सोनभद्र। जिले से होकर प्रयागराज तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। किसान अपनी उपजाऊ और पुश्तैनी जमीन एक्सप्रेस-वे के लिए नहीं देना चाहता। किसानों ने सरकार से परियोजना का मार्ग बदलने और किसानों की खेती व आवास को सुरक्षित रखने की मांग की। रविवार को चतरा ब्लॉक के खुझ्झा भरसही गांव में पेड़ हैं तो प्राण हैं अभियान के तहत सैकड़ों ग्रामीणों और किसान परिवारों के बीच फलदार पौधों का वितरण किया गया। इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए संदीप मिश्रा ने कहा कि विकास के नाम पर किसानों की वर्षों पुरानी खेती और पुश्तैनी जमीन का अधिग्रहण किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। उनका आरोप था कि प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे से स्थानीय किसानों को नुकसान होगा, जबकि इसका अधिक लाभ बड़ी कंपनियों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार यदि एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराना चाहती है तो उसका मार्ग ऐसी भूमि से तय करे, जहां किसानों की खेती, घर और आजीविका प्रभावित न हों। उन्होंने कहा कि किसानों की सहमति के बिना किसी भी विकास परियोजना को थोपना उचित नहीं है और किसान अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) रामराज सिंह ने भी किसानों की चिंताओं का समर्थन करते हुए कहा कि क्षेत्र के अधिकांश किसान अपनी जमीन बचाना चाहते हैं। उन्होंने सरकार से किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए परियोजना के प्रस्तावित मार्ग पर पुनर्विचार करने की मांग की। कहा कि किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा आगे भी किसानों, आदिवासियों और आम जनता के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा। इस मौके पर सुरेंद्र मौर्य, रामराज सिंह, अभय सिंह, रमेश, सुरेश, गिरजा शंकर, आकाश चौहान, दिनेश भारती, विजय चौहान, शत्रुघ्न बिंद आदि किसान मौजूद रहे।