फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   Silken dreams will be woven from Sonanchal's Tussar silk.

Sonebhadra News: सोनांचल के टसर से बुने जाएंगे रेशमी सपने

Sun, 26 Jul 2026 11:39 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2026 11:39 PM IST
विज्ञापन
Silken dreams will be woven from Sonanchal's Tussar silk.
कुर्ते के कपड़े की बुनाई होते देखते लोग।  स्वयं
सोनभद्र। खनिज संपदा और घने जंगलों के लिए पहचाना जाने वाला सोनभद्र जिला अब टसर रेशम से बने मखमली कपड़ों के जरिये नई पहचान गढ़ने की तैयारी में है। यहां तैयार होने वाला टसर धागा वाराणसी, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तो भेजा जाता ही है, अब पहली बार जिले में ही धागाकरण के साथ रेशमी कपड़े की बुनाई की शुरुआत भी हो गई है। शुरुआती चरण में गमछे और कुर्ते तैयार किए जा रहे हैं। आगे साड़ी, स्टॉल और अन्य परिधान भी स्थानीय स्तर पर बनाए जाएंगे। इससे ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खुलेंगे। प्रदेश में सोनभद्र के साथ ही चंदौली, मिर्जापुर, झांसी, ललितपुर, फतेहपुर, बांदा और चित्रकूट में टसर रेशम का उत्पादन होता है। इस समय सोनभद्र में सबसे ज्यादा टसर रेशम का उत्पादन हो रहा है, जो प्रदेश के कुल टसर रेशम उत्पादन का करीब 70 फीसदी है। यहां टसर रेशम उत्पादन की पूरी शृंखला विकसित की जा रही है। इसमें अंडा उत्पादन, कीट पालन, कोकून तैयार करना, धागाकरण और फिर कपड़ा बुनाई शामिल है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 90 फीसदी डीएफएल (डिजीज फ्री लेइंग्स) का उत्पादन भी सोनभद्र में हो रहा है। चंदौली और झांसी में डीएफएल का उत्पादन कम है। जिले के विस्तृत वन क्षेत्र और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण के कारण यहां टसर रेशम उद्योग लगातार विस्तार कर रहा है। रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने इस वर्ष लक्ष्य भी बढ़ाया है। पिछले वर्ष जहां 1 करोड़ 72 लाख डीएफएल उत्पादन का लक्ष्य था, वहीं इस वर्ष इसे बढ़ाकर 1 करोड़ 74 लाख कर दिया गया है। इसके लिए किसानों को अंडों की आपूर्ति और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग की तरफ से इस वर्ष धागाकरण को बढ़ावा देने के लिए 55 नई मशीनें स्थापित की गई हैं। इनमें 30 मशीनें दुद्धी और 25 मशीनें गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम में लगाई गई हैं। इन केंद्रों पर महिलाओं और युवाओं को धागाकरण और कपड़ा बुनाई का प्रशिक्षण देने का कार्य भी शुरू हुआ है। वर्तमान में करीब 150 लोग इस कार्य से जुड़े हैं। धागाकरण से जुड़ी महिलाएं अच्छी आमदनी कर रही हैं। करमा ब्लॉक के बट गांव में धागाकरण का काम पहले से चल रहा है। यहां 80 मशीनें लगाई गईं हैं। हाल ही में यहां कपड़ा बुनाई का भी काम शुरू हुआ है। दुद्धी और गोविंदपुर आश्रम में 55 नई मशीनें उपलब्ध कराते हुए वहां भी धागाकरण और कपड़ा बुनाई का काम शुरू किया गया है। इससे जिले में टसर रेशम से धागाकरण और कपड़ा बुनाई के काम में तेजी आई है। गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवाश्रम में धागाकरण और कपड़ा बुनाई का नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रेशम विभाग की योजना भविष्य में और प्रशिक्षण केंद्र खोलने की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा ग्रामीण परिवारों, विशेषकर महिलाओं को इस उद्योग से जोड़ा जा सके। जिले में उत्पादित होने वाला टसर रेशम वाराणसी, भागलपुर (बिहार), चाईबासा (झारखंड), छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा तक जा रहा है, वहां इसकी मांग सबसे अधिक है। अच्छी क्वालिटी का रेशम सात हजार रुपये प्रति किलो और मोटा रेशम तीन से साढ़े तीन हजार रुपये प्रति किलो बिकता है। रेशम विकास विभाग की तरफ से रेशम उत्पादन के लिए पहले किसानों को प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षित किसान उत्पादन का कार्य करते हैं। विभाग की तरफ से रेशम कीट उपलब्ध कराया जाता है। एक वर्ष में रेशम की तीन फसल ली जाती है। पहली फसल जुलाई, दूसरी नवंबर-दिसंबर और तीसरी फसल फरवरी में ली जाती है। रेशम की दूसरी फसल के उत्पादन सबसे ज्यादा व अच्छा रेशम प्राप्त होता है। इसके अपेक्षा पहली और तीसरी फसल में उत्पादन कम होता है। रेशम कीटों के पालन के लिए अर्जुन के पेड़ महत्वपूर्ण हैं, जिले में बड़ी संख्या में अर्जुन के पेड़ लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed