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Sitapur News: रामादल ने जरिगवां में डाला डेरा, गूंजी राम नाम की धुन

संवाद न्यूज एजेंसी, सीतापुर Updated Thu, 26 Feb 2026 12:06 AM IST
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Ramadal camped in Jarigwan, the tune of Ram's name echoed.
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कल्ली चौराहा । 84 कोसी परिक्रमा बुधवार को आठवें पड़ाव जरिगवां की ओर रवाना हुई। रामधुन के बीच सीताराम का जयकारा लगाते हुए साधु-संत व श्रद्धालु धर्मयात्रा पर आगे बढ़ते नजर आए। इस दौरान जगह-जगह भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आठवें पड़ाव स्थल पर पहुंचकर रामादल ने डेरा जमाया। यहां ठहरकर श्रद्धालु भजन-कीर्तन में लीन हो गए।
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जरिगवां में रात्रि विश्राम कर रामादल बृहस्पतिवार सुबह नवें पड़ाव नैमिषारण्य के लिए प्रस्थान करेगा। नैमिषारण्य से शुरू हुई 84 कोसी परिक्रमा सात पड़ाव पार कर चुकी है। बुधवार को मड़रुवा से साधु-संत राम नाम का जयकारा लगाते हुए अगले पड़ाव की ओर बढ़ चले। राम नाम का संकीर्तन करते परिक्रमार्थी पुण्य पथ पर निकले तो समूचा वातावरण भक्तिमय हो गया। भजन-कीर्तन के साथ सुबह साढ़े नौ बजे रामदल का आठवें पड़ाव जरिगवां पर पहुंचना शुरू हो गया। उत्साह के साथ स्थानीय ग्रामीण पड़ाव स्थल पर डेरा डालने वाले परिक्रमार्थियों की सेवा-सत्कार में जुट गए।
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जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए भंडारों का आयोजन किया गया। वृद्धा आश्रम जरिगवां के संस्थापक डॉ. अजय पाल यहां लगातार 10 वर्षों से पूड़ी-सब्जी का प्रसाद रामादल में वितरित कर रहे हैं। विष्णु आश्रम सूरजपुर में लगभग 15 वर्षों से हलवा चना व चाय का प्रसाद वितरण किया जा रहा है। करनपुर में रामा दल कमेटी की तरफ से 12 वर्षों से भंडारा चलाया जा रहा है। आठवें पड़ाव पर लगभग चार किलोमीटर के दायरे में करनपुर, सूरजपुर, मल्हपुर, अटवा, जरिगवां, भोलापुर, शेखपुर, कुनेरा, जोगियाहार, बबुरीखेरा आदि गांवों में श्रद्धालुओं ने डेरा डाला है।



संत-महंत बोले पड़ाव स्थल पर बेहतर व्यवस्था



आठवें पड़ाव स्थल पर श्रद्धालुओं ने सिद्धेश्वर बाबा मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन, विष्णु आश्रम में भोले बाबा के दर्शन, मेला मैदान में संकट मोचन हनुमान जी महाराज, कल्याणेश्वर मंदिर, राघव राम बाबा, महुआ ठाकुर इत्यादि मंदिरों के दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद लिया। 84 कोसी परिक्रमा समिति के सचिव महंत संतोष दास जी ने बताया कि हर साल के मुकाबले इस बार पड़ाव स्थल पर अच्छी व्यवस्था की गई है।



परिक्रमा की अपार है महिमा



परिक्रमा में साधु-संतों व श्रद्धालुओं की आस्था का विहंगम दृश्य दिखाई दिया। लखीमपुर खीरी के रहने वाले रामदास दिव्यांग हैं। ट्राईसाइकिल से बड़े उत्साह के साथ परिक्रमा कर रहे हैं। रामदास ने बताया कि वह लगातार 30 वर्षों से परिक्रमा करने आ रहे हैं। इस परिक्रमा का पौराणिक महत्व है, इसकी महिमा अपार है। यहां पर आकर असीम आनंद मिलता है। काशी बनारस के पुष्कर मठ पीठाधीश्वर महंत श्रवणदेवाश्रम महाराज लगातार 40 वर्षों से परिक्रमा करने आ रहे हैं। महंत का कहना है कि इस धर्मयात्रा में रोजाना नए-नए पड़ाव पर पहुंचकर भक्ति के अनूठे अनुभव का एहसास होता है।



बाबा कर रहे परिक्रमा पथ को साफ



84 कोसी परिक्रमा में आस्था के अद्भुत रंग बिखर रहे हैं। एक बाबा ऐसे भी हैं जो रामादल के पहुंचने के पहले परिक्रमा मार्ग पर झाड़ू लगाकर सफाई कर रहे हैं। बाबा बच्चाराम ने बताया कि इस परिक्रमा पथ पर लाखों की संख्या में पुण्यात्माएं यात्रा कर रही हैं। परिक्रमा पथ पर आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं को कंकड़ भरे रास्ते से निकलना होता है, जिसके कारण उन्हें तकलीफ होती है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सफाई की यह मुहिम चला रहे हैं।
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