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Siddharthnagar News: जल्द स्वदेस लाया जाएगा रिजवान का पार्थिव शरीर
Mon, 03 Aug 2026 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:11 AM IST
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बिस्कोहर के डोकम अमया गांव निवासी मृतक रिजवान अहमद का परिवार।
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बिस्कोहर। सऊदी अरब के नजरान शहर में मृत डोकम अमया गांव निवासी रिजवान अहमद के शव को वतन लाने की मुहिम को रविवार को बड़ी कामयाबी मिली। विदेश मंत्रालय के समन्वय से जल्द रिजवान का पार्थिव शरीर स्वदेस लाया जाएगा।
अमर उजाला के रविवार दो अगस्त के अंक में बेटे की मिट्टी के इंतजार में पथरा रहीं बूढ़ी आंखें शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हलचल तेज हो गई। समाचार का संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय सांसद जगदंबिका पाल ने पीड़ित परिवार को त्वरित मदद का ठोस भरोसा दिया है।
रविवार की सुबह मृतक रिजवान अहमद के वृद्ध पिता अतहर हुसैन, बेटा आमिर रजा और गांव के पांच अन्य गणमान्य नागरिक डोकम अमया गांव से सांसद जगदंबिका पाल से मुलाकात करने पहुंचे।
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लाचार पिता और बिलखते बेटे ने सांसद को अपनी पीड़ा बताई कि किस तरह यमन संघर्ष के चलते तकनीकी कारणों और उड़ानों के प्रभावित होने से शव डेढ़ महीने से सऊदी अरब में फंसा हुआ है। परिजन का दर्द सुनकर सांसद जगदंबिका पाल भावुक हो गए।
उन्होंने मौके से ही विदेश मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और परिजनों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि प्रक्रिया को तेज कराकर रिजवान का शव हर हाल में उनके पैतृक गांव मंगवाया जाएगा।
देर शाम सऊदी अरब कार्गो से आया फोन, मांगे कागजात : अखबार में खबर छपने और सांसद की सक्रियता का असर रविवार देर शाम को ही दिखने लगा।
मृतक रिजवान के छोटे भाई रिहान रजा ने बताया कि शाम करीब साढ़े चार बजे उनके पास सऊदी अरब के कार्गो से आधिकारिक फोन आया। अधिकारियों ने शव को भारत भेजने की कानूनी कागजी प्रक्रिया “फ्लाइट क्लीयरेंस” को आगे बढ़ाने के लिए रिजवान के माता-पिता का एक सहमति शपथ पत्र तत्काल तैयार करने को कहा है।
कार्गो ने निर्देश दिए हैं कि इस एफिडेविट को बनवाकर इसकी पीडीएफ फाइल तुरंत ऑनलाइन माध्यम से उनके पास भेज दी जाए। इस सकारात्मक मोड़ के बाद पीड़ित परिवार को उम्मीद बंधी है कि अब बहुत जल्द रिजवान का शव अपनी माटी में सुपुर्द-ए-खाक हो सकेगा।
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अमर उजाला के रविवार दो अगस्त के अंक में बेटे की मिट्टी के इंतजार में पथरा रहीं बूढ़ी आंखें शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलके में हलचल तेज हो गई। समाचार का संज्ञान लेते हुए क्षेत्रीय सांसद जगदंबिका पाल ने पीड़ित परिवार को त्वरित मदद का ठोस भरोसा दिया है।
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रविवार की सुबह मृतक रिजवान अहमद के वृद्ध पिता अतहर हुसैन, बेटा आमिर रजा और गांव के पांच अन्य गणमान्य नागरिक डोकम अमया गांव से सांसद जगदंबिका पाल से मुलाकात करने पहुंचे।
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लाचार पिता और बिलखते बेटे ने सांसद को अपनी पीड़ा बताई कि किस तरह यमन संघर्ष के चलते तकनीकी कारणों और उड़ानों के प्रभावित होने से शव डेढ़ महीने से सऊदी अरब में फंसा हुआ है। परिजन का दर्द सुनकर सांसद जगदंबिका पाल भावुक हो गए।
उन्होंने मौके से ही विदेश मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से फोन पर वार्ता की और परिजनों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि प्रक्रिया को तेज कराकर रिजवान का शव हर हाल में उनके पैतृक गांव मंगवाया जाएगा।
देर शाम सऊदी अरब कार्गो से आया फोन, मांगे कागजात : अखबार में खबर छपने और सांसद की सक्रियता का असर रविवार देर शाम को ही दिखने लगा।
मृतक रिजवान के छोटे भाई रिहान रजा ने बताया कि शाम करीब साढ़े चार बजे उनके पास सऊदी अरब के कार्गो से आधिकारिक फोन आया। अधिकारियों ने शव को भारत भेजने की कानूनी कागजी प्रक्रिया “फ्लाइट क्लीयरेंस” को आगे बढ़ाने के लिए रिजवान के माता-पिता का एक सहमति शपथ पत्र तत्काल तैयार करने को कहा है।
कार्गो ने निर्देश दिए हैं कि इस एफिडेविट को बनवाकर इसकी पीडीएफ फाइल तुरंत ऑनलाइन माध्यम से उनके पास भेज दी जाए। इस सकारात्मक मोड़ के बाद पीड़ित परिवार को उम्मीद बंधी है कि अब बहुत जल्द रिजवान का शव अपनी माटी में सुपुर्द-ए-खाक हो सकेगा।