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Sitapur News: चार करोड़ खर्च, फिर भी नल से नहीं टपका पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर
Updated Wed, 25 Mar 2026 12:10 AM IST
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खड़ा टंकी का ढांचा।
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खैराबाद (सीतापुर)। क्षेत्र में जल जीवन मिशन का काम अधर में है। गामीणों को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है। दारानगर गांव में चार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से शुरू हुआ काम अधूरा है। अभी तक पानी की टंकी का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। सात हजार परिवार नल से जल आने का इंतजार कर रहे हैं।
शासन के लाख प्रयासों के बावजूद जल जीवन मिशन के तहत बनी पेयजल योजना धरातल पर बेमानी साबित हो रही है। स्वच्छ जल के इंतजार में ग्रामीणों के गले सूख रहे हैं। जिम्मेदार कोई न कोई बहाना बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। कई गांवों में तो पानी की टंकी तक नहीं बन सकी है। गांवों में योजना के नाम पर खोदी गई सड़कें बदहाल हैं। जलापूर्ति के नाम पर ट्रायल कर टंकी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।
पूरे ब्लॉक में बन सकीं 58 में महज 16 पानी की टंकियां
योजना के तहत ब्लॉक क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों में 58 स्थानों पर पानी की टंकी बनाकर वर्ष 2024 तक घरों में स्वच्छ जल पहुंचाया जाना था। अधिकारियों का कहना है कि दो वर्षों में बजट न आने से योजना अधर में है। अब यह लक्ष्य वर्ष 2028 तक पूरा करने के निर्देश हैं। पूरे ब्लॉक में 16 पानी की टंकियों से उनसे संबंधित गांवों के घरों तक पानी की सप्लाई पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
तीन वर्ष पहले ही पूरा होना था काम
दारानगर गांव में चार करोड़ दो लाख की लागत से वर्ष 2023 तक घरों में पानी पहुंचाना था लेकिन अभी पानी की टंकी का ढांचा ही खड़ा हो सका है। नवल किशोर, रजत, सुंदर, अरुण यादव, जीतू जोशी, मंगरे राठौर व अन्य ने बताया कि पाइप लाइन डालने के बाद कनेक्शन नहीं किए गए। सड़कें बदहाल हैं। इसी तरह बरसोहिया, मलुही, टेड़वा चिलौला, परसेहरा आदि गांवों में भी ग्रामीणों को स्वच्छ जल का इंतजार है।
बजट के अभाव में हो रही देरी
ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में 16 स्थानों पर पानी की टंकियों से शुद्ध पेयजल की सुचारु आपूर्ति की जा रही है। बजट के अभाव में अन्य स्थानों पर देरी हुई है, लेकिन वहां भी लगभग 80 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं।
- अंकित यादव, अवर अभियंता, जल निगम
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शासन के लाख प्रयासों के बावजूद जल जीवन मिशन के तहत बनी पेयजल योजना धरातल पर बेमानी साबित हो रही है। स्वच्छ जल के इंतजार में ग्रामीणों के गले सूख रहे हैं। जिम्मेदार कोई न कोई बहाना बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। कई गांवों में तो पानी की टंकी तक नहीं बन सकी है। गांवों में योजना के नाम पर खोदी गई सड़कें बदहाल हैं। जलापूर्ति के नाम पर ट्रायल कर टंकी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।
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पूरे ब्लॉक में बन सकीं 58 में महज 16 पानी की टंकियां
योजना के तहत ब्लॉक क्षेत्र की 79 ग्राम पंचायतों में 58 स्थानों पर पानी की टंकी बनाकर वर्ष 2024 तक घरों में स्वच्छ जल पहुंचाया जाना था। अधिकारियों का कहना है कि दो वर्षों में बजट न आने से योजना अधर में है। अब यह लक्ष्य वर्ष 2028 तक पूरा करने के निर्देश हैं। पूरे ब्लॉक में 16 पानी की टंकियों से उनसे संबंधित गांवों के घरों तक पानी की सप्लाई पहुंचाने का दावा किया जा रहा है।
तीन वर्ष पहले ही पूरा होना था काम
दारानगर गांव में चार करोड़ दो लाख की लागत से वर्ष 2023 तक घरों में पानी पहुंचाना था लेकिन अभी पानी की टंकी का ढांचा ही खड़ा हो सका है। नवल किशोर, रजत, सुंदर, अरुण यादव, जीतू जोशी, मंगरे राठौर व अन्य ने बताया कि पाइप लाइन डालने के बाद कनेक्शन नहीं किए गए। सड़कें बदहाल हैं। इसी तरह बरसोहिया, मलुही, टेड़वा चिलौला, परसेहरा आदि गांवों में भी ग्रामीणों को स्वच्छ जल का इंतजार है।
बजट के अभाव में हो रही देरी
ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में 16 स्थानों पर पानी की टंकियों से शुद्ध पेयजल की सुचारु आपूर्ति की जा रही है। बजट के अभाव में अन्य स्थानों पर देरी हुई है, लेकिन वहां भी लगभग 80 प्रतिशत काम पूरे हो चुके हैं।
- अंकित यादव, अवर अभियंता, जल निगम