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Sitapur News: लहरपुर में 1886 में निर्मित शिवाला का किया जाएगा कायाकल्प
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लहरपुर का प्राचीन शिवाला।
- फोटो : लहरपुर का प्राचीन शिवाला।
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लहरपुर। क्षेत्र के नवीनगर स्थित प्राचीन शिवाला के वैज्ञानिक और तकनीकी संरक्षण की कवायद तेज हो गई है। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए धर्मार्थ कार्य विभाग के निदेशक को पत्र लिखा है।
इसकी एक प्रति पुरातत्व विभाग को भी भेजी है। इस मंदिर के अवशेष 2.424 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। डीएम के पत्राचार के बाद प्राचीन मंदिर के कायाकल्प की उम्मीद से ग्रामीण उत्साहित हैं।
लहरपुर के नवीनगर स्थित गाटा संख्या 1404 रकबा 2.023 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1408 रकबा 0.401 हेक्टेयर आबादी मंदिर के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इस स्थान पर प्राचीन शिवाला बना हुआ है। यह ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मंदिर की संरचना प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह संरक्षण के अभाव में जर्जर अवस्था में है। यह मंदिर किसी भी शासकीय या गैर शासकीय संस्था के नियमित प्रबंधन व संरक्षण में नहीं है। इस वजह से इसका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। डीएम के निर्देश पर उपजिलाधिकारी लहरपुर आकांक्षा गौतम ने प्राचीन शिवाला के वैज्ञानिक व तकनीकी तरीके से संरक्षण और जीर्णोद्धार कराने की आख्या भेजी है। उनकी आख्या व मौके के फोटोग्राफ सहित विस्तृत आख्या के साथ डीएम ने धर्मार्थ कार्य विभाग व पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा है।
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इसकी एक प्रति पुरातत्व विभाग को भी भेजी है। इस मंदिर के अवशेष 2.424 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। डीएम के पत्राचार के बाद प्राचीन मंदिर के कायाकल्प की उम्मीद से ग्रामीण उत्साहित हैं।
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लहरपुर के नवीनगर स्थित गाटा संख्या 1404 रकबा 2.023 हेक्टेयर व गाटा संख्या 1408 रकबा 0.401 हेक्टेयर आबादी मंदिर के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। इस स्थान पर प्राचीन शिवाला बना हुआ है। यह ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। मंदिर की संरचना प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
यह संरक्षण के अभाव में जर्जर अवस्था में है। यह मंदिर किसी भी शासकीय या गैर शासकीय संस्था के नियमित प्रबंधन व संरक्षण में नहीं है। इस वजह से इसका अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। डीएम के निर्देश पर उपजिलाधिकारी लहरपुर आकांक्षा गौतम ने प्राचीन शिवाला के वैज्ञानिक व तकनीकी तरीके से संरक्षण और जीर्णोद्धार कराने की आख्या भेजी है। उनकी आख्या व मौके के फोटोग्राफ सहित विस्तृत आख्या के साथ डीएम ने धर्मार्थ कार्य विभाग व पुरातत्व विभाग को पत्र भेजा है।
