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Siddharthnagar News: टंकी की सफाई का शुरू हुआ अभियान मिलेगा साफ पानी, सुरक्षित होगी जिंदगानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:35 AM IST
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शहर के गांधी नगर में स्थित पानी की टंकी की सफाई करते नगर पालिका कर्मी। संवाद
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सिद्धार्थनगर। इंदौर में दूषित पानी से फैली बीमारी और मौतों की भयावह तस्वीर दिखने के बाद अब जिले का प्रशासन पूरी तरह अलर्ट और संजीदा हो गया है। पुरानी पाइप की लाइन को बदलने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है,
वहीं अब जनस्वास्थ्य को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाते हुए शहर की सभी जलापूर्ति टंकियों की व्यापक सफाई और शुद्धिकरण अभियान शुरू किया गया है। इस पहल से अब लोगों को साफ और शुद्ध पानी पीने के लिए मिलेगा।
नगर पालिका के सीमा विस्तार के साथ क्षेत्रफल और दायरा दोनों बढ़ गया है। मौजूदा समय में शहर की आबादी एक लाख से अधिक होगी। मौजूदा समय में सात टंकियों से घर-घर टोटी से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसमें पुरानी पाइप होने के कारण अकसर लीकेज और नाली का गंदा पानी घरों तक पहुंचने की शिकायत आती रहतीं हैं। इसके साथ ही गंदा पानी और जीवाणु घरों तक पहुंचते हैं, जिससे कई प्रकार की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जाने-अनजाने में इस पानी का इस्तेमाल कर रहे लोग बीमार हो रहे हैं।
इंदौर में दूषित पानी के सेवन से कई लोगों की मौत हो गई। इसके बाद नगर पालिका की पड़ताल की गई तो गंदगी के बीच पाइप लाइन से सप्लाई, मटमैले पानी की आपूर्ति सहित कई खामियां सामने आईं। यह हाल नगर पालिका के सिद्धार्थनगर के मोहल्लों के साथ शोहरतगढ़ नगर पंचायत और बांसी नगर पालिका के वार्डों में देखने को मिला। समस्या से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका सिद्धार्थनगर की ओर से पाइपलाइन बदलने का काम शुरू कर दिया गया। नगर में सात बड़ी टंकियों से लाखों लोगों को पानी सप्लाई होती है। इन्हीं टंकियों में जमी गाद, काई, कीटाणु और रिसाव से मिल रहा गंदा पानी बीते वर्ष कई मोहल्लों में बीमारी का कारण बना था। कई लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार से पीड़ित हुए थे। उसी कड़वे अनुभव और इंदौर की घटना से सबक लेते हुए अब हर टंकी की वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जा रही है।
रविवार को नगर के गांधी नगर मोहल्ले की टंकी की सफाई की जा रही थी। इसमें सिर्फ टंकी धोना ही नहीं बल्कि उनमें क्लोरीन टैबलेट भी डाली जा रही है ताकि विषैले बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीव नष्ट हो सकें। साथ ही टंकी के आसपास जमी गंदगी, जलभराव और सीवर के रिसाव को भी हटाया जा रहा है ताकि दोबारा प्रदूषण की गुंजाइश न बचे।
नगर प्रशासन का कहना है कि यह काम चरणबद्ध तरीके से सभी सातों टंकियों में किया जा रहा है और हर टंकी के बाद पानी के सैंपल लेकर उसकी जांच भी कराई जाएगी। कैसे होगी टंकियों की सफाई: इंदौर में मौत के बाद पानी की जांच शुरु हुई तो इसमें शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पाए गए। माना गया कि प्रदूषित पानी के सेवन से जान गई है, इसलिए पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया। इसमें नगर में पानी की टंकी की सफाई इस प्रकार से की जा रही है।
