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Sitapur News: इस साल 61,546 मरीजों की ही बन सकी आभा आईडी
Mon, 13 Jul 2026 01:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:47 AM IST
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सीतापुर। जिले में आभा आईडी बनवाने में सीएचसी की प्रगति अच्छी नहीं है। इस साल महज 61,546 मरीजों की ही आईडी बन सकी है। इसमें पहला विकासखंड की प्रगति बेहद खराब है, जहां केवल 1280 मरीजों को ही इसका लाभ मिला है। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने सीएमओ को आभा आईडी बनवाने में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
जिला अस्पताल, महिला अस्पताल सहित सभी 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आभा आईडी से ही मरीजों का इलाज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आईडी को स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से निशुल्क बनवाया जा रहा है। मरीज के पास मोबाइल नंबर से लिंक आधार कार्ड होना अनिवार्य होता है। महज 10 मिनट के अंदर आईडी बन जाती है। इस आईडी पर मरीजों की बीमारी की पूरी हिस्ट्री अंकित की जाती है। साथ ही किस डॉक्टर ने कब देखा और कहां से इलाज चला, कौन-कौन सी जांचें हुईं। इससे पुरानी बीमारियों का रिकॉर्ड एक ही जगह पर होने से इलाज कराने में काफी सहूलियत रहती है। जिलाधिकारी ने हाल ही में इसकी समीक्षा की तो पता चला कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में महज 61546 मरीजों को ही आभा आईडी का लाभ मिल पाया है। जबकि इससे तीन गुना से अधिक मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि आईडी बनवाने में लापरवाही की जा रही है।
पहला में महज 1280 मरीजों की ही आईडी बन सकी है। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों की भी स्थिति खराब है। सीएमओ डॉ. सुखरंजन समद्दर ने बताया कि सभी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रत्येक मरीज की आईडी बनवाना सुनिश्चित करें।
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जिला अस्पताल, महिला अस्पताल सहित सभी 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आभा आईडी से ही मरीजों का इलाज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस आईडी को स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से निशुल्क बनवाया जा रहा है। मरीज के पास मोबाइल नंबर से लिंक आधार कार्ड होना अनिवार्य होता है। महज 10 मिनट के अंदर आईडी बन जाती है। इस आईडी पर मरीजों की बीमारी की पूरी हिस्ट्री अंकित की जाती है। साथ ही किस डॉक्टर ने कब देखा और कहां से इलाज चला, कौन-कौन सी जांचें हुईं। इससे पुरानी बीमारियों का रिकॉर्ड एक ही जगह पर होने से इलाज कराने में काफी सहूलियत रहती है। जिलाधिकारी ने हाल ही में इसकी समीक्षा की तो पता चला कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में महज 61546 मरीजों को ही आभा आईडी का लाभ मिल पाया है। जबकि इससे तीन गुना से अधिक मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं। इससे प्रतीत होता है कि आईडी बनवाने में लापरवाही की जा रही है।
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पहला में महज 1280 मरीजों की ही आईडी बन सकी है। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों की भी स्थिति खराब है। सीएमओ डॉ. सुखरंजन समद्दर ने बताया कि सभी अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वह प्रत्येक मरीज की आईडी बनवाना सुनिश्चित करें।
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