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Sonebhadra News: सोनभद्र का समोसा, चंदौली का गुलाब जामुन और बलिया का सत्तू बनेगा जिले की पहचान
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एक जिला-एक उत्पाद के बाद अब हर जिले का एक व्यंजन भी उसकी पहचान बयां करेगा। सोनभद्र के समोसे और चंदौली के गुलाब जामुन को पहचान दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। जाैनपुर का अचार, बलिया का सत्तू और मऊ का भेली वहां के स्वाद का प्रतिनिधित्व करेगा। शासन के निर्देश पर हर जिले से एक खास व्यंजन का प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। शासन से मंजूरी मिलते ही उसे जिले की पहचान के तौर पर स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
एक जिला एक उत्पाद के जरिए न सिर्फ स्थानीय हुनर को पहचान मिली है, बल्कि उसे प्रोत्साहित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए है। इस योजना की तरह ही प्रदेश की समृद्ध पाक कला विरासत को वैश्विक खाद्य मानचित्र पर स्थापित करने की पहल की गई है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक जिला अपने अनूठे स्वाद, संस्कृति और पहचान को प्रदर्शित करे। स्थानीय बाजारों में व्यंजन की लोकप्रियता, उपलब्धता, मांग और नवाचारों की संभावनाओं के आधार पर इसका चयन किया जाना है। इसके लिए सभी जिलों से वहां के लोकप्रिय व्यंजन और उसे वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ओडीओसी) में चयनित करने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। सोनभद्र से तीन व्यंजनों के नाम सुझाए गए हैं। इसमें समोसा, गुलाब जामुन और श्रीअन्न शामिल हैं। गुलाब जामुन को कई अन्य जिलों ने भी प्रस्तावित किया है, जबकि श्रीअन्न कुछ तबके तक ही सीमित हैं। इसमें नवाचार और नए जुड़ाव की संभावनाएं भी सीमित है। इसके मद्देनजर समाेसा को तरजीह दी गई है। हर बाजार में चाय, नाश्ते की दुकान पर आसानी से उपलब्ध होने वाला समोसा आदिवासी अंचल के आम जन में काफी लोकप्रिय भी है। खास बात यह कि समोसा में नवाचार के साथ विविधता की भी पूरी संभावनाएं हैं। ऐसे में ओडीओसी में इसका दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।
-विनोद चौधरी, उपायुक्त उद्योग ने बताया कि एक जिला एक व्यंजन के तहत जिले से समोसा सहित तीन व्यंजनों के नाम सुझाए गए हैं। इसमें समाेसा सबसे उपयुक्त है और इससे रोजगार क्षेत्र में नए लोगों को जोड़ने की संभावनाएं भी अधिक हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इस पर काम शुरू किया जाएगा।
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एक जिला एक उत्पाद के जरिए न सिर्फ स्थानीय हुनर को पहचान मिली है, बल्कि उसे प्रोत्साहित करने के लिए भी कई कदम उठाए गए है। इस योजना की तरह ही प्रदेश की समृद्ध पाक कला विरासत को वैश्विक खाद्य मानचित्र पर स्थापित करने की पहल की गई है। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक जिला अपने अनूठे स्वाद, संस्कृति और पहचान को प्रदर्शित करे। स्थानीय बाजारों में व्यंजन की लोकप्रियता, उपलब्धता, मांग और नवाचारों की संभावनाओं के आधार पर इसका चयन किया जाना है। इसके लिए सभी जिलों से वहां के लोकप्रिय व्यंजन और उसे वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन (ओडीओसी) में चयनित करने के लिए प्रस्ताव मांगा गया है। सोनभद्र से तीन व्यंजनों के नाम सुझाए गए हैं। इसमें समोसा, गुलाब जामुन और श्रीअन्न शामिल हैं। गुलाब जामुन को कई अन्य जिलों ने भी प्रस्तावित किया है, जबकि श्रीअन्न कुछ तबके तक ही सीमित हैं। इसमें नवाचार और नए जुड़ाव की संभावनाएं भी सीमित है। इसके मद्देनजर समाेसा को तरजीह दी गई है। हर बाजार में चाय, नाश्ते की दुकान पर आसानी से उपलब्ध होने वाला समोसा आदिवासी अंचल के आम जन में काफी लोकप्रिय भी है। खास बात यह कि समोसा में नवाचार के साथ विविधता की भी पूरी संभावनाएं हैं। ऐसे में ओडीओसी में इसका दावा सबसे मजबूत माना जा रहा है।
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-विनोद चौधरी, उपायुक्त उद्योग ने बताया कि एक जिला एक व्यंजन के तहत जिले से समोसा सहित तीन व्यंजनों के नाम सुझाए गए हैं। इसमें समाेसा सबसे उपयुक्त है और इससे रोजगार क्षेत्र में नए लोगों को जोड़ने की संभावनाएं भी अधिक हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद इस पर काम शुरू किया जाएगा।
