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सुना है क्या: महिला बॉस का दिल की कहानी, साथ ही 'मैडम की जीत और नौकरी पूरी लेकिन मुसीबत पीछे पड़ी' के किस्से

अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Mon, 06 Apr 2026 09:06 AM IST
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सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...

suna hai kya Female Boss Heartfelt Along with Tales of Madam Triumph and Job Completed Yet Trouble Still Looms
सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'महिला बॉस का दिल...' की कहानी। इसके अलावा 'पराजित मैडम की जीत' और 'नौकरी पूरी लेकिन मुसीबत पीछे पड़ी' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

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महिला बॉस का दिल...

पुरुष बॉस पर महिला कार्मिकों के उत्पीड़न के आरोप तो लगते रहते हैं लेकिन जन कल्याण में लगे महकमे में इन दिनों एक महिला अधिकारी के किस्से चर्चा में हैं। यह महिला अधिकारी अपने अधीन काम करने वाले पुरुष बाबू पर डोरे डाल रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि महिला अधिकारी के रवैये से आजिज पुरुष बाबू दफ्तर से उठकर मंदिर या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर जाता है तो महिला अधिकारी वहां भी आ धमकती है। पुरुष बाबू ने कई बार उसे समझाया भी लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। महकमे के लोग इस मसले पर चटखारे लेकर बात कर रहे हैं। नतीजे में ये पंक्तियां आपको पढ़ने को मिल रही हैं।

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पराजित मैडम की जीत

रील लाइफ छोड़कर सियासत में जलजला कायम करने के बावजूद 2024 में रण में चित हो चुकीं मैडम भले ही चुनाव हार गई हैं लेकिन पार्टी पर प्रभाव के लिहाज से उनकी जीत कायम है। तभी तो हारी हुई सीट वाले जिले में घोषित भगवा दल की जिला कार्यसमिति में पार्टी का वर्षों झंडा ढोने वाले जमीनी मुलाजिमों के बजाय मैडम के पाले हुए मुलाजिमों को तरजीह दी गई है। यही नहीं, मैडम के कारखास का भी उतना ही प्रभाव है। तभी तो मैडम ने खुद सामने न आकर कारखास के जरिये अपने सभी मुलाजिमों को संगठन में सेट करा दिया।

नौकरी पूरी लेकिन मुसीबत पीछे पड़ी

एक आयोग के बड़े अधिकारी कुछ दिन पहले ही सेवानिवृत्त हुए। अब उनके खिलाफ शिकायतों का अंबार लगता जा रहा है। शासन तक शिकायतें पहुंच गईं। शिकायतों में साहब की हनक के किस्से हैं। सरकारी संपत्तियों के इस्तेमाल और विभागीय खेल भी शामिल हैं। ये पत्र अब आगे बढ़ने लगे हैं। उनकी नौकरी तो पूरी हो गई लेकिन अब मुसीबत पीछे पड़ गई है।

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