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Siddharthnagar News: नेपाल चुनाव से पहले बॉर्डर पर अलर्ट सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 12:27 AM IST
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नेपाल में वाहनों की जांच करते नेपाली नागरिक पुलिस। स्रोत सोशल मीडिया
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में मार्च माह में होने वाले चुनाव से पहले सीमावर्ती इलाकों में खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगती है। भारत-नेपाल बॉर्डर पर संदिग्धों की पहचान, कैदियों की गुमशुदगी और हिंसा से जुड़े सुरागों को तलाशने के लिए गोपनीय ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
नेपाल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी बड़ी साजिश को नाकाम करने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसी के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर मदद भी लेने लेंगे। साथ ही हर पहलू पर पड़ताल की जा रही है। सीमाई क्षेत्र के नेपाल के ग्रामीण इलाकों में संदिग्ध व्यक्तियों और सक्रिय अपराधियों की कुंडली खंगाल रही हैं।
नेपाल में बीते साल सोशल मीडिया पर पाबंदी के विरोध में भड़की हिंसा से नेपाल जल उठा था और सरकार का तख्ता पलट हो गया। अस्थाई सरकार के अस्तित्व में आने साथ ही पांच मार्च को चुनाव की तिथि तय कर दी गई है। नेपाल में हिंसा भड़कने के साथ ही अव्यवस्था उत्पन्न हो गई थी। चुनाव के दौरान ऐसा न हो, इसे देखते हुए नेपाल की जांच एजेंसी और सशस्त्र बल के साथ नेपाल पुलिस भी अलर्ट मोड में है।
मार्च माह में होने वाले नेपाल चुनाव को देखते हुए नेपाल सरकार ने देशभर में अलर्ट जारी कर दिया है। खासतौर पर भारत से सटे सीमावर्ती जिलों में नेपाल की सुरक्षा एजेंसी और सशस्त्र बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
हाल ही में नेपाल में भड़की हिंसा के बाद जेलों से भेजे गए कुछ कैदियों के लापता होने के इनपुट मिले हैं, जिसके बाद उनकी धरपकड़ के लिए पुलिस हाथ-पांव मार रही है। अब चुनाव में वह कोई बखेड़ा न खड़ा करें, इसके लिए उनकी तलाश और तेज हाे गई है। आशंका है कि ये लोग सीमावर्ती इलाके के गांव में छिप सकते हैं या चुनाव के दौरान अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से बॉर्डर गांवों, कस्बों और आवाजाही के रास्तों पर स्थानीय लोगों से भी गुप्त रूप से पूछताछ की जा रही है।
सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की खुफिया एजेंसियां भारत के साथ समन्वय बनाकर इन संदिग्धों की पृष्ठभूमि, मूवमेंट और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जरूरत पड़ने पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी और जमीनी मदद भी ली जाएगी।
नेपाल-भारत सीमा पर कई ऐसे प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां से अवैध आवाजाही की आशंका रहती है, वहां विशेष निगरानी दल तैनात कर दिए गए हैं। उद्देश्य साफ है कि पांच मार्च को होने वाले चुनाव को हर हाल में शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से कराया जाए।
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नेपाल से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां किसी भी बड़ी साजिश को नाकाम करने के लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसी के संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर मदद भी लेने लेंगे। साथ ही हर पहलू पर पड़ताल की जा रही है। सीमाई क्षेत्र के नेपाल के ग्रामीण इलाकों में संदिग्ध व्यक्तियों और सक्रिय अपराधियों की कुंडली खंगाल रही हैं।
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नेपाल में बीते साल सोशल मीडिया पर पाबंदी के विरोध में भड़की हिंसा से नेपाल जल उठा था और सरकार का तख्ता पलट हो गया। अस्थाई सरकार के अस्तित्व में आने साथ ही पांच मार्च को चुनाव की तिथि तय कर दी गई है। नेपाल में हिंसा भड़कने के साथ ही अव्यवस्था उत्पन्न हो गई थी। चुनाव के दौरान ऐसा न हो, इसे देखते हुए नेपाल की जांच एजेंसी और सशस्त्र बल के साथ नेपाल पुलिस भी अलर्ट मोड में है।
मार्च माह में होने वाले नेपाल चुनाव को देखते हुए नेपाल सरकार ने देशभर में अलर्ट जारी कर दिया है। खासतौर पर भारत से सटे सीमावर्ती जिलों में नेपाल की सुरक्षा एजेंसी और सशस्त्र बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।
हाल ही में नेपाल में भड़की हिंसा के बाद जेलों से भेजे गए कुछ कैदियों के लापता होने के इनपुट मिले हैं, जिसके बाद उनकी धरपकड़ के लिए पुलिस हाथ-पांव मार रही है। अब चुनाव में वह कोई बखेड़ा न खड़ा करें, इसके लिए उनकी तलाश और तेज हाे गई है। आशंका है कि ये लोग सीमावर्ती इलाके के गांव में छिप सकते हैं या चुनाव के दौरान अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। इसी वजह से बॉर्डर गांवों, कस्बों और आवाजाही के रास्तों पर स्थानीय लोगों से भी गुप्त रूप से पूछताछ की जा रही है।
सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, नेपाल की खुफिया एजेंसियां भारत के साथ समन्वय बनाकर इन संदिग्धों की पृष्ठभूमि, मूवमेंट और नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जरूरत पड़ने पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी और जमीनी मदद भी ली जाएगी।
नेपाल-भारत सीमा पर कई ऐसे प्वाइंट चिह्नित किए गए हैं, जहां से अवैध आवाजाही की आशंका रहती है, वहां विशेष निगरानी दल तैनात कर दिए गए हैं। उद्देश्य साफ है कि पांच मार्च को होने वाले चुनाव को हर हाल में शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से कराया जाए।