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Siddharthnagar News: नशे का लती बनकर अपराध के दलदल में जा रहे युवा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:33 AM IST
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सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल का सीमावर्ती कस्बा सामान की तस्करी तक सीमित नहीं है बल्कि, मादक पदार्थ के धंधे का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। बाॅर्डर पर संगठित गिरोह पनप रहा है, जो युवाओं को नशे का आदी बनाकर अपराध के दलदल की ओर धकेल रहा है। बढ़नी कस्बे में तीन दिन पहले एक परिवार पर लोगों ने स्मैक बेचने का आरोप लगाया। विरोध करने पर काफी विवाद भी हुआ। पुलिस के आने और समझाने के बाद मामला शांत हुआ। यह इस बात को पुष्ट कर रहा है कि कस्बा नशे का कारोबार से अछूता नहीं है।
तीन दिन पहले बढ़नी कस्बे में स्मैक की बिक्री किए जाने पर एक मोहल्ले के लोग विरोध पर उतर आए। आरोप लगाए कि संबंधित व्यक्ति स्मैक की बिक्री करता है। कई स्थानों से लोग आते हैं और विवाद होता है। पुलिस की दखल और जांच के आश्वासन के बाद विरोध शांत हुआ। स्थानीय सूत्रों से जानकारी मिली कि यहां पूरा सिंडिकेट काम करता है। बाॅर्डर के लोगों ने बताया कि पुड़िया में होने वाले इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य किरदार तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं पहुंच पा रही हैं। प्यादे तक कार्रवाई सीमित रह जाती है जो पकड़े जाने पर इधर जेल जाते हैं और उधर फिर बाहर आते ही उसे धंधे में संलिप्त हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कुछ नई उम्र के युवा हैं जो दिनभर घूमते हैं और ठाठ-बाट से रहते हैं। उनका काम युवाओं को स्मैक की लत डलवाना और आदी होने पर खरीदने के लिए मजबूर करना है। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस विभाग इनपर कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है।
इससे पहले भी बढ़नी बाॅर्डर से स्मैक की बरामदगी में बढ़नी कस्बे के ही लोग पकड़े जा चुके हैं। इनके कनेक्शन गोंडा, बाराबंकी से होना सामने आ चुका है। वहीं, बढ़नी बाॅर्डर से जुड़े लोगों की मानें तो सबसे सुरक्षित जोन बढ़नी का सीमावर्ती इलाका बना हुआ है। यहां पर स्मैक बेचने का पूरा सिंडिकेट चल रहा है। इसमें भारतीय क्षेत्र के अलावा नेपाली युवा भी शामिल हैं। जो खुद के साथ-साथ अन्य युवाओं को लत का शिकार बनाते हैं। इसके बाद स्मैक खरीदने पर विवश कर देते हैं।
नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पर तस्करी आम हो चुकी है। खाद्य सामग्री तक बात समझ में आती है कि मधेश के 30 किलोमीटर इलाके तक ही मैदानी इलाका है, जहां पर फसल होती है। बाकी पहाड़ के इलाके में फसलों को लेकर संकट है। ऐसे में चावल गेहूं की तस्करी होती है, जिससे तस्कर मालामाल होते हैं। इसके अलावा चांदी, उर्वरक और मादक पदार्थ की तस्करी संवेदनशील है। नेपाल से लगने वाले सीमा पर तस्करी का अलग-अलग चेन है। कहीं शराब तो कहीं नशे की गोली तो कहीं स्मैक जैसे मादक पदार्थ की हेराफेरी होती है। बढ़नी बाॅर्डर का इलाका स्मैक के लिए बदनाम हो चला है।
पुलिस टीम गई थी। जिससे विवाद हुआ है उससे तहरीर लेकर आरोपों की जांच की जाएगी। पुष्ट होने पर कार्रवाई की जाएगी।
- मयंक द्विवेदी, सीओ शोहरतगढ़
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पैकेट कोड नेम
स्कैम के धंधे को लेकर हुए विरोध के बारे में जानकारी ली गई तो नेपाल के हिस्से में आने वाले बाजार के एक दुकानदार ने बताया कि यहां सबकुछ सामान्य तो दिखता है, लेकिन वैसा नहीं है। कुछ युवक और महिलाएं हैं जो घूमते रहते हैं। इसके बाद एक चिह्नित स्थान पर खड़े हो जाते हैं। इसके पैकेट कोड नेम से सामान मंगवाने के बाद एक-दूसरे को माल पकड़ा देते हैं। यह बॉर्डर से इस पार भी आकर भी यह काम करते हैं और भारतीय इलाके में तो कई जगह बिकने की जानकारी मिलती है। कुछ स्थानों पर भारतीय और नेपाल के युवक जुटते हैं। किसी दुकान पर पर एक साथ बैठकी होती है और आदान प्रदान करते हैं। देखने में परख नहीं सकते है। रुपये की हिसाब हाथो-हाथ नहीं करते हैं, उसे बाद में कई में या ऑनलाइन भुगतान करते हैं।
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स्मैक के साथ चार पकड़े गए
