोई नाली नहीं है।
इसका पानी पास में बने गड्ढाें या फिर घर के कुछ दूर आगे सड़कों पर ही पसर रहा है। कई जगह ऐसा दिखा कि हैंडपंप के चारों तरफ गंदगी और कीचड़ की बीच से पानी लेकर जा रहे हैं। यह महज 12 परिवार की बात नहीं है, गांव के अन्य लोगों की है। ि
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हैंडपंप के हालात और पानी में अधिक मिले फ्लोराइड की मात्रा कहीं न कहीं रहस्यमय बीमारी की वजह हो सकती है। बाढ़ के वक्त विकास के लिए होने वाले दावे, दवा और शुद्ध पेयजल पर अगर सही मायने में ध्यान दिया गया होता तो शायद यह रहस्यमय बीमारी लाइलाज नहीं बनती। अब पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाए जाने के बाद स्वास्थ्य महकमे ने गांव में पहुंचकर जांच करने के लिए कहा है। अगर यह कदम पहले से उठाया गया है तो शायद यह बीमारी पांव न पसार पाती और परिवार के परिवार जद में न आते। खुनियांव ब्लाॅक क्षेत्र के बड़हरा खास गांव आबादी लगभग 100 से अधिक है। यह राप्ती नदी बांध के सटे बसा हुआ है। यहां राप्ती हर वर्ष तांडव मचाती है। बारिश के समय राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से ग्रामीण हर वर्ष जूझते हैं।
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बाढ़ के समय गांव के पास से ही गुजर रही शाहपुर से बांसी बांध ग्रामीणों का सहारा बन जाता है। बाढ़ खत्म होने के बाद पानी में डूबे नलों के पानी ही ग्रामीण पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जबकि, जांच में कुछ नलों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। गांव में जिन परिवारों के घर सैंपलिंग हुई, उन सभी के घरों में देसी हैंडपंप लगे हैं। इसके साथ ही पानी गिराने के लिए कोई नाली नहीं है।
इसका पानी पास में बने गड्ढाें या फिर घर के कुछ दूर आगे सड़कों पर ही पसर रहा है। कई जगह ऐसा दिखा कि हैंडपंप के चारों तरफ गंदगी और कीचड़ की बीच से पानी लेकर जा रहे हैं। यह महज 12 परिवार की बात नहीं है, गांव के अन्य लोगों की है। ि
