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Sonebhadra News: बारिश में डेंगू-मलेरिया का खतरा बढ़ा हाई रिस्क वाले 40 गांवों पर विशेष नजर
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रॉबर्ट्सगंज में हल्की बारिश में छाता लगाकर निकली महिलाएं। संवाद
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बारिश के मौसम में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। डीएम चर्चित गौड़ के निर्देश पर जिले के 40 उच्च जोखिम वाले गांव चिह्नित किए गए हैं।
इन गांवों में विशेष निगरानी के साथ प्रत्येक मंगलवार को चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत शनिवार से घर-घर दस्तक अभियान भी शुरू किया जाएगा।
अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर बुखार समेत अन्य संचारी रोगों के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। जहां बुखार के मरीज मिलेंगे, वहां मलेरिया की किट से तत्काल जांच की जाएगी। डेंगू जैसे लक्षण मिलने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।
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अभियान में कोई परिवार छूट न जाए, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में 1,826 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम बुखार, सर्दी-जुकाम, टीबी से मिलते-जुलते लक्षण, कुपोषण और फाइलेरिया सहित पांच प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी जुटाएगी।
मरीज मिलने पर उपचार की तत्काल व्यवस्था की जाएगी और उसका विवरण ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। उच्च जोखिम वाले गांवों की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर बीपीएम और सीएचसी-पीएचसी अधीक्षकों, जबकि जिला स्तर पर जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डेंगू मरीजों के उपचार की तैयारी के तहत प्रत्येक सीएचसी में पांच-पांच तथा मेडिकल कॉलेज में 10 बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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इन गांवों में विशेष निगरानी के साथ प्रत्येक मंगलवार को चिकित्सा शिविर लगाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत शनिवार से घर-घर दस्तक अभियान भी शुरू किया जाएगा।
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अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर बुखार समेत अन्य संचारी रोगों के संभावित मरीजों की पहचान करेंगी। जहां बुखार के मरीज मिलेंगे, वहां मलेरिया की किट से तत्काल जांच की जाएगी। डेंगू जैसे लक्षण मिलने पर मरीज को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाएगा।
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अभियान में कोई परिवार छूट न जाए, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में 1,826 टीमें गठित की गई हैं। प्रत्येक टीम बुखार, सर्दी-जुकाम, टीबी से मिलते-जुलते लक्षण, कुपोषण और फाइलेरिया सहित पांच प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी जुटाएगी।
मरीज मिलने पर उपचार की तत्काल व्यवस्था की जाएगी और उसका विवरण ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। उच्च जोखिम वाले गांवों की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर बीपीएम और सीएचसी-पीएचसी अधीक्षकों, जबकि जिला स्तर पर जिला मलेरिया अधिकारी धर्मेंद्र नारायण श्रीवास्तव को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डेंगू मरीजों के उपचार की तैयारी के तहत प्रत्येक सीएचसी में पांच-पांच तथा मेडिकल कॉलेज में 10 बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।