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Sonebhadra News: पक्की छत के लिए तरस रहे खाद-बीज के भंडार

Thu, 02 Jul 2026 01:32 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2026 01:32 AM IST
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Fertilizer and seed depots longing for a concrete roof
सहकारी समितियों को ग्रामीण कृषि व्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है। यहीं से किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण मिलता है। सात दशक पहले जिले में 50 से अधिक साधन सहकारी समितियों और बी-पैक्स के भवन बनाए गए। इनमें से 25 से अधिक भवन जर्जर हो चुके हैं। कहीं छत टपक रही हैं तो कहीं दीवारों में चौड़ी दरारें आ गई हैं। कई भवनों का प्लास्टर टूट-टूटकर गिर रहा है। बरसात के दिनों में लाखों रुपये की खाद को सुरक्षित रखने के लिए कर्मचारियों को पॉलिथीन और तिरपाल का सहारा लेना पड़ता है। कर्मचारी डर-डर काम करते हैं। किसान भी जर्जर भवन में बैठने में भी डरते हैं। कई समितियों के सचिव वर्षों से भवनों के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। जिले के नियामताबाद, चहनिया, सकलडीहा, शहाबगंज, धानापुर, इलिया, दुलहीपुर आदि क्षेत्रों की समितियों का हाल लगभग एक जैसा है। बारिश शुरू होते ही गोदामों में पानी भर जाता है। भवन की छत से रिसाव शुरू हो जाता है। इससे खाद और बीज की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका भी बढ़ जाती है। बारिश होने पर अधिकांश समितियों में खाद सुरक्षित रखना चुनौती हो जाती है। गोदामों की छतों से लगातार पानी टपकता है। कई स्थानों पर अभिलेख और कंप्यूटर भी पानी से खराब हो जाते हैं। नियामताबाद ब्लॉक की साधन सहकारी समिति पचोखर का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। कार्यालय की दीवारें फट गई हैं। छत टपक रही है। समिति के सचिव महेंद्र यादव ने बताया कि भवन काफी पुराना हो चुका है और नए भवन की तत्काल आवश्यकता है। उतड़ी ग्राम सभा स्थित बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति टांडा कला की हालत बेहद खराब है। बरसात में छत से लगातार पानी टपकता है। भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें हैं। सचिव अशोक यादव का कहना है कि कई बार अधिकारियों को पत्र भेजा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। बी-पैक्स इलिया का भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। गोदाम, कार्यालय और बीज भंडारण केंद्र एक ही पुराने भवन में संचालित हो रहे हैं। सचिव भोलानाथ के अनुसार भवन की मरम्मत के लिए कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने अब तक निरीक्षण तक नहीं किया। दुलहीपुर क्षेत्र की हरिशंकरपुर और चांदीतारा साधन सहकारी समितियों में बारिश के दौरान खाद को बचाने के लिए कर्मचारियों को तिरपाल डालना पड़ता है। प्लास्टर टूटकर गिरता रहता है और रिकॉर्ड वाले कागजात भी खराब हो रहे हैं। किसानों को समय से खाद नहीं मिल पाती है। चहनिया क्षेत्र की कैलावर, रमौली और लक्ष्मणगढ़ समितियों में गोदामों की छतें जगह-जगह से टपक रही हैं। लाखों रुपये की डीएपी और यूरिया तिरपाल के सहारे सुरक्षित रखी जा रही है। छह दशक में भवनों का समुचित जीर्णोद्धार नहीं हो पाया। करीब सात दशक पुराने साधन सहकारी समिति धूसखास का भवन भी जर्जर हो चुका है। दीवारों में बड़ी दरारें हैं और छत से लगातार पानी रिसता है। कर्मचारी डर के साये में काम कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द नया भवन नहीं बना तो आंदोलन किया जाएगा।
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--रामनारायण पांडेय, किसान, चहनिया ने कहा कि बरसात में खाद लेने आते हैं तो बोरी गीली मिलती है। तिरपाल के नीचे खाद रखी जाती है। कई बार खाद जम जाती है। मजबूरी में वही खाद लेनी पड़ती है।
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नारद तिवारी, किसान, बलुआ ने कहा कि गोदाम की छत से प्लास्टर गिरता रहता है। डर के कारण अधिक देर तक गोदाम में बैठना मुश्किल होता है। ऊपर से खाद भी खराब हो रही है।-
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अरुण कुमार सिंह, एडीसीओ ने कहा कि जर्जर सहकारी समिति भवनों के जीर्णोद्धार एवं नए भवनों के निर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।--


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