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Siddharthnagar News: निगल रहे बेहिसाब एंटीबायोटिक...साधारण बीमारी भी ले रही जान
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:20 AM IST
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शहर के मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए लगी भीड़। संवाद
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सिद्धार्थनगर। दुष्परिणाम की गंभीरता से बेखबर यहां लोग एंटीबायोटिक दवाएं गैस वाली गोली की तरह गटक रहे हैं। सामान्य सर्दी जुकाम, बुखार-खांसी जैसे वायरल होने पर भी इतनी हाई पॉवर एंटी बायोटिक इस्तेमाल कर ले रहे हैं कि हालत बिगड़ने पर सामान्य एंटीबायोटिक असर ही नहीं कर रही है।
माधव प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय के वरिष्ठ डॉक्टर्स कहते हैं कि इधर के कुछ महीनों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिनपर सामान्य एंटीबायोटिक काम नहीं कर रही। डॉक्टरों को महंगी और सीमित दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे इलाज लंबा, खर्चीला और जोखिम भरा हो गया है। बच्चे इस संकट की सबसे कमजोर कड़ी बनते जा रहे हैं।
हल्की सर्दी या बुखार में दी जा रही एंटीबायोटिक से बच्चों में दस्त, उल्टी और एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं और उनकी प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंच रहे हैं।
वहां न पर्चे की मांग होती है और न बीमारी की पुष्टि। कई मामलों में मरीज खुद खुराक और अवधि तय कर लेता है और दो-तीन दिन में आराम आते ही दवा छोड़ देता है। डॉक्टरों के अनुसार यही गलत और अधूरा इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बनाता है और दवाओं को बेअसर कर देता है।
डॉक्टर खुद हैरान: चिकित्सक डॉ. सीवी चौधरी कहते कि सर्दी-जुकाम, खांसी, फ्लू और वायरल बुखार जैसी बीमारियां वायरल होती हैं, जिनमें एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता। एंटीबायोटिक केवल निमोनिया, टाइफाइड, टीबी, मूत्र संक्रमण और गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में जांच के बाद दी जाती है, लेकिन जिले में यह बुनियादी फर्क लगभग मिट चुका है।
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माधव प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय के वरिष्ठ डॉक्टर्स कहते हैं कि इधर के कुछ महीनों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है जिनपर सामान्य एंटीबायोटिक काम नहीं कर रही। डॉक्टरों को महंगी और सीमित दवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे इलाज लंबा, खर्चीला और जोखिम भरा हो गया है। बच्चे इस संकट की सबसे कमजोर कड़ी बनते जा रहे हैं।
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हल्की सर्दी या बुखार में दी जा रही एंटीबायोटिक से बच्चों में दस्त, उल्टी और एलर्जी के मामले बढ़ रहे हैं और उनकी प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव दुबे बताते हैं कि ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में लोग सीधे मेडिकल स्टोर पहुंच रहे हैं।
वहां न पर्चे की मांग होती है और न बीमारी की पुष्टि। कई मामलों में मरीज खुद खुराक और अवधि तय कर लेता है और दो-तीन दिन में आराम आते ही दवा छोड़ देता है। डॉक्टरों के अनुसार यही गलत और अधूरा इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बनाता है और दवाओं को बेअसर कर देता है।
डॉक्टर खुद हैरान: चिकित्सक डॉ. सीवी चौधरी कहते कि सर्दी-जुकाम, खांसी, फ्लू और वायरल बुखार जैसी बीमारियां वायरल होती हैं, जिनमें एंटीबायोटिक का कोई फायदा नहीं होता। एंटीबायोटिक केवल निमोनिया, टाइफाइड, टीबी, मूत्र संक्रमण और गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में जांच के बाद दी जाती है, लेकिन जिले में यह बुनियादी फर्क लगभग मिट चुका है।