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Sonebhadra News: तिलस्मी दुर्ग विजयगढ़ में किरन सागर या मिरन सागर, होगी जांच

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 30 Mar 2026 11:31 PM IST
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Kiran Sagar or Miran Sagar in the magical fort Vijaygarh, investigation will be done
विजयगढ़ दुर्ग स्थित सरोवर और उसके किनारे मजार जिसके मिरन नामकरण पर उठाए जा रहे सवाल, संवाद
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सोनभद्र। तिलस्मि बनावट के साथ ही हिंदी जगत के प्रथम उपन्यास चंद्रकांता को लेकर चर्चा में रहने वाला विजयगढ़ दुर्ग में किरन सागर है या मिरन सागर है। इसकी जांच की जाएगी। सोनभद्र के इतिहास पुस्तक के लेखन के साथ ही पिछले दिनों हुए आयोजन में भी मिरन साहिब के वजूद पर सवाल उठाए गए थे।
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दावा किया गया था कि मिरन का स्वरूप काल्पनिक है। विजयगढ़ दुर्ग पर मौजूद किरण सागर को मिरन सागर नाम दिया गया और उसी की आड़ में मिरन साहिब की मजार बना ली गई। इन दावों में कितनी सत्यता है? अब इसकी भी जांच होगी।
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इसके लिए जहां भाजपा जिलाध्यक्ष नंदलाल गुप्ता ने सप्ताह भर पूर्व सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर जांच की गुहार लगाई। वहीं मुख्यमंत्री के यहां से भी इस मामले के ऐतिहासिक तथ्य की जांच के निर्देश दिए गए है। डीएम बीएन सिंह ने चार सदस्यीय टीम गठित कर दी जा रही है।
विजयगढ़ दुर्ग पर दो प्रमुख सरोवर स्थित हैं। इसमें एक का नाम रामसागर तो दूसरे का किरणसागर बताया जाता है। हालांकि मुस्लिम समाज से जुड़ा पक्ष किरण सागर को मिरन सागर का दर्जा देता है।
इस सरोवर के किनारे एक मजार भी स्थित जिसे मिरन साहिब का मजार होने का दावा करते हुए प्रतिवर्ष यहां बड़े उर्स का आयोजन भी किया जाता है। मुख्यमंत्री को सौंपे पत्र में कहा गया है कि विजयगढ़ दुर्ग सोनभद्र की ऐतिहासिक और गौरवशाली धरोहर है।
इस किले का धार्मिक, सांस्कृतिक और सामरिक तीनों दृष्टि से विशेष महत्व रहा है। यह किला पूर्व में चंदेल राजानों का गढ़ रह चुका है। किले पर स्थित सरोवर पर हिंदू समाज-संस्कृति से जुड़े लोगों के लिए वर्षों से आस्था के केंद्र है।
पवित्र रामसरोवर से प्रतिवर्ष हजारों लोग कांवड़ यात्रा के लिए जल लेने पहुंचते हैं। परंपरागत तरीके से प्रतिवर्ष यहां हिंदू मेला लगता है। सैकड़ों लोग प्रतिदिन इस ऐतिहासिक किले को करीब से निहारने आते हैं।
पत्रक में दावा किया गया है कि इसकी आड़ में लेकिन कुछ वर्षों से यहां एक मिरन शाह (मिरन साहिब) के नाम से मजार-मकबरे का निर्माण कर उर्स का आयोजन किया जा रहा है।
जबकि इसकी मौजूदगी के संबंध में कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। न ही किले पर कभी इस नाम के किसी व्यक्ति का शासन रहा या किसी रूप में इस नाम के किसी व्यक्ति से किले से जुड़ाव ही रहा। किला एक पहाड़ी पर स्थित है। उसके चारों ओर क्षेत्र है जो वन विनाग की संपत्ति है।
वर्तमान में किला पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। आरोप है कि उर्स और मजार की आड़ में ऐसी गतिविधियां की जा रही है इससे सरोवर की पवित्रता तो प्रभावित हो ही रही है, किले की ऐतिहासिक गरिमा और उससे जुड़ी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। प्रकरण की जांच करते हुए ठोस कदम उठाने और दुर्ग को संरक्षित करते हुए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग उठाई गई है।
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