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Sitapur News: पंचायत चुनाव में देरी से दावेदारों की बढ़ीं मुश्किलें
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Tue, 07 Apr 2026 11:47 PM IST
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सीतापुर। पंचायत चुनाव टलने से दावेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। काफी समय से मतदाताओं से संपर्क बनाए रखने के लिए दावेदारों की भागदौड़ जारी है। हर किसी की मदद को भी संभावित दावेदार आगे रहते हैं। ऐसे में चुनाव टलना दावेदारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। इसके अलावा दावेदारों के सामने समर्थकों व मतदाताओं को सहेजे रखने की चुनौती भी बढ़ गई है।
पंचायत चुनाव की कवायद बस इतनी भर दिखी कि मतदाता सूची अब 15 अप्रैल को आएगी। इस बीच खबर आई कि सरकार विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कराने की तैयारी में है। पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है।
पंचायत चुनाव टलना जनता के अधिकारों का हनन
पंचायतों में जनता को समय पर अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। पंचायत चुनाव टालना जनता के अधिकारों का हनन है। सरकार को चुनाव की तैयारी पहले से करनी चाहिए थी जो कि समय से नहीं की गई। सरकार के पास साधन की कोई कमी नहीं है। समय से वोटर लिस्ट बना सकते थे, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी किया जा सकता था। सरकार की हीलाहवाली के चलते चुनाव टलेंगे। दावेदारों से ज्यादा जनता को नुकसान होगा। जिनका मन है अबकी बदलाव करेंगे, नया प्रतिनिधि चुनेंगे उनके अधिकारों का हनन है।
- आरपी सिंह चौहान
समर्थक मायूस, समय पर हो पंचायत चुनाव
हमसे जुड़े लोग जिन्हें चुनाव का बेसब्री से इंतजार है उन्हें मायूस होना पड़ा है। हमारे पक्ष में भागदौड़ कर रहे समर्थकों के लिए चुनाव टलना उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है। बजट का मसला है, चुनाव के लिए तय बजट भी बिगड़ने लगा है। सबसे बड़ी चुनौती अपने समर्थकों व मतदाताओं को संभाले व सहेजे रखने की है। विपक्षी आपके खेमे में सेंधमारी न करने पाए इसे सुनिश्चित करना चुनौती है। भाग-दौड़ भी बढ़ जाएगी। हर जगह समय पर चुनाव हो रहे हैं तो पंचायत चुनाव भी समय पर कराए जाने चाहिए। संविधान के अनुसार समय पर चुनाव कराना सुनिश्चित करे सरकार से यही मांग है।
- अभिषेक ठाकुर
चुनाव टलें तो बढ़ाया जाए प्रधानों का कार्यकाल
पंचायत चुनाव की तैयारी करने वालों के लिए चुनाव टलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। चुनाव टलने पर प्रशासक नियुक्त होंगे। सचिव को प्रशासन नियुक्त किए जाने से विकास कार्य प्रभावित होंगे। सचिव को गांवों की मूलभूत समस्याएं ही नहीं पता हैं। अगर चुनाव समय से नहीं हो पा रहे हैं तो प्रशासक नियुक्त करने की जगह प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि विकास कार्य व पंचायतों की अन्य गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहें।
- अवधेश कुमार कटियार, प्रधान
चुनाव में देरी से मेहनत के साथ बढ़ जाएगा खर्च
पंचायत चुनाव टलने से मेहनत के साथ खर्च बढ़ जाएगा। समाज में काफी समय से सक्रियता है। पिछले छह माह में 40 से ज्यादा धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। दावतोें के निमंत्रण भी पहले की अपेक्षा चार गुना तक बढ़ गए हैं। भाग दौड़ में शारीरिक ऊर्जा के साथ आर्थिक व्यय भी होता है। ऐसे में चुनाव टलना मेहनत पर पानी फिरने जैसा है। सरकार को जन भावनाओं को देखते हुए समय पर पंचायत चुनाव कराना चाहिए। जनता भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने के पक्ष में है।
- अखिलेश यादव
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पंचायत चुनाव की कवायद बस इतनी भर दिखी कि मतदाता सूची अब 15 अप्रैल को आएगी। इस बीच खबर आई कि सरकार विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव कराने की तैयारी में है। पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है।
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पंचायत चुनाव टलना जनता के अधिकारों का हनन
पंचायतों में जनता को समय पर अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार है। पंचायत चुनाव टालना जनता के अधिकारों का हनन है। सरकार को चुनाव की तैयारी पहले से करनी चाहिए थी जो कि समय से नहीं की गई। सरकार के पास साधन की कोई कमी नहीं है। समय से वोटर लिस्ट बना सकते थे, पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन भी किया जा सकता था। सरकार की हीलाहवाली के चलते चुनाव टलेंगे। दावेदारों से ज्यादा जनता को नुकसान होगा। जिनका मन है अबकी बदलाव करेंगे, नया प्रतिनिधि चुनेंगे उनके अधिकारों का हनन है।
- आरपी सिंह चौहान
समर्थक मायूस, समय पर हो पंचायत चुनाव
हमसे जुड़े लोग जिन्हें चुनाव का बेसब्री से इंतजार है उन्हें मायूस होना पड़ा है। हमारे पक्ष में भागदौड़ कर रहे समर्थकों के लिए चुनाव टलना उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने जैसा है। बजट का मसला है, चुनाव के लिए तय बजट भी बिगड़ने लगा है। सबसे बड़ी चुनौती अपने समर्थकों व मतदाताओं को संभाले व सहेजे रखने की है। विपक्षी आपके खेमे में सेंधमारी न करने पाए इसे सुनिश्चित करना चुनौती है। भाग-दौड़ भी बढ़ जाएगी। हर जगह समय पर चुनाव हो रहे हैं तो पंचायत चुनाव भी समय पर कराए जाने चाहिए। संविधान के अनुसार समय पर चुनाव कराना सुनिश्चित करे सरकार से यही मांग है।
- अभिषेक ठाकुर
चुनाव टलें तो बढ़ाया जाए प्रधानों का कार्यकाल
पंचायत चुनाव की तैयारी करने वालों के लिए चुनाव टलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। चुनाव टलने पर प्रशासक नियुक्त होंगे। सचिव को प्रशासन नियुक्त किए जाने से विकास कार्य प्रभावित होंगे। सचिव को गांवों की मूलभूत समस्याएं ही नहीं पता हैं। अगर चुनाव समय से नहीं हो पा रहे हैं तो प्रशासक नियुक्त करने की जगह प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि विकास कार्य व पंचायतों की अन्य गतिविधियां सुचारु रूप से चलती रहें।
- अवधेश कुमार कटियार, प्रधान
चुनाव में देरी से मेहनत के साथ बढ़ जाएगा खर्च
पंचायत चुनाव टलने से मेहनत के साथ खर्च बढ़ जाएगा। समाज में काफी समय से सक्रियता है। पिछले छह माह में 40 से ज्यादा धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है। दावतोें के निमंत्रण भी पहले की अपेक्षा चार गुना तक बढ़ गए हैं। भाग दौड़ में शारीरिक ऊर्जा के साथ आर्थिक व्यय भी होता है। ऐसे में चुनाव टलना मेहनत पर पानी फिरने जैसा है। सरकार को जन भावनाओं को देखते हुए समय पर पंचायत चुनाव कराना चाहिए। जनता भी पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने के पक्ष में है।
- अखिलेश यादव