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Sonebhadra News: गर्भवती पत्नी और अजन्मे बच्चे की हत्या में पति को 10 साल सश्रम कैद
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सोनभद्र। ओबरा थानाक्षेत्र के खैराही पनारी गांव में अपनी गर्भवती पत्नी अनीता की पीटकर हत्या करने के मामले में जिला सत्र न्यायाधीश रामसुलीन सिंह की अदालत ने मंगलवार को दोषी पति राम जियावन को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की अदायगी न करने पर उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। यह घटना छह जून 2015 को प्रकाश में आई थी, जब ओबरा पुलिस को खैराही पनारी निवासी राम जियावन द्वारा अपनी पत्नी अनीता की पिटाई करने और उसकी मृत्यु का मामला संज्ञान में आया। प्राथमिकी के अनुसार, अनीता उस समय सात माह की गर्भवती थी। मामले में मृतका की ननद गीता को भी आरोपी बनाया गया था, हालांकि विचारण के दौरान ही उसकी मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ कोई फैसला नहीं सुनाया गया। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या और गर्भस्थ शिशु की मृत्यु के आरोप में मामला दर्ज कर न्यायालय में चार्जशीट पेश की थी। लगभग दस साल चली सुनवाई के बाद, न्यायालय ने विभिन्न साक्ष्यों और विशेष लोक अभियोजक द्वारा प्रस्तुत दलीलों के आधार पर राम जियावन को दोषी पाया।
न्यायालय ने पाया कि घटना के समय अनीता के पेट में सात माह का गर्भ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर चार चोटें पाई गईं, जिनमें दाहिनी ओर पसलियों में फ्रैक्चर भी शामिल था। मृत्यु का कारण मौत से पहले लगी चोटों (एंटी-मॉर्टम) के कारण शॉक और हेमरेज बताया गया, जिसमें गॉल ब्लैडर और लिवर का फटना भी शामिल था। न्यायालय ने इस कृत्य को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषी पति को कठोर कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला एक बार फिर समाज में घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों और महिलाओं के प्रति क्रूरता को उजागर करता है। इस प्रकार के अपराधों के लिए कठोर दंड न्याय व्यवस्था द्वारा ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को दर्शाता है।
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न्यायालय ने पाया कि घटना के समय अनीता के पेट में सात माह का गर्भ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके शरीर पर चार चोटें पाई गईं, जिनमें दाहिनी ओर पसलियों में फ्रैक्चर भी शामिल था। मृत्यु का कारण मौत से पहले लगी चोटों (एंटी-मॉर्टम) के कारण शॉक और हेमरेज बताया गया, जिसमें गॉल ब्लैडर और लिवर का फटना भी शामिल था। न्यायालय ने इस कृत्य को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषी पति को कठोर कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला एक बार फिर समाज में घरेलू हिंसा के गंभीर परिणामों और महिलाओं के प्रति क्रूरता को उजागर करता है। इस प्रकार के अपराधों के लिए कठोर दंड न्याय व्यवस्था द्वारा ऐसे कृत्यों को रोकने के लिए उठाए गए कदमों को दर्शाता है।
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