सोनभद्र। कभी नक्सलियों के प्रभाव और संगीनों के साये में रहने वाली रॉबर्ट्सगंज कोतवाली अब भय नहीं, भरोसे का अनुभव कराएगी। अत्याधुनिक सुविधाओं, कॉर्पोरेट ऑफिस जैसे इंटीरियर, डिजिटल व्यवस्था और फरियादियों के अनुकूल माहौल के साथ कोतवाली का पूरा स्वरूप बदल गया है। वाराणसी जोन के पहले मॉडल थाने के रूप में विकसित की जा रही यह कोतवाली पुलिसिंग की नई इबारत लिखने को तैयार हो रही है। पुलिस आधुनिकीकरण योजना के तहत जनवरी 2026 से रॉबर्ट्सगंज कोतवाली के आधुनिकीकरण का काम शुरू हुआ था, जो अगस्त 2026 में पूरा होना है। कोतवाली में विवेचकों के लिए वातानुकूलित (एसी) और वाई-फाई युक्त कार्यकक्ष बनाए गए हैं। फरियादियों के लिए आरामदायक एसी वेटिंग रूम, आधुनिक मेस, बैरक, डिजिटल ई-मालखाना और कार्यालय तैयार किए गए हैं। खास बात यह है कि यहां आने वाले फरियादियों को भय नहीं, बल्कि भरोसे का माहौल मिलेगा। परिसर में प्रवेश करते ही साफ-सुथरा वातावरण और मित्रवत पुलिसिंग की झलक दिखाई देगी। उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर स्थित सोनभद्र जिले की रॉबर्ट्सगंज कोतवाली कभी नक्सल प्रभावित इलाकों में आती थी। इसका निर्माण भी सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया गया था। कोतवाली परिसर से ही दूर तक होने वाली गतिविधि पर नजर रखी जाती थी। शाम ढलते ही परिसर में सन्नाटा पसर जाता था। सुरक्षा कारणों से प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाते थे। नई कोतवाली में तकनीक को प्राथमिकता दी गई है। अपराधियों का रिकॉर्ड, विवेचना से जुड़ीं सूचनाएं, मालखाने में जमा सामान और अन्य अभिलेख अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगे। यानी एक क्लिक पर जानकारी हासिल की जा सकेगी। कोतवाली को पूरी तरह पेपरलेस बनाने की दिशा में पहले से काम शुरू कर दिया गया है। आधुनिक भवन के साथ ही कोतवाली परिसर को पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा। यहां इको फ्रेंडली पार्क विकसित किया जाएगा, जहां आसपास के लोग सुबह-शाम टहल सकेंगे। इससे कोतवाली परिसर केवल पुलिस गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आम नागरिकों के लिए भी एक सकारात्मक सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित होगा।