बीते वर्ष ढेबरुआ पुलिस की ओर से चार संदिग्धों को पकड़ा गया था। इनके कब्जे से 52 ग्राम स्मैक बरामद की गई। पकड़े गए आरोपियों में बढ़नी कस्बे के ही दंपती के साथ एक बलरामपुर और एक बहराइच का निवासी था। इनसे पूछताछ में यह बातें सामने आईं कि दंपती बढ़नी में बैठकर बिक्री करने का काम करते थे। वहीं, दोनों अन्य आरोपी बाहर से लाकर आपूर्ति करने का काम करते थे। इसके अलावा पूर्व में भी बढ़नी बार्डर पर स्मैक की बरामदगी हुई है और कनेक्शन बढ़नी बाॅर्डर ही रहा है।
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तीन दिन पहले बढ़नी कस्बे में स्मैक की बिक्री किए जाने पर एक मोहल्ले के लोग विरोध पर उतर आए। आरोप लगाए कि संबंधित व्यक्ति स्मैक की बिक्री करता है। कई स्थानों से लोग आते हैं और विवाद होता है। पुलिस की दखल और जांच के आश्वासन के बाद विरोध शांत हुआ। स्थानीय सूत्रों से जानकारी मिली कि यहां पूरा सिंडिकेट काम करता है। बाॅर्डर के लोगों ने बताया कि पुड़िया में होने वाले इस कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य किरदार तक पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नहीं पहुंच पा रही हैं। प्यादे तक कार्रवाई सीमित रह जाती है जो पकड़े जाने पर इधर जेल जाते हैं और उधर फिर बाहर आते ही उसे धंधे में संलिप्त हो जाते हैं। सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि कुछ नई उम्र के युवा हैं जो दिनभर घूमते हैं और ठाठ-बाट से रहते हैं। उनका काम युवाओं को स्मैक की लत डलवाना और आदी होने पर खरीदने के लिए मजबूर करना है। सुरक्षा एजेंसी और पुलिस विभाग इनपर कार्रवाई भी नहीं कर पा रही है।
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इससे पहले भी बढ़नी बाॅर्डर से स्मैक की बरामदगी में बढ़नी कस्बे के ही लोग पकड़े जा चुके हैं। इनके कनेक्शन गोंडा, बाराबंकी से होना सामने आ चुका है। वहीं, बढ़नी बाॅर्डर से जुड़े लोगों की मानें तो सबसे सुरक्षित जोन बढ़नी का सीमावर्ती इलाका बना हुआ है। यहां पर स्मैक बेचने का पूरा सिंडिकेट चल रहा है। इसमें भारतीय क्षेत्र के अलावा नेपाली युवा भी शामिल हैं। जो खुद के साथ-साथ अन्य युवाओं को लत का शिकार बनाते हैं। इसके बाद स्मैक खरीदने पर विवश कर देते हैं।
नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पर तस्करी आम हो चुकी है। खाद्य सामग्री तक बात समझ में आती है कि मधेश के 30 किलोमीटर इलाके तक ही मैदानी इलाका है, जहां पर फसल होती है। बाकी पहाड़ के इलाके में फसलों को लेकर संकट है। ऐसे में चावल गेहूं की तस्करी होती है, जिससे तस्कर मालामाल होते हैं। इसके अलावा चांदी, उर्वरक और मादक पदार्थ की तस्करी संवेदनशील है। नेपाल से लगने वाले सीमा पर तस्करी का अलग-अलग चेन है। कहीं शराब तो कहीं नशे की गोली तो कहीं स्मैक जैसे मादक पदार्थ की हेराफेरी होती है। बढ़नी बाॅर्डर का इलाका स्मैक के लिए बदनाम हो चला है।
पुलिस टीम गई थी। जिससे विवाद हुआ है उससे तहरीर लेकर आरोपों की जांच की जाएगी। पुष्ट होने पर कार्रवाई की जाएगी।
- मयंक द्विवेदी, सीओ शोहरतगढ़
पैकेट कोड नेम
स्कैम के धंधे को लेकर हुए विरोध के बारे में जानकारी ली गई तो नेपाल के हिस्से में आने वाले बाजार के एक दुकानदार ने बताया कि यहां सबकुछ सामान्य तो दिखता है, लेकिन वैसा नहीं है। कुछ युवक और महिलाएं हैं जो घूमते रहते हैं। इसके बाद एक चिह्नित स्थान पर खड़े हो जाते हैं। इसके पैकेट कोड नेम से सामान मंगवाने के बाद एक-दूसरे को माल पकड़ा देते हैं। यह बॉर्डर से इस पार भी आकर भी यह काम करते हैं और भारतीय इलाके में तो कई जगह बिकने की जानकारी मिलती है। कुछ स्थानों पर भारतीय और नेपाल के युवक जुटते हैं। किसी दुकान पर पर एक साथ बैठकी होती है और आदान प्रदान करते हैं। देखने में परख नहीं सकते है। रुपये की हिसाब हाथो-हाथ नहीं करते हैं, उसे बाद में कई में या ऑनलाइन भुगतान करते हैं।
स्मैक के साथ चार पकड़े गए
बीते वर्ष ढेबरुआ पुलिस की ओर से चार संदिग्धों को पकड़ा गया था। इनके कब्जे से 52 ग्राम स्मैक बरामद की गई। पकड़े गए आरोपियों में बढ़नी कस्बे के ही दंपती के साथ एक बलरामपुर और एक बहराइच का निवासी था। इनसे पूछताछ में यह बातें सामने आईं कि दंपती बढ़नी में बैठकर बिक्री करने का काम करते थे। वहीं, दोनों अन्य आरोपी बाहर से लाकर आपूर्ति करने का काम करते थे। इसके अलावा पूर्व में भी बढ़नी बार्डर पर स्मैक की बरामदगी हुई है और कनेक्शन बढ़नी बाॅर्डर ही रहा है।