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Sitapur News: ले आउट स्वीकृति के बिना प्लॉटिंग पर नपेंगे बिल्डर
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Sat, 07 Mar 2026 09:17 PM IST
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सीतापुर। जिले में ले आउट स्वीकृत कराए बिना प्लॉटिंग करने वाले विक्रेताओं और विकास कार्यकर्ताओं पर अब कड़ी कार्यवाही होगी। शनिवार को नियत प्राधिकारी विनियमित क्षेत्र व नगर मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने इस संबंध में नए दिशा निर्देश जारी किए हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि भूखंडों को बेचने से पूर्व संबंधित स्थल पर वैध प्लॉटिंग करने संबंधी सभी सूचनाओं का बोर्ड लगाना जरूरी है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि भूखंड की खरीद-फरोख्त से पूर्व उसके ले-आउट स्वीकृति और विधिक स्थिति की समुचित जांच अवश्य कर लें। ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो। बताया कि शिकायत मिली है कि कुछ बिल्डर अपनी भूमि को अनियमित रूप से छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेचने का प्रयास कर रहे हैं।
साथ ही कई स्थानों पर बिना सक्षम प्राधिकारी से ले आउट स्वीकृत कराए ही फर्जी ढंग से जमीनों की खरीद फरोख्त का काम भी किया जा रहा हैकर रहे हैं। इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए ही भूमि विकासकर्ता को अब अपनी साइट पर संबंधित भू-स्थल पर गांव का नाम, परगना का नाम, भूमि का गाटा, खसरा संख्या, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 80 के तहत मुकदमा संख्या और तिथि व स्वीकृत ले-आउट के आदेश संख्या का विवरण स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वाले प्रापर्टी डीलरों व बिल्डरों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
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सिटी मजिस्ट्रेट मीनाक्षी पांडेय ने बताया कि भूखंडों को बेचने से पूर्व संबंधित स्थल पर वैध प्लॉटिंग करने संबंधी सभी सूचनाओं का बोर्ड लगाना जरूरी है। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि भूखंड की खरीद-फरोख्त से पूर्व उसके ले-आउट स्वीकृति और विधिक स्थिति की समुचित जांच अवश्य कर लें। ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो। बताया कि शिकायत मिली है कि कुछ बिल्डर अपनी भूमि को अनियमित रूप से छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेचने का प्रयास कर रहे हैं।
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साथ ही कई स्थानों पर बिना सक्षम प्राधिकारी से ले आउट स्वीकृत कराए ही फर्जी ढंग से जमीनों की खरीद फरोख्त का काम भी किया जा रहा हैकर रहे हैं। इस तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए ही भूमि विकासकर्ता को अब अपनी साइट पर संबंधित भू-स्थल पर गांव का नाम, परगना का नाम, भूमि का गाटा, खसरा संख्या, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 80 के तहत मुकदमा संख्या और तिथि व स्वीकृत ले-आउट के आदेश संख्या का विवरण स्पष्ट रूप से अंकित करते हुए बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने वाले प्रापर्टी डीलरों व बिल्डरों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