पहले टंकी पूरी तरह खाली कराई जाएगी। अंदर जमी गाद, काई और गंदगी निकाली जाएगी। हाई प्रेशर पानी और ब्रश से अंदर की दीवारें धोई जाएंगी। इसके बाद क्लोरीन व कीटाणुनाशक डाला जाएगा। आसपास के जलभराव और नालियों की भी सफाई होगी। फिर सप्लाई शुरू करने से पहले पानी की जांच। जैसा की नगर के गांधी नगर मोहल्ले के टंकी में हो रही सफाई में देखा गया।
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वहीं अब जनस्वास्थ्य को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाते हुए शहर की सभी जलापूर्ति टंकियों की व्यापक सफाई और शुद्धिकरण अभियान शुरू किया गया है। इस पहल से अब लोगों को साफ और शुद्ध पानी पीने के लिए मिलेगा।
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नगर पालिका के सीमा विस्तार के साथ क्षेत्रफल और दायरा दोनों बढ़ गया है। मौजूदा समय में शहर की आबादी एक लाख से अधिक होगी। मौजूदा समय में सात टंकियों से घर-घर टोटी से पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसमें पुरानी पाइप होने के कारण अकसर लीकेज और नाली का गंदा पानी घरों तक पहुंचने की शिकायत आती रहतीं हैं। इसके साथ ही गंदा पानी और जीवाणु घरों तक पहुंचते हैं, जिससे कई प्रकार की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जाने-अनजाने में इस पानी का इस्तेमाल कर रहे लोग बीमार हो रहे हैं।
इंदौर में दूषित पानी के सेवन से कई लोगों की मौत हो गई। इसके बाद नगर पालिका की पड़ताल की गई तो गंदगी के बीच पाइप लाइन से सप्लाई, मटमैले पानी की आपूर्ति सहित कई खामियां सामने आईं। यह हाल नगर पालिका के सिद्धार्थनगर के मोहल्लों के साथ शोहरतगढ़ नगर पंचायत और बांसी नगर पालिका के वार्डों में देखने को मिला। समस्या से जुड़ी खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका सिद्धार्थनगर की ओर से पाइपलाइन बदलने का काम शुरू कर दिया गया। नगर में सात बड़ी टंकियों से लाखों लोगों को पानी सप्लाई होती है। इन्हीं टंकियों में जमी गाद, काई, कीटाणु और रिसाव से मिल रहा गंदा पानी बीते वर्ष कई मोहल्लों में बीमारी का कारण बना था। कई लोग उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार से पीड़ित हुए थे। उसी कड़वे अनुभव और इंदौर की घटना से सबक लेते हुए अब हर टंकी की वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जा रही है।
रविवार को नगर के गांधी नगर मोहल्ले की टंकी की सफाई की जा रही थी। इसमें सिर्फ टंकी धोना ही नहीं बल्कि उनमें क्लोरीन टैबलेट भी डाली जा रही है ताकि विषैले बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म जीव नष्ट हो सकें। साथ ही टंकी के आसपास जमी गंदगी, जलभराव और सीवर के रिसाव को भी हटाया जा रहा है ताकि दोबारा प्रदूषण की गुंजाइश न बचे।
नगर प्रशासन का कहना है कि यह काम चरणबद्ध तरीके से सभी सातों टंकियों में किया जा रहा है और हर टंकी के बाद पानी के सैंपल लेकर उसकी जांच भी कराई जाएगी। कैसे होगी टंकियों की सफाई: इंदौर में मौत के बाद पानी की जांच शुरु हुई तो इसमें शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व पाए गए। माना गया कि प्रदूषित पानी के सेवन से जान गई है, इसलिए पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने पर जोर दिया गया। इसमें नगर में पानी की टंकी की सफाई इस प्रकार से की जा रही है।
पहले टंकी पूरी तरह खाली कराई जाएगी। अंदर जमी गाद, काई और गंदगी निकाली जाएगी। हाई प्रेशर पानी और ब्रश से अंदर की दीवारें धोई जाएंगी। इसके बाद क्लोरीन व कीटाणुनाशक डाला जाएगा। आसपास के जलभराव और नालियों की भी सफाई होगी। फिर सप्लाई शुरू करने से पहले पानी की जांच। जैसा की नगर के गांधी नगर मोहल्ले के टंकी में हो रही सफाई में देखा गया।