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Sitapur News: पानी घटा तो चारे व ईंधन के प्रबंध में जुटे
Thu, 30 Jul 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Thu, 30 Jul 2026 12:55 AM IST
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रेउसा इलाके में घास लेकर जाते ग्रामीण। -संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी रेउसा/रामपुर मथुरा। सरयू नदी का जलस्तर 30 सेमी घटकर बुधवार को 117.80 मीटर पर पहुंच गया। पानी अब खतरे के निशान 119 मीटर से 1.20 मीटर नीचे बह रहा है। शारदा का जलस्तर खतरे के निशान से 0.79 मीटर नीचे है। पानी कम होने से तटवर्ती गांवों से बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। इससे लोगों को फौरी राहत मिली है।
हालांकि, कटान का खतरा बढ़ने का डर लोगों को सता रहा है। बैराजों से बुधवार को 2.48 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। गांजर वासियों का मानना है कि बाढ़ का खतरा अभी कम जरूर हुआ है लेकिन टला नहीं है। बैराजों के पानी से नदियां किसी भी समय फिर उफना सकती हैं।
संभावित बाढ़ के समय जीवनयापन के लिए लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। पशुओं के चारे व भोजन के लिए ईंधन लोग एकत्र कर रहे हैं। रेउसा क्षेत्र के नगीनापुरवा निवासी जगदीश और खड्ग सिंह बुधवार को परिवार के साथ घास लेकर नाले को पार करते नजर आए। उन्होंने बताया कि पानी जरूर घटा है पर दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बाढ़ आने पर पशुओं के चारे का संकट गहरा जाता है। इसलिए चारे का प्रबंध कर रहे हैं।
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महराजदीन, उत्तम व अरविंद आदि ने बताया कि जलस्तर घटने से तटवर्ती खेतों में धीमी गति से कटान शुरू हो गया है। कटान यदि तेज हुआ तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे लोग चिंतित हैं।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में खेतों और निचले इलाकों में भरे बाढ़ के पानी का बहाव वापस नदी की ओर हो रहा है। जलस्तर कम होने के साथ कई स्थानों पर लहरों ने धीमी गति से कटान शुरू कर दिया है, जिससे तटवर्ती किसानों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और समय रहते सुरक्षात्मक उपाय कराने की मांग की है। वहीं, प्रशासन भी नदियों के जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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हालांकि, कटान का खतरा बढ़ने का डर लोगों को सता रहा है। बैराजों से बुधवार को 2.48 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। गांजर वासियों का मानना है कि बाढ़ का खतरा अभी कम जरूर हुआ है लेकिन टला नहीं है। बैराजों के पानी से नदियां किसी भी समय फिर उफना सकती हैं।
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संभावित बाढ़ के समय जीवनयापन के लिए लोग तैयारियों में जुटे हुए हैं। पशुओं के चारे व भोजन के लिए ईंधन लोग एकत्र कर रहे हैं। रेउसा क्षेत्र के नगीनापुरवा निवासी जगदीश और खड्ग सिंह बुधवार को परिवार के साथ घास लेकर नाले को पार करते नजर आए। उन्होंने बताया कि पानी जरूर घटा है पर दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। बाढ़ आने पर पशुओं के चारे का संकट गहरा जाता है। इसलिए चारे का प्रबंध कर रहे हैं।
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महराजदीन, उत्तम व अरविंद आदि ने बताया कि जलस्तर घटने से तटवर्ती खेतों में धीमी गति से कटान शुरू हो गया है। कटान यदि तेज हुआ तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे लोग चिंतित हैं।
रामपुर मथुरा क्षेत्र में खेतों और निचले इलाकों में भरे बाढ़ के पानी का बहाव वापस नदी की ओर हो रहा है। जलस्तर कम होने के साथ कई स्थानों पर लहरों ने धीमी गति से कटान शुरू कर दिया है, जिससे तटवर्ती किसानों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से कटान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने और समय रहते सुरक्षात्मक उपाय कराने की मांग की है। वहीं, प्रशासन भी नदियों के जलस्तर और कटान की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